मोदी के गुजरात में शराबबंदी फेल? किसकी छत्रछाया में बिक रही शराब
गुजरात में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं... विपक्ष का आरोप है कि पूर्ण बंदी के दावों के बावजूद अवैध शराब की बिक्री जारी है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में शराबबंदी का सख्त कानून लागू है.. वहां एक बार फिर बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.. कच्छ जिले के धनेटी और वडवाला गांवों के पास पुलिस की राज्य निगरानी सेल ने एक बड़ी छापेमारी की.. जिसमें 56 हजार 88 बोतलें विदेशी शराब बरामद हुईं.. इनकी कीमत करीब 4 करोड़ रुपये आंकी गई है.. बता दें कि यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है.. बल्कि गुजरात सरकार की शराबबंदी नीति की हकीकत पर भी बड़ा सवाल उठाती है.. कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने इस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार सिर्फ दावे करती है.. लेकिन जमीन पर शराब की तस्करी धड़ल्ले से चल रही है.. उन्होंने गृह मंत्री से पूछा कि पूर्ण शराबबंदी कब लागू होगी..
आपको बता दें कि गुजरात में शराब बंदी होने के बावजूद शराब धड़ल्ले से मिल रही है.. और समस समय पर शराब की खेप भी बरामद होती है.. लेकिन सरकार शराब तस्करी पर रोक लगाने में पूरी तरह से फेल है.. बता दें कि यह छापेमारी 20 फरवरी को हुई… जब गुजरात पुलिस की एसएमसी टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर धनेटी.. और वडवाला गांवों के पास ऑपरेशन चलाया.. यहां छह वाहनों दो ट्रक, तीन मिनी ट्रक और एक पिकअप वैन में छिपाकर रखी गई शराब बरामद की गई.. जिसमें कुल 56 हजार 88 बोतलें इंडियन मेड फॉरेन लिकर की थी.. जिनकी बाजार कीमत 4 करोड़ 85 हजार 270 रुपये बताई गई है.. वाहनों की कीमत मिलाकर कुल बरामदगी 5 करोड़ 9 लाख रुपये से ज्यादा की है.. पुलिस ने दो लोगों जसराम भरवाड़ और विशाल करमकम को गिरफ्तार किया.. इनके खिलाफ पद्धर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है..
एसएमसी के पीएसआई एस. वी. गलचार की अगुवाई में यह ऑपरेशन चला.. पुलिस को सूचना मिली थी कि हरियाणा से बड़ी खेप गुजरात आ रही है.. सप्लायर को मुस्तफा उर्फ राहुल उर्फ महाकाल पठान बताया गया है.. जो हरियाणा के मेवात का रहने वाला है.. पुलिस ने 23 लोगों को वांछित घोषित किया है.. जिनमें सूचीबद्ध बूटलेगर नवज्योत उर्फ नवघन मराज, अनोपसिंह राठौड़ और देवेंद्र उर्फ देवो कपड़ी शामिल हैं.. मराज के पांच नौकर भी वांछित हैं.. जानकारी के अनुसार ये लोग खेप लेने वाले थे.. जिसको लेकर पुलिस का कहना है कि यह गुजरात के इतिहास की सबसे बड़ी छापेमारियों में से एक है..
आपको बता दें कि गुजरात में शराबबंदी का कानून 1960 से लागू है.. महात्मा गांधी की जन्मभूमि होने के कारण यहां शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है.. सिर्फ परमिट धारकों को ही अनुमति है.. लेकिन यह घटना दिखाती है कि कानून कितना कमजोर है.. कच्छ जैसे सीमावर्ती जिले में राजस्थान और महाराष्ट्र से तस्करी आसान है.. पुलिस सूत्रों के मुताबिक.. तस्कर ट्रकों में छिपाकर शराब लाते हैं.. और स्थानीय नेटवर्क के जरिए बेचते हैं.. धनेटी जैसी जगहें दूरदराज हैं.. जहां निगरानी कम है..
वहीं इस बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.. अगर शराबबंदी सख्त है, तो इतनी बड़ी मात्रा कहां से आई.. रास्ता किसने खोला.. और यह शराब किसकी छत्रछाया में बिक रही है.. कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने इन सवालों को विधानसभा में भी उठाया है.. और उन्होंने कहा कि सरकार दावे तो बड़े करती है.. लेकिन जमीन पर शराब और नशे की तस्करी बढ़ रही है.. चावड़ा ने गृह मंत्री से पूछा कि क्या शराबबंदी कानून प्रभावी रूप से लागू है.. उन्होंने कहा कि निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होती है.. लेकिन ऊपरी अधिकारियों के लिए नियम क्यों नहीं हैं..
अमित चावड़ा गुजरात कांग्रेस के प्रमुख हैं.. उन्होंने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी.. चावड़ा ने कहा कि गुजरात में पीने का पानी नहीं मिलता.. लेकिन शराब मांगो तो जितनी चाहिए उतनी मिल जाती है.. और उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और सरकार की मिलीभगत से तस्करी चल रही है.. चावड़ा ने ‘नशा मुक्त गुजरात’ अभियान चलाया है.. जिसमें वे कहते हैं कि भाजपा सरकार में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है.. उन्होंने मुंद्रा पोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि अडानी ग्रुप के पोर्ट से ड्रग्स.. और शराब की बड़ी खेपें आ रही हैं..
गुजरात विधानसभा में हाल ही में चावड़ा ने शराब.. और ड्रग्स की बरामदगी पर सवाल उठाए.. और उन्होंने अहमदाबाद और सूरत में 2025 में बरामद 10.71 करोड़ की शराब.. और 3.87 करोड़ के ड्रग्स का जिक्र किया.. चावड़ा ने पूछा कि इतनी बरामदगी के बावजूद तस्करी क्यों नहीं रुक रही.. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बताएं.. और फरार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई.. पुलिसकर्मियों की लापरवाही पर भी सवाल उठाए.. सरकार ने जवाब में कहा कि प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय हैं.. लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बताता है..
वहीं यह पहली बार नहीं है जब गुजरात में शराब तस्करी की बड़ी घटना हुई है.. जुलाई 2022 में बोताड जिले में नकली शराब से 42 लोगों की मौत हो गई थी.. तब भी कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला था.. चावड़ा ने कहा था कि पुलिस बूटलेगर्स से रिश्वत लेती है.. 2025 में मुंद्रा पोर्ट से 875 करोड़ के ड्रग्स नष्ट किए गए.. कच्छ में ही 2026 में हेलमेट के नीचे छिपाकर 10 हजार बोतलें बरामद हुईं.. जिनकी कीमत 63 लाख थी.. ये घटनाएं दिखाती हैं कि शराबबंदी के दावों और हकीकत में बड़ा फर्क है..



