मंत्री टेनी ने कहा, दो कौड़ी का आदमी है राकेश टिकैत, टिकैत बोले, लखीमपुर कांड के गवाहों को धमका रहे टेनी, कोर्ट ले संज्ञान

समर्थकों के बीच केंद्रीय गृहराज्य मंत्री ने टिकैत के खिलाफ किया अभद्र भाषा का इस्तेमाल, वीडियो वायरल

  • राकेश टिकैत का ऐलान, लखीमपुर में गुंडा राज, चलाएंगे मुक्ति अभियान
  • पिछले दिनों हुए किसानों के धरने से नाराज हैं मंत्री

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखीमपुर खीरी में किसानों के धरने के दौरान बीते वर्ष हुई हिंसा में चार किसान सहित आठ लोगों की मौत के मामले में फजीहत झेल रहे केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। वायरल वीडियो में वे किसान नेता राकेश टिकैत के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते दिखे। लखीमपुर खीरी में सयुंक्त किसान मोर्चा के तीन दिवसीय धरने के बाद अजय मिश्रा टेनी ने भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत को दो कौड़ी का आदमी बताया। इस पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मंत्री लखीमपुर कांड के गवाहों को डरा-धमका रहे हैं। इस पर कोर्ट और पुलिस को संज्ञान लेना चाहिए।
सोमवार को समर्थकों के सामने केंद्रीय मंत्री टेनी ने कहा कि राकेश टिकैत को मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं, वो दो कौड़ी का आदमी है। कई बार होता है कि कुत्ते सडक़ पर भौंका करते हैं, कई बार गाड़ी के पीछे दौड़ा करते हैं। यह उनका स्वभाव होता है तो इसके लिए मैं कुछ नहीं कहूंगा। जिसका जो स्वभाव होता है उसके अनुरूप वह व्यवहार करता है लेकिन हमारे लोगों का ऐसा स्वभाव नहीं है। राकेश टिकैत की इसी से राजनीति चलती है, इसी से उनकी रोजी रोटी चलती है तो वह चलाएं। समय पर उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आप सबकी ताकत की वजह से मैं आप लोगों को निराश नहीं होने दूंगा। राकेश टिकैत दो बार चुनाव लड़ा और हार गया तो ऐसा व्यक्ति जब किसी का विरोध करता है तो उसका कोई मतलब नहीं होता और ऐसे व्यक्ति को जवाब देना भी मैं उचित नहीं समझता। मैंने अपने जीवन में कोई गलत काम नहीं किया, जिससे दुनिया की कोई ताकत आपको निराश नहीं कर सकती। गृहराज्य मंत्री टेनी के इस बयान पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम छोटे आदमी है। उसका लडक़ा एक साल से जेल में बंद है, गुस्सा तो आएगा ही। हम जो भी काम करते हैं वह जमीन पर करते हैं। एक मुक्ति अभियान चलाएंगे। लखीमपुर में गुंडा राज है। वहां मुक्ति अभियान चलाएंगे। इस बार तीन दिन रहे, अगली बार तेरह दिन रहेंगे। विवादित बयान देने के कारण ही लखीमपुर की घटना घटी थी। वे 120 बी के मुल्जिम है। यदि ऐसा मुल्जिम खुलेआम घूमेगा तो दहशत रहेगी और लखीमपुर कांड की जांच को भी प्रभावित करेगी। कोर्ट और पुलिस को इसका संज्ञान लेना चाहिए। इनको जिला या राज्य से बाहर रहने का आदेश देना चाहिए। वे लखीमपुर कांड के गवाहों को डरा-धमका रहे हैं। इससे जांच प्रभावित होगी।

मीडिया पर भी साधा निशाना

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री टेनी ने कहा कि मैं सच के लिए लड़ रहा हूं। सत्य कभी हारता नहीं है। कई पत्रकार भी अपने यहां के हैं, बेवकूफ टाइप के पत्रकार हैं जो अपने को पत्रकार कहते हैं और उल्टी सीधी बातें करते हैं, अपने को पत्रकार कहते हैं, पत्रकारिता से उनका कोई लेना-देना नहीं होता। ऐसे लोग भ्रम फैलाते हैं।

क्या था लखीमपुर का मामला

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले साल तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। चार किसानों को कुचलकर मारने का आरोप गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा पर लगा है। इस मामले में आशीष फिलहाल जेल में हैं।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बेनामी संपत्ति मामले में तीन साल की सजा रद्द

  • धारा 3 (2) को बताया असंवैधानिक, पिछली तारीख से नहीं लागू होगा संपत्ति जब्त करने का अधिकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज बेनामी लेन-देन अधिनियम को लेकर बड़ा फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेनामी संपत्ति लेन-देन (निषेध) अधिनियम 1988 की धारा 3 (2) असंवैधानिक है। यह धारा मनमानी है। इसके साथ ही बेनामी संपत्ति के लिए तीन साल की सजा का कानून रद्द हो गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संपत्ति जब्त करने का अधिकार पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। पुराने मामलों में 2016 के कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी। बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम की धारा 3 (2) में कहा गया है कि जो कोई भी बेनामी लेनदेन में शामिल है, उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की एक पीठ ने यह फैसला सुनाया। कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने एक याचिका दाखिल की थी। पीठ ने कहा है कि 1988 के एक्ट के अनुसार ही 2016 में लाए गए अधिनियम के सेक्शन 3(2) को भी असंवैधानिक करार दिया गया है, क्योंकि यह संविधान के आर्टिकल 20(1) का उल्लंघन करता है।

 

रेवड़ी कल्चर पर बोला सुप्रीम कोर्ट क्या आता है मुफ्तखोरी के दायरे में, इस पर बहस जरूरी

गरीबों के लिए मुफ्त की स्कीमें अहम कल भी होगी सुनवाई

नई दिल्ली। राजनीतिक दलों की ओर से मुफ्त सुविधाएं देने के वादे पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि गरीबी के दलदल में फंसे इंसान के लिए मुफ्त सुविधाएं और चीजें देने वाली स्कीमें महत्वपूर्ण हैं। सवाल यह है कि इस बात का फैसला कौन लेगा कि क्या चीज मुफ्तखोरी के दायरे में आती है और किसे जनकल्याण माना जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम चुनाव आयोग को इस मामले में अतिरिक्त शक्ति नहीं दे सकते। कल भी इस मामले पर सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि मुफ्त उपहार एक अहम मुद्दा है और इस पर बहस किए जाने की जरूरत है। सीजेआई एनवी रमन ने कहा, मान लीजिए कि अगर केंद्र सरकार ऐसा कानून बनाती है जिसके तहत राज्यों को मुफ्त उपहार देने पर रोक लगा दी जाती है, तो क्या हम यह कह सकते हैं कि ऐसा कानून न्यायिक जांच के लिए नहीं आएगा। ऐसे में हम देश के कल्याण के लिए इस मामले को सुन रहे हैं। एससी में इस मामले को लेकर दायर अश्विनी उपाध्याय की अर्जी पर सुनवाई हुई, जिसमें चुनाव में मुफ्त सुविधाओं का वायदा करने वाली राजनीतिक पार्टियो की मान्यता रदद् करने की मांग की गई है।

बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई का मामला पहुंचा शीर्ष अदालत

नई दिल्ली। बिलकिस बानो के दोषियों की जेल से रिहाई का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करने की बात कही है। चीफ जस्टिस एनवी रमन ने कहा, हम इस मामले की लिस्टिंग को लेकर विचार करेंगे। इस बीच बिलकिस बानो केस की जांच करने वाले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी विवेक दुबे ने कहा कि 14 साल के बाद 11 दोषियों की रिहाई ने दिखाया है कि उनमें सुधार आ गया था। इसके साथ ही उन्होंने दोषियों की रिहाई का विरोध करने वालों पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना संविधान की भावना के खिलाफ है। विवेक दुबे सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर थे, जिसने बिलकिस बानो गैंगरेप केस की जांच की थी। इस केस की जांच का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। उनकी टीम ने ही इस मामले की जांच की थी और उसके आधार पर ही 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

अब पांच जजों की संविधान पीठ करेगी शिवसेना पर फैसला

नई दिल्ली। शिवसेना पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर से सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शिंदे गुट और उद्धव खेमा की तरफ से दलीलें दी गईं। दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे द्वारा असली शिवसेना पार्टी के रूप में मान्यता देने और उसे धनुष और तीर का चुनाव चिन्ह आवंटित करने के लिए दायर आवेदन पर गुरुवार तक कोई कार्रवाई न करे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पांच जजों की संविधान पीठ को सौंप दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब संविधान पीठ तय करेगी कि क्या स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लंबित हो तो वह अयोग्यता पर सुनवाई कर सकते हैं। पार्टियों के आंतरिक लोकतंत्र और उसमें चुनाव आयोग की भूमिका पर भी संविधान पीठ को विचार करे।

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