आरक्षण हटाओ-देश बचाओ’ के नारों से गूंजा मिर्जापुर, पैदल मार्च के बाद सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘आरक्षण हटाओ, देश बचाओ और प्रतिभा का सम्मान करो’ जैसे नारे लगाए। संगठन के पदाधिकारियों ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर सभी नागरिकों को समान अवसर देने की मांग उठाई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में क्रांति दिवस के अवसर पर आरक्षण व्यवस्था के विरोध में पैदल जुलूस निकाला गया।

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की अगुवाई में सर्व समाज के लोगों ने आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर घंटाघर से कचहरी तक पैदल मार्च किया। जुलूस के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट मिर्जापुर को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘आरक्षण हटाओ, देश बचाओ और प्रतिभा का सम्मान करो’ जैसे नारे लगाए। संगठन के पदाधिकारियों ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर सभी नागरिकों को समान अवसर देने की मांग उठाई।

घंटाघर से शुरू हुआ पैदल जुलूस

क्रांति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मिर्जापुर के घंटाघर से हुई। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की अगुवाई में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और आरक्षण के विरोध में पैदल जुलूस निकाला। जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए कचहरी पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। संगठन की ओर से कहा गया कि देश में सभी नागरिकों को समान अवसर और समान अधिकार मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा

कचहरी पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट, मिर्जापुर को सौंपा। ज्ञापन में जातिगत आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने और देश में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि भारत विभिन्न धर्मों, जातियों, वर्गों और भाषाओं वाला देश है, लेकिन देश की नागरिकता सभी की समान है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समान नागरिकता के आधार पर शिक्षा, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में अवसर भी समान होने चाहिए।

‘आरक्षण से प्रतिभा प्रभावित हो रही है’—प्रदर्शनकारियों का दावा

संगठन की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण योग्यता और प्रतिभा को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई छात्र और युवा बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद अवसरों से वंचित रह जाते हैं, जबकि आरक्षण व्यवस्था के कारण अपेक्षाकृत कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी कुछ परिस्थितियों में प्रवेश या नियुक्ति का अवसर मिल जाता है। संगठन ने इस व्यवस्था को युवाओं में असंतोष और सामाजिक तनाव का कारण बताते हुए आरक्षण नीति में बदलाव की मांग की।

शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर की मांग

ज्ञापन में शिक्षा, सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था का भी विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश के सभी नागरिकों को समान शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली छात्रों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाने से उनमें निराशा पैदा होती है। ऐसे युवाओं के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। हालांकि, आरक्षण व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए इन तर्कों से इतर आरक्षण के पक्ष में सामाजिक और संवैधानिक स्तर पर अलग-अलग तर्क मौजूद हैं। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव या उसे समाप्त करने का विषय व्यापक संवैधानिक और नीतिगत बहस का विषय है।

‘जातीय भेदभाव और हिंसा खत्म हो’

प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से जातीय भेदभाव और जाति के आधार पर होने वाले संघर्ष को समाप्त करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि देश में सभी नागरिकों की पहचान एक भारतीय के रूप में होनी चाहिए और जाति के आधार पर भेदभाव की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से कहा गया कि देश में समान नागरिकता के साथ शिक्षा और रोजगार में समान अवसर को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

सर्व समाज की भागीदारी का दावा

आयोजकों ने कार्यक्रम को सर्व समाज की भागीदारी वाला आंदोलन बताया। संगठन के अनुसार, मिर्जापुर जिले के अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग आरक्षण के विरोध में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर की नीति लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन में लगाए गए सरकार विरोधी नारे

जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने ‘मोदी सरकार हाय-हाय’ और ‘मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए। ये नारे प्रदर्शनकारियों के राजनीतिक विरोध और नाराजगी को दर्शाते हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने केंद्र सरकार से आरक्षण नीति को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

कई लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में पंडित साधु तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री भारतीय समाज संघ, जन सामान्य मंच से अरविंद तिवारी, करणी सेना जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार, अभिषेक सिंह धवल, शिवम सिंह, इंस्पेक्टर पंचम सिंह, रोहित सिंह, शाश्वत सिंह, डॉ. अवनीश सिंह, युवराज सिंह, धर्मजीत सिंह, पवन तिवारी, आशीष सिंह, मंगल सिंह, राहुल, प्रीतम सिंह, यज्ञ नारायण पांडे, संतोष सिंह, अनिल मिश्रा, विनोद शर्मा, पुष्कर सिंह, नवल सिंह, रिंकू शुक्ला और शशांक सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया।

आरक्षण नीति में बदलाव की मांग

मिर्जापुर में आयोजित इस प्रदर्शन के जरिए श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था के विरोध में अपनी मांग को सामने रखा। संगठन ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से जातिगत आरक्षण समाप्त करने और शिक्षा, रोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में प्रतिभा और योग्यता को प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें सभी नागरिकों को समान अवसर मिल सकें।

ज्ञापन के बाद प्रशासन की भूमिका पर नजर

फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने अपना ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंप दिया है। अब देखना होगा कि आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर उठाई गई इन मांगों पर केंद्र सरकार और संबंधित स्तर पर क्या रुख सामने आता है। आरक्षण भारत में लंबे समय से सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व से जुड़ा संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में मिर्जापुर में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर आरक्षण नीति को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस को स्थानीय स्तर पर सामने ला दिया है।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरि,मिर्जापुर

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