मीरजापुर: बरसात सिर पर, लेकिन रुका पड़ा कटानरोधी प्रोजेक्ट! ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
मीरजापुर के बीजर कला गांव में निर्माणाधीन कटानरोधी परियोजना की धीमी प्रगति और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने कार्य में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए तकनीकी जांच और बरसात से पहले काम पूरा कराने की मांग की है।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: बरसात का मौसम नजदीक आते ही गंगा और अन्य नदियों के किनारे बसे गांवों में कटान की चिंता बढ़ने लगती है। ऐसे समय में यदि कटानरोधी परियोजना का काम अधूरा रह जाए तो ग्रामीणों की चिंता और बढ़ना स्वाभाविक है। मीरजापुर के जिगना क्षेत्र स्थित बीजर कला गांव में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां निर्माणाधीन कटानरोधी परियोजना के कार्य की धीमी प्रगति और कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।
शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकत्र होकर कार्यदायी संस्था के खिलाफ नारेबाजी की और परियोजना में गुणवत्ता मानकों की जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित गति से नहीं हो रहा है और कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
डेढ़ माह बाद भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका कार्य
ग्रामीणों के अनुसार, बीते 12 अप्रैल को नगर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्रा द्वारा नारायण घाट से मांझी बस्ती तक प्रस्तावित कटानरोधी परियोजना का शिलान्यास किया गया था। उस समय अधिकारियों और अभियंताओं ने दावा किया था कि बरसात शुरू होने से पहले परियोजना का अधिकांश हिस्सा पूरा कर लिया जाएगा और गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि शिलान्यास के लगभग डेढ़ महीने बाद भी कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य रुका हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्टोन पिचिंग के कार्य में उपयोग किए जा रहे बोल्डरों की गुणवत्ता और आकार को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि मौके पर मजदूरों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है और कई मशीनें निष्क्रिय अवस्था में खड़ी हैं, जिससे कार्य की गति प्रभावित हो रही है।
पहले भी अधिकारियों ने दिए थे निर्देश
जानकारी के अनुसार, 13 मई को अधीक्षण अभियंता विजय कुमार ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्य की रफ्तार में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। इसी वजह से अब ग्रामीणों ने खुलकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
विभाग ने क्या कहा?
मामले को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित है। विभागीय अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि वर्तमान में कार्य की गति प्रभावित हुई है। अधिकारियों के अनुसार, कार्य रुकने के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है और स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन और विभाग से कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से बरसात से पहले परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा कराना, निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच कराना और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि कटानरोधी परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि नदी किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। फिलहाल ग्रामीणों की मांगों और विभागीय दावों के बीच यह परियोजना चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता संबंधी सवालों का समाधान किस प्रकार करता है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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