मोदी ने की CJI वाली गलती, ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ का हुआ उदय
‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है... इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और CJI से...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में दिमागी नक्सल शब्द के इस्तेमाल के बाद.. सोशल मीडिया पर एक नया राजनीतिक और व्यंग्यात्मक अभियान चर्चा में आ गया है.. इंस्टाग्राम और एक्स पर दिमागी नक्सल जनता पार्टी नाम से अकाउंट सामने आया है.. खास बात यह है कि इंस्टाग्राम पर बने इस अकाउंट के फॉलोअर्स की संख्या महज एक दिन में दो लाख से अधिक पहुंचने का दावा किया गया है.. दिमागी नक्सल जनता पार्टी का नाम सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी तुलना कुछ समय पहले शुरू हुए.. कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से की जाने लगी.. कॉकरोच जनता पार्टी का गठन भी सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के तौर पर हुआ था.. यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद चर्चा में आया था..
वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसी तर्ज पर दिमागी नक्सल जनता पार्टी नाम से नया अभियान शुरू हुआ है.. यह अभियान तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है.. और राजनीतिक बहस के साथ-साथ सोशल मीडिया पर व्यंग्य का विषय भी बन गया है.. इंस्टाग्राम पर इस अकाउंट के बायो में संस्थापक के तौर पर एक दिमागी भारतीय और सह-संस्थापक के तौर पर 56 इंच का नाम लिखा गया है.. हालांकि, अभी तक इस अकाउंट को कौन चला रहा है.. इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.. यानी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे कोई व्यक्ति है.. कोई समूह है या फिर यह सिर्फ सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा एक व्यंग्यात्मक अभियान है..
इंस्टाग्राम के अलावा एक्स पर भी दिमागी नक्सल जनता पार्टी नाम से अकाउंट बनाया गया है.. इस अकाउंट पर भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं.. पार्टी के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका नारा लिखा गया है.. कि सोचो, शोध करो और प्रतिरोध करो.. यानी इस अभियान के जरिए खुद को सवाल पूछने, विचार करने, जानकारी जुटाने.. और विरोध की आवाज उठाने वाले मंच के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है.. हालांकि, इस अकाउंट की वास्तविक पहचान.. और इसके पीछे मौजूद लोगों के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है..
इस बीच दिमागी नक्सल जनता पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट ने एक और दावा किया है.. अकाउंट की ओर से कहा गया कि सोमवार को उसके इंस्टाग्राम पेज पर साइबर हमला किया गया.. एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया कि इंस्टाग्राम पर @DNJP_India के खिलाफ साइबर अटैक शुरू हो गया है.. और सवाल उठाया गया कि क्या उनकी आवाज को दबाने में कोई सफल होगा.. हालांकि, साइबर हमले से जुड़े इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.. इसलिए इसे फिलहाल अकाउंट की ओर से किया गया दावा ही माना जा रहा है..
दिमागी नक्सल जनता पार्टी की कई पोस्ट में शहीद भगत सिंह की विचारधारा का भी उल्लेख किया गया है.. अकाउंट की एक पोस्ट में दावा किया गया कि वे भगत सिंह के अनुयायी हैं.. पोस्ट में यह भी कहा गया कि अगर उनका अकाउंट बंद किया जाता है.. या उन्हें देशविरोधी बताया जाता है.. तो यह भगत सिंह का अपमान होगा.. इस तरह सोशल मीडिया पर चल रहे इस अभियान ने खुद को भगत सिंह की विचारधारा, सवाल पूछने.. और प्रतिरोध की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की है.. हालांकि, इन दावों को भी अकाउंट की ओर से की गई राजनीतिक और वैचारिक अभिव्यक्ति के रूप में ही देखा जाना चाहिए..
दिलचस्प बात यह है कि इंस्टाग्राम पर दिमागी नक्सल जनता पार्टी का अकाउंट कई चर्चित लोगों को फॉलो करता है.. इनमें कुणाल कामरा, ध्रुव राठी, प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, सोनाक्षी सिन्हा, श्याम रंगीला, सोनम वांगचुक.. और रविश कुमार जैसे नाम शामिल हैं.. इसके अलावा यह अकाउंट कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी को भी फॉलो करता है.. सीजेपी ने हाल ही में स्कूल ठीक करो नाम से एक अभियान शुरू किया है.. इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल ऑडिट की अपील की गई थी..
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोग दिमागी नक्सल जनता पार्टी को कॉकरोच जनता पार्टी के बाद सामने आया एक नया व्यंग्यात्मक राजनीतिक प्रयोग मान रहे हैं.. दोनों के नाम और उनके सामने आने की परिस्थितियों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है.. वहीं अब सवाल यह है कि आखिर दिमागी नक्सल शब्द को लेकर इतना विवाद क्यों हुआ.. दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर बात की थी.. प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने हथियारबंद नक्सलवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है.. लेकिन दिमागी नक्सल अब भी सक्रिय हैं..
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया.. और कई दशकों तक नक्सल हिंसा ने देश के बड़े हिस्से को बंदूक के दम पर बंधक बनाए रखा.. प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई.. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने एक्स पर लिखा कि उन्हें गर्व है कि वे दिमागी नक्सल हैं.. उन्होंने इस शब्द को पहले इस्तेमाल किए गए‘अर्बन नक्सल, आंदोलनजीवी और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे राजनीतिक शब्दों की नई कड़ी के तौर पर पेश किया..



