ट्रंप के सीजफायर को नहीं मान रहे नेतन्याहू, फिर शुरू हुआ युद्ध

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के सीज़फायर को ठेंगे पर रख दिया है। नेतन्याहू ने बयान जारी कर साफ कहा है कि लेबनान पर बमबारी रुकी नहीं है और बेगुनाह लोगों का कत्लेआम बदस्तूर जारी है।

4pm न्यूज नेटवर्क: दुनिया अभी 24 घंटे पहले हुए उस सीज़फायर (Ceasefire) का जश्न मना ही रही थी कि अचानक खबर आई है कि खेल बिगड़ चुका है! वो समझौता, जिसे डोनाल्ड ट्रंप अपनी ‘महानता’ बता रहे थे, वो दरअसल कागज़ का एक रद्दी टुकड़ा साबित हुआ है।

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के सीज़फायर को ठेंगे पर रख दिया है। नेतन्याहू ने बयान जारी कर साफ कहा है कि लेबनान पर बमबारी रुकी नहीं है और बेगुनाह लोगों का कत्लेआम बदस्तूर जारी है। और जवाब में ईरान ने फिर से ‘होर्मुज की गर्दन’ मरोड़ दी है; होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है। लेकिन सबसे शर्मनाक बात जानते हैं क्या है? व्हाइट हाउस अब अपनी बात से पूरी तरह पलट गया है! जिस 10 सूत्रीय एजेंडे की बात ट्रंप ने खुद की थी, अब व्हाइट हाउस उसे ‘बकवास’ बता रहा है।

कल तक जो ट्रंप दहाड़ रहे थे कि उन्होंने पाकिस्तान और अपने जनरलों के कहने पर जंग रोक दी है, आज उनकी औकात दुनिया के सामने आ गई है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि वे ट्रंप के किसी भी ‘शांति-वांति’ वाले ड्रामे को रत्ती भर भी नहीं मानते। सीज़फायर का ऐलान होने के चंद घंटों बाद ही इज़रायली फाइटर जेट्स ने लेबनान पर फिर से बारूद बरसाना शुरू कर दिया। नेतन्याहू के बयानों के अनुसार, लेबनान इस संघर्ष-विराम समझौते का हिस्सा नहीं है; जबकि ईरान ने इस बयान पर कड़ी असहमति जताई है। तेहरान ने संघर्ष-विराम के तहत हमलों को पूरी तरह से रोकने की मांग की है, जिसमें इज़रायल द्वारा हिजबुल्लाह और ईरान-समर्थित अन्य मिलिशिया को निशाना बनाना भी शामिल है।

नेतन्याहू ने तो यहाँ तक कह दिया है कि वे ईरान पर भी हमला कर सकते हैं, बल्कि वे इसके लिए ट्रंप के प्रपोजल को भी ठुकराने का दम रखते हैं। नेतन्याहू की इस ज़िद ने साबित कर दिया है कि इज़रायल अब पूरी तरह बेकाबू हो चुका है। वे न सिर्फ ईरान को तबाह करना चाहते हैं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की शांति को आग के हवाले करना चाहते हैं। नेतन्याहू को लग रहा है कि वे ट्रंप के कंधों पर बंदूक रखकर अपना खूनी एजेंडा पूरा कर लेंगे, लेकिन उन्होंने शायद ईरान के जज़्बे और तेवर को कम आंका है। और इसका नतीजा ये हुआ है कि एक बार फिर ‘होर्मुज’ पर संकट के काले बादल मंडराने शुरू हो गए हैं।

जैसे ही इज़रायल ने लेबनान पर हमले तेज़ किए और सीज़फायर की धज्जियां उड़ाईं, ईरान ने भी अपनी ताकत का मुज़ाहिरा कर दिया। तेहरान से सीधा आदेश गया और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से सील कर दिया। ईरान का रुख अब बिल्कुल साफ है कि अगर इज़रायल हमले नहीं रोकेगा और अमेरिका अपना वादा पूरा नहीं करेगा, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था की रग भी ईरान के हाथ में है। होर्मुज बंद होने का सीधा मतलब है पूरी दुनिया में तेल की हाहाकार! ईरान ने दुनिया को जता दिया है कि वह न तो ट्रंप की गीदड़-भभकियों से डरता है और न ही नेतन्याहू की ज़िद से। अगर अमन होगा तो सबकी शर्तों पर, वरना तबाही का मंज़र सबके लिए बराबर होगा।

एक ओर जहाँ नेतन्याहू ने ट्रंप की शर्तों को मानने से इंकार कर दिया है, तो वहीं दूसरी ओर लेबनान में इज़रायल की तरफ से भयंकर हमले शुरू कर दिए गए हैं। खबर है कि कल से लेकर आज तक 300 लोग इज़रायली मिसाइलों का निशाना बने हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि वे देश के सभी राजनीतिक और कूटनीतिक संसाधनों को जुटाकर इज़रायली हमलों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री रकान नासेरद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय मदद की पुरज़ोर अपील की है। बड़ी संख्या में घायलों के इलाज की वजह से वहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। इस बीच सीज़फायर को लेकर विवाद और गहरा गया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने साफ कहा कि लेबनान इस समझौते में शामिल ही नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने तो यहाँ तक कह दिया कि, “हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया था।”

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो-टूक कहा है कि अमेरिका को अब तय करना होगा कि वह सीज़फायर लागू करता है या इज़रायल के ज़रिए जंग जारी रखता है, क्योंकि ये दोनों चीज़ें एक साथ नहीं चल सकतीं। हालांकि, इस बीच व्हाइट हाउस ने भी एक नया खेल शुरू कर दिया है। कल तक डोनाल्ड ट्रंप खुद ट्वीट कर रहे थे कि उन्हें ईरान की 10 शर्तें मिल गई हैं और वे शांति चाहते हैं। लेकिन आज व्हाइट हाउस का सरकारी बयान आता है कि ईरान का 10 सूत्रीय एजेंडा पूरी तरह ‘बकवास’ है। व्हाइट हाउस ने यहाँ तक कह दिया कि “हमें तो ऐसा कोई एजेंडा कभी मिला ही नहीं!”

दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क का राष्ट्रपति कितना बड़ा झूठा हो सकता है? एक दिन पहले आप खुद शर्तों की तस्दीक (पुष्टि) करते हैं और अगले ही दिन कहते हैं कि एजेंडा मिला ही नहीं! दरअसल, ट्रंप प्रशासन इस वक्त पूरी तरह बौखलाया हुआ है। एक तरफ नेतन्याहू उन्हें सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं और दूसरी तरफ ईरान झुकने को कतई तैयार नहीं है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए अब ट्रंप प्रशासन सफेद झूठ का सहारा ले रहा है। इस पूरी अफरा-तफरी के बीच ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप और नेतन्याहू को आईना दिखाया है।

ऑस्ट्रेलिया ने साफ लफ्ज़ों में कहा है कि अमेरिका-ईरान का यह सीज़फायर सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे लेबनान पर भी हर हाल में लागू करना होगा। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि आप एक तरफ शांति का ढोंग करेंगे और दूसरी तरफ लेबनान में इज़रायल को खून बहाने की खुली छूट देंगे, यह मुमकिन नहीं है। पूरी दुनिया अब समझ चुकी है कि ट्रंप का सीज़फायर सिर्फ एक ‘डिप्लोमैटिक स्टंट’ था ताकि वे अपनी गिरती हुई साख को बचा सकें। लेकिन नेतन्याहू ने इस स्टंट की हवा निकाल दी है।

हकीकत ये है कि ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर दुनिया के साथ एक बहुत गंदा खेल खेल रहे हैं। ट्रंप दुनिया के सामने ‘शांतिदूत’ (Peace-maker) बनना चाहते हैं और नेतन्याहू पर्दे के पीछे से जंग को जारी रखना चाहते हैं। ये ‘गुड कॉप, बैड कॉप’ वाली पुरानी रणनीति अब एक्सपोज़ हो चुकी है। जिस 10 सूत्रीय एजेंडे को व्हाइट हाउस आज ‘बकवास’ बता रहा है, उसी में ईरान ने साफ कहा था कि होर्मुज से निकलने वाले हर जहाज़ से टैक्स वसूला जाएगा। शायद यही वो बात है जो अमेरिका और इज़रायल को हज़म नहीं हो रही है। उन्हें लग रहा था कि ईरान डर जाएगा, लेकिन ईरान के 1.4 करोड़ फिदाइयों ने उनकी नींदें हराम कर दी हैं।

ऐसे में एक बार फिर से सीज़फायर के महज़ 24 घंटे बाद ही हालात अब पूरी तरह बेकाबू होते दिख रहे हैं। ऐसा लगता है कि सीज़फायर का गुब्बारा किसी भी वक्त फूटने वाला है। नेतन्याहू की ज़िद, ट्रंप का झूठ और व्हाइट हाउस की ‘पलटी’—इन सबने मिलकर जंग के शोले फिर से दहका दिए हैं। अब सवाल ये है कि क्या शुक्रवार को पाकिस्तान में होने वाली वार्ता का अब कोई मतलब रह गया है? जब नेतन्याहू हमले नहीं रोक रहे, तो क्या ईरान खामोश बैठा रहेगा?

साफ है कि ट्रंप अपनी ही बिछाई बिसात में खुद उलझ गए हैं। उनकी साख दांव पर है और उनकी कुर्सी भी खतरे में दिखाई दे रही है। क्या आपको लगता है कि ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर पूरी दुनिया को बेवकूफ बना रहे हैं? क्या यह सीज़फायर कभी हकीकत में कामयाब हो पाएगा?

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