महाराष्ट्र में निकाय चुनाव में दिख रहे नए-नए दांव

भाजपा को झटका, चार एनसीपी पार्षदों ने शिवसेना का किया समर्थन

निकाय चुनाव के लिए चाचा-भतीजा एकसाथ
अजित पवार के साथ मंच पर दिखीं सुप्रिया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले कई सियासी रंग देखने को मिल रहे हैं। ऐसे-ऐसे दल एक साथ आ रहें हैं जिनमे मतभिन्नता और विचार भी अलग-अलग हैं। जहां ठाकरे ब्रदर्स एक साथ आए वहीं अब चाचा भतीजा भी एक साथ दिख रहे हैं। इन सबकेबीच सत्ता में बैठी ्र्रभाजपा को झटके पर झटके लग रहे हैं। एसीपी और एनसीपी (शरद पवार) ने पुणे नगर निगम चुनाव 2026 के लिए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया।
उप मुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने इस मौके पर मंच साझा किया। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 15 जनवरी को 29 नगर निगमों, जिनमें पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ शामिल हैं, के लिए चुनाव होने हैं। राज्य चुनाव आयोग ने 15 जनवरी को इन क्षेत्रों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है ताकि अधिक से अधिक लोग वोट डालें। आयोग ने 70त्न से ज्यादा मतदान सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में भाजपा अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि एनसीपी पिंपरी-चिंचवाड़ के 32-वार्ड निगम में वापसी की तैयारी कर रही है। इस निगम में लगभग 17.13 लाख मतदाता होंगे, जो 128 पार्षदों का चुनाव करेंगे।

एनसीपी व एनसीपी एसपी ने संयुक्त घोषणापत्र जारी किया

एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) ने शनिवार को पुणे नगर निगम चुनाव में एक साथ चुनाव लडऩे के फैसले के बाद अपना संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने एक ही मंच साझा किया। शरद पवार और अजीत पवार की पार्टी पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में निकाय चुनाव एकसाथ लड़ रही है।

अजित ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर भी निशाना साधा

अजित पवार ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र से पर्याप्त फंड मिलने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ का विकास रोक दिया गया। पिछले नगर निगम चुनावों में 2017 से 2022 तक दोनों निगमों में भाजपा की सरकार थी। इस बार एनसीपी का गठबंधन उनके विकास एजेंडे के साथ जनता के सामने चुनावी विकल्प पेश कर रहा है।

अजित पवार और सुप्रिया सुले की अहम बातें

अजित पवार ने कहा हमारा मकसद पुणे के नागरिकों के लिए विकास और स्थिरता सुनिश्चित करना है। इस संयुक्त घोषणापत्र के माध्यम से हम शहर की जनता के सामने अपनी स्पष्ट नीति पेश कर रहे हैं। वहीं सुप्रिया सुले ने भी कहा कि पार्टी सभी वर्गों और समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति बनाएगी। हर घर को नल से प्रतिदिन साफ पानी की सुविधा।यातायात और सडक़ें सुरक्षित, गड्ढों से मुक्त पुणे।नियमित सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करना।शहर में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना।प्रदूषण मुक्त और हरित पुणे का निर्माण। झुग्गी-झोपडिय़ों का पुनर्वास और पुरानी इमारतों का नवीनीकरण। बस और मेट्रो में मुफ्त यात्रा। 500 वर्ग फीट तक के घरों पर संपत्ति कर माफीपुणेवासियों के प्रति जिम्मेदार और पारदर्शी प्रशासन। हर बच्चे के लिए पुणे मॉडल स्कूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।

शिवसेना को एनसीपी का साथ

शिवसेना के 27 पार्षद हैं, उसके बाद भाजपा के 14 पार्षद हैं। कांग्रेस और एनसीपी के क्रमश: 12 और 4 पार्षद हैं। अब, शिवसेना के 27 पार्षदों को चार एनसीपी पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन प्राप्त है। कुल मिलाकर, शिवसेना को 32 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है क्योंकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के चार पार्षदों ने अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का समर्थन करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम उन खबरों के बाद सामने आया है जिनमें कहा गया था कि भगवा पार्टी ने अंबरनाथ में शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है, जिसे बाद में दोनों पक्षों ने खारिज कर दिया था। अंबरनाथ नगर परिषद में 60 पार्षद हैं। शिवसेना के 27 पार्षद हैं, उसके बाद भाजपा के 14 पार्षद हैं। कांग्रेस और एनसीपी के क्रमश: 12 और 4 पार्षद हैं। अब, शिवसेना के 27 पार्षदों को चार एनसीपी पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन प्राप्त है। कुल मिलाकर, शिवसेना को 32 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है।

कर्नाटक में फिर सीएम बदलने पर रार

कांगे्रस बोली- भाजपा की तरह सत्ता के लिए कोई संघर्ष नहीं है
किसी भी बदलाव का फैसला हाई कमांड करेगी : केएन राजन्ना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बेंगलुरू । कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.एन. राजन्ना ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार या पार्टी के भीतर किसी भी संभावित बदलाव का निर्णय पूरी तरह से कांग्रेस हाई कमांड द्वारा लिया जाएगा।
बेंगलुरु में एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, अगर कर्नाटक में सरकार और पार्टी में किसी भी तरह के बदलाव की उम्मीद है, तो पार्टी हाई कमांड ही इसका फैसला करेगी। मैं कैबिनेट में रहूं या न रहूं, मैं हमेशा पार्टी कार्यकर्ता रहूंगा। भाजपा की तरह कांग्रेस में सत्ता के लिए कोई संघर्ष नहीं है। कर्नाटक सरकार में संभावित फेरबदल को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच उनकी ये टिप्पणी आई है, जिसमें कांग्रेस नेता पार्टी के भीतर एकता और अनुशासन पर जोर दे रहे हैं। इससे पहले, कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को कहा था कि राज्य के मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भी फैसला पूरी तरह से कांग्रेस हाई कमांड के हाथ में है, जबकि अटकलें और पार्टी के आंतरिक समीकरण संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बहस को हवा दे रहे हैं। बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो कोई समूह बनाया है और न ही अपने समर्थकों को कोई निर्देश जारी किए हैं जो उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, मेरी कोई टीम नहीं है। कुछ लोग, दोस्त या शुभचिंतक, अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। यहां तक कि जब मैं जिलों का दौरा करता हूं, तब भी कुछ लोग ऐसी बातें कहते हैं। यह उनका स्वार्थ है, लेकिन अंतत: उच्च कमान ही फैसला करेगी। गृह मंत्री की ये टिप्पणियां कर्नाटक कांग्रेस के भीतर कथित तौर पर चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच आई हैं, जिसमें सरकार के आधे कार्यकाल तक पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री पद एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री जी परमेश्वर को इस राजनीतिक उथल-पुथल में प्रमुख व्यक्ति माना जा रहा है।
इससे पहले, कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल को लेकर चल रही चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी का उच्च कमान राज्य के नेतृत्व का भविष्य तय कर सकता है।

केसी त्यागी की जदयू से छुट्टी, नीतीश को भारत रत्न देने की मांग पड़ी भारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी से जदयू ने किनारा कर लिया है। त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कहा था कि नीतीश कुमार समाजवादी आन्दोलन के अनमोल रत्न हैं। इससे पहले भी कई जीवित राजनेताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है।
त्यागी ने समाजवादी पृष्ठभूमि के संदर्भ स्व. चौधरी चरण सिंह एवं स्व. कर्पूरी ठाकुर की चर्चा की थी, जिन्हें नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत रत्न दिया गया। इससे पहले भी कई नेताओं ने नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। लेकिन, उन पर कभी जदयू की प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि, राजीव रंजन ने त्यागी की ओर से भारत रत्न देने की मांग का जिक्र नहीं किया है। लेकिन, इसके समय को देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत रत्न की मांग को पसंद नहीं किया है। त्यागी का बयान शुक्रवार को आया। जदयू की प्रतिक्रिया शनिवार की सुबह आ गई। जदयू में केसी त्यागी की भूमिका लगातार सिमट रही है। कभी वे दल के राष्ट्रीय प्रधान हासचिव और प्रवक्ता हुआ करते थे। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की टीम में उन्हें महासचिव और प्रवक्ता के पद से मुक्त कर दिया गया।

शॉर्ट सर्किट से लगी कूड़े में आग 1090 चौराहे पर उठा धुएँ का गुबार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ के व्यस्ततम इलाकों में शामिल 1090 चौराहे पर शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुल के नीचे पड़े कूड़े में शॉर्ट सर्किट के चलते भीषण आग लग गई। आग लगते ही मौके से काले धुएँ का घना गुबार उठने लगा, जो कुछ ही देर में आसपास के इलाके में फैल गया। धुएँ के कारण चौराहे से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुल के नीचे लंबे समय से कूड़ा जमा था और उसी के पास बिजली के तार भी गुजर रहे थे। अचानक हुए शॉर्ट सर्किट से तारों में चिंगारी निकली और कूड़े ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआँ कई सौ मीटर दूर तक दिखाई देने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड की टीम जब मौके पर पहुँची तो उन्हें हालात बेहद जोखिम भरे नजर आए।

विरासत को बर्बाद करने के लिए परायों की जरूरत नहीं: रोहिणी

लालू प्रसाद की बेटी ने बिना नाम लिए भाई तेजस्वी यादव पर किया प्रहार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए अपने भाई तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बड़ी विरासत को मिटाने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने ही काफी होते हैं। पोस्ट में उन्होंने संकेत दिया कि अहंकार और बहकावे में आकर परिवार की पहचान और वजूद को खत्म करने की कोशिश हो रही है।
हाल के दिनों में रोहिणी के कई बयान बिहार की राजनीति में हलचल मचा चुके हैं। आज उन्होंने लिखा, बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी बड़ी विरासत को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी नए बने अपने ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है , जब जिसकी वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर अपने ही आमादा हो जाते हैं। इसके आगे रोहिणी ने लिखा, जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है तब विनाशक ही आँख – नाक और कान बन बुद्धि – विवेक हर लेता है ।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रोहिणी का यह बयान तेजस्वी यादव की कार्यशैली और हालिया फैसलों पर सीधा हमला माना जा रहा है. हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन शब्दों के तीर साफ तौर पर परिवार और पार्टी के भीतर की दरारों की ओर इशारा करते हैं।

रोहिणी के पोस्ट से मची हलचल

हाल के दिनों में रोहिणी के कई पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है. इससे पहले भी उन्होंने पार्टी के अंदरूनी मामलों पर तीखे कमेंट किए थे। माना जा रहा है कि यह पोस्ट राजद के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व को लेकर असंतोष का संकेत है।

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