नीतीश हैक, जेडयू खत्म, सामने आ गया सबसे बड़ा सबूत!

4पीएम न्यूज नेटवर्क। बिहार में बहुत पहले से ये दावा किया जा रहा था कि नीतीश बाबू हैक हो गए हैं और बिहार को कुछ रिटायर्ड अफसर और दिल्ली दो नेता चला रहे हैं लेकिन ये बात पहले कोई नहीं मान रहा था, लेकिन इस बार एक बहुत बड़ा सबूत सामने आया है, जिसने इस दावे की सच्चाई को सबके के सामने ला दिया है। ये सबूत कौन सा है और कैसे इस सबूत से ये बात तय हुई है कि अपने नीतीश बाबू हैक हैं और चुनाव से पहले उनकी पार्टी बीजेपी में विलय हो जाएगी। ये सबकुछ हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में बताने वाले हैं। साथ ही इस पर भी चर्चा करेंगे कि मोदी के बिहार यात्रा के बाद कैसे एक के बाद एक बातें खुलकर सामने आ गई हैं।
नमस्कार, मैं हूं… और आप देखना शुरु कर चुके हैं फोर पीएम न्यूज नेटवर्क। दोस्तों बिहार की सियायत में हर दिन हैरान कर देने वाली खबरें आ रही है। सोमवार को जैसे ही पीएम मोदी का प्लेन वापसी दिल्ली के लिए उड़ा है, वैसे ही अचानक एक के बाद एक धड़ाधड़ कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं से पूरे बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। पहले नीतीश बाबू के लड़के निशांत का बयान आया, जिसमें साफतौर पर ये बात कही कि एनडीए को चाहिए कि बाबू जी को सीएम का चेहरा बनाए। इससे ये बात बहुत हद तक साफ हो गई कि कहीं न कहीं बीजेपी और जदयू में इस बात को लेकर पेंच फंसा हुआ है कि बीजेपी नीतीश कुमार को आगामी विधान सभा चुनाव में सीएम का चेहरा बनाने को तैयार नहीं है। अभी निशांत के बयान और नीतीश-मोदी की गुटबंदी की बातें चल ही रही थी कि अचानक सुबह एक खबर आई कि नीतीश सरकार में कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। इस खबर ने पूरे बिहार की राजनीति में उफान खड़ा कर दिया। सवाल ये भी खड़े कि अचानक ये कैबिनेट विस्तार क्यों होने जा रहा है। क्या ये पहले से तय था कि अचानक इसका प्लान बना। ये सबकुछ बातें राजनीतिक चर्चाओं में गंूज ही रही थी कि अचानक कैबिनेट विस्तार की बात पर मोहर लग गई। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद के पास नए मंत्रियों की एक सूची पहुंच गई। इस लिस्ट की सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात ये थी कि सूची में एक भी जूदयू के विधायक को मंत्री बनाए जाने का नहीं था। इस लिस्ट में सभी सात मंत्री बीजेपी के थे और आखिर में इन सभी मंत्रियों ने नीतीश सरकार में मंत्री की शपथ भी ली। सबसे अहम बात ये थी कि नीतीश कुमार को सीधे चैलेंज देने वाले कृष्ण कुमार मंटू भी इस लिस्ट में थे। आपको बता दें कि बीजेपी ने पिछले दिनों अपनी पार्टी में दलित पिछड़ों को भागीदारी देने के लिए एक अभियान चलाया है इसमें नीतीश बाबू की जाति के ही एक नेता को खूब हाइलाइट करने का काम कर रही है। ये नेता मंटू ही है। अभी हाल ही में कृष्ण कुमार मंटू आचानक सुर्खियों में आए थे। इन्होंने पटना के गांधी मैदान में एक बड़ा कुर्मी सम्मेलन किया था। इसमें पूरे बिहार के कुर्मियों को इक्ट्ठा किया गया था लेकिन नीतीश बाबू इस सम्मेलन में नहीं थे। आपको बता दें जब नीतीश कुमार और लालू यादव के रास्ते अलग-अलग हुए थे, उसी समय नीतीश कुमार में कुर्मी एकता को लेकर एक बड़ी रैली की थी, इसके बाद से वो यादव समाज को छोड़कर लगातार सभी पिछड़ा वर्ग नीतीश बाबू को नेता मान बैठा और आज तक 20 साल बाद भी नीतीश कुमार को कोई हिला नहीं पाया लेकिन पिछले दिनों बीजेपी ने कृष्ण कुमार मंटू को कुर्मी और पिछड़े समाज के बड़े नेता के रुप में प्रोजेक्ट किया है। आपको बता दें कि नीतीश कुमार पहले जदयू के विधायक हुआ करते थे और वो बीजेपी के केंद्रीय मंत्री राजीव कुमार रुडी के करीबी माने जाते हैं। बताया जाता है कि जदूय से राजीव ही मंटू का बीजेपी में लाए और अपनी पार्टी का टिकट दिलवाकर विधायक बनाया और दावा ये ही कि मंटू को भी पिछड़ों को नेता बनाने में राजीव ही अहम किरदार निभा रहे हैं। हालांकि अब मंटू नीतीश सरकार में मंत्री हो चुके है। इसके साथ ही 7 दूसरे मंत्रियों ने भी शपथ ली है, इन मंत्रियों को शपथ क्यूं दिलाई गई है, क्यूं कैबिनेट का विस्तार किया गया है, जदयू की ओर से ये तमाम सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जो भी मंत्री दलित और पिछड़े समुदाय के बने हैें सभी बीजेपी के ही और ये चुनाव में सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होंगे। बिहार की राजनीति में बीजेपी आमतौर पर ब्राहमण, ठाकुर बनिया पार्टी मानी जाती है लेकिन बीजेपी के नए दावं से अब वो बिहार में अपनी पैठ दलित और पिछड़ों में बढ़ा रही है, इसका सबसे ज्यादा नुकसान नीतीश बाबू और उनकी पार्टी को ही होना है, क्योंकि नीतीश बाबू पिछड़ों की राजनीति करते हैं और वो बिहार में पिछड़ों के सबसे बड़े नेता हैं, ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार कहीं न कहीं जदयू और नीतीश कुमार के फैसलों पर सवाल उठाता दिख रहा है। आपको बता दें कि बिहार के विधान सभा में कम से कम 36 मंत्रियों का कोटा है। इसमें पहले से ही बीजेपी के मंत्रियों की संख्या ज्यादा थी। अभी तक बिहार में बीजेपी के 15 मंत्री और जदयू के 13 मंत्री थे लेकिन अब नए सात मंत्रियों के आने के बाद बीजेपी के 22 और जदयू 13 पर ही अटक गई है और सबसे खास बात ये है कि नीतीश बाबू ने इसपर कोई विरोध नहीं जताया है, उन्होंने सीधे मंत्रियों की श्पथ दिला दी है। माना जा रहा है कि अचानक मंत्रिमंडल के विस्तार से ये बात तो साफ है कि अंदरखाने में कुकछ न कुछ गड़बड़ है, क्योंकि जिस तरह से एक दिन में सारी चीजें अचानक बदली हैं और नीतीश बाबू बिना किसी विरोध के अचानक मंत्री पद की शपथ दिलाने में लग गए हैं वो जदयू और नीतीश बाबू की लाचारी को दिखाता है। आपको बता दें कि पिछले एक महीने पहले ही तेजस्वी यादव ने बयान दिया था कि नीतीश बाबू होश में नहीं है और कुछ रिटायर्ड अफसर बिहार चला रहे हैं, अब ये बात कहीं न कहीं बिहार की सियासत में सच होती दिख रही है। क्या इतनी छोटी सी बात नीतीश बाबू को नहीं समझ में आ रही है कि ये जो सबकुछ बीजेपी कर रही है उससे उनकी पार्टी और नीतीश बाबू को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है लेकिन नीतीश बाबू ये सबकुछ क्यों कर रहे हैं, क्या सच में नीतीश बाबू की जदयू अंदर से खत्म हो गई है। क्या नीतीश बाबू सच में हैक है, और बीजेपी इनको अपने इशारे पर नचा रही है। आपका इस पूरे मामले पर क्या मानना है, आप अपनी राय हमें कमेंट बाक्स में दे सकते हैं।

 

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