ईरान का अमेरिका पर सबसे बड़ा वार! 1300 बिलियन डॉलर तबाह? चकनाचूर हुआ गुरूर!
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की खबरें तेजी से सुर्खियों में हैं... क्या सच में अमेरिका को...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है.. ईरान ने अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को करारा झटका देते हुए.. जॉर्डन के मुवाफक सल्टी एयर बेस पर तैनात एक महत्वपूर्ण रडार को पूरी तरह नष्ट कर दिया.. यह AN/TPY-2 रडार सिस्टम था.. जिसकी कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर है.. टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस.. मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का अहम हिस्सा था.. सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिखा कि रडार.. और उससे जुड़े उपकरण हमले में तबाह हो गए.. एक अमेरिकी अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला खाड़ी क्षेत्र की अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा नुकसान है..
ईरान के इस हमले से अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली कमजोर पड़ गई है.. और अब पेट्रियट मिसाइल सिस्टम पर ज्यादा बोझ पड़ सकता है.. लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि पेट्रियट के इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक पहले से ही सीमित है.. यह घटना युद्ध के शुरुआती दिनों में कतर में हुए AN/FPS-132 रडार हमले के बाद सामने आई है.. जिसकी कीमत 1.1 बिलियन डॉलर बताई गई थी.. अमेरिकी रक्षा विभाग अब हथियार उत्पादन तेज करने के लिए लॉकहीड मार्टिन.. और RTX जैसे ठेकेदारों के साथ बैठकें कर रहा है..
बता दें कि यह हमला न केवल सैन्य स्तर पर बल्कि वैश्विक ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है.. क्योंकि खाड़ी क्षेत्र तेल का बड़ा केंद्र है.. ईरान का यह हमला 2 मार्च 2026 को हुआ.. जब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने जॉर्डन के मुवाफक सल्टी एयर बेस को निशाना बनाया.. सैटेलाइट इमेजेस, जो एयरबस द्वारा ली गईं.. उसमें साफ दिखा कि रडार साइट पर काला धुआं.. और मलबा बिखरा पड़ा था.. AN/TPY-2 एक एडवांस्ड X-Band रडार है.. जो बैलिस्टिक मिसाइलों को हजारों किलोमीटर दूर से ट्रैक कर सकता है.. इसे THAAD सिस्टम की “आंख” माना जाता है.. जो मिसाइलों को वायुमंडल की ऊपरी परत में ही नष्ट करने में मदद करता है..
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले में रडार पूरी तरह नष्ट हो गया.. और इससे जुड़े कमांड सिस्टम भी प्रभावित हुए.. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि यह ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस का हिस्सा था.. जिसका मकसद अमेरिकी डिफेंस नेटवर्क को अंधा करना है.. युद्ध के पहले चार दिनों में अमेरिका को करीब 2 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है.. जिसमें यह रडार भी शामिल है..
जॉर्डन सरकार ने कहा कि बेस पर कोई हताहत नहीं हुआ.. लेकिन सैन्य संचालन प्रभावित हुए हैं.. यह हमला अमेरिका-इजरायल के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जवाब में था.. जिसमें ईरान के परमाणु साइट्स को निशाना बनाया गया था.. THAAD सिस्टम अमेरिका की सबसे उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणालियों में से एक है.. यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च के बाद ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.. दुनिया में फिलहाल केवल 8 THAAD बैटरियां तैनात हैं.. जिनमें से कुछ दक्षिण कोरिया, गुआम और इजरायल में हैं..
प्रत्येक बैटरी की कीमत लगभग 1 बिलियन डॉलर होती है.. जिसमें AN/TPY-2 रडार की लगभग 300 मिलियन डॉलर की लागत शामिल होती है.. एक THAAD बैटरी में करीब 90 सैनिक, 6 ट्रक-माउंटेड लॉन्चर, 48 इंटरसेप्टर मिसाइलें, एक TPY-2 रडार.. और एक केंद्रीय कमांड सिस्टम होता है.. यह सिस्टम लगभग 200 किलोमीटर ऊंचाई तक मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट कर सकता है..
ईरान के हमले से खाड़ी क्षेत्र में तैनात THAAD की क्षमता लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई है.. विशेषज्ञों का कहना है कि AN/TPY-2 जैसे रडार बेहद दुर्लभ हैं.. और इनकी कमी से अर्ली वार्निंग टाइम काफी कम हो सकता है.. RTX कॉर्पोरेशन, जो इस रडार का निर्माता है.. उसने कहा कि नुकसान बड़ा है.. लेकिन रिप्लेसमेंट में महीनों लग सकते हैं.. वहीं इस हमले के बाद अमेरिकी मिसाइल डिफेंस की जिम्मेदारी अब पेट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी-3 (PAC-3) सिस्टम पर आ गई है.. पेट्रियट एक पुराना लेकिन विश्वसनीय सिस्टम है.. जो मध्यम दूरी की मिसाइलों को नष्ट करता है.. लेकिन ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के लगातार हमलों से PAC-3 के इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से घट रहा है..
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार खाड़ी में तैनात पेट्रियट बैटरियों में अब सिर्फ 60-70 प्रतिशत मिसाइलें बची हैं.. अगर युद्ध लंबा चला तो यह स्टॉक खत्म भी हो सकता है.. अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से कुछ डिफेंस सिस्टम शिफ्ट करने की योजना बनाई है.. लेकिन इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.. वहीं ईरान ने दावा किया कि उसने 24 घंटों में 4 THAAD रडार नष्ट किए.. जिनमें जॉर्डन, सऊदी अरब, UAE और कतर शामिल हैं.. ईरानी सेंट्रल कमांड खातम अल-अंबिया ने कहा कि ये हमले अमेरिकी नेटवर्क को अंधा करने के लिए किए गए..
वहीं यह घटना युद्ध के शुरुआती दिनों में कतर के अल उदेद एयर बेस पर हुए हमले की भी याद दिलाती है.. फरवरी 2026 के अंत में ईरान ने AN/FPS-132 रडार पर प्रेसिजन स्ट्राइक की थी.. जिसकी कीमत करीब 1.1 बिलियन डॉलर बताई गई थी.. यह रडार लंबी दूरी यानी लगभग 5 हजार किलोमीटर से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होता था.. सैटेलाइट इमेजेस से पुष्टि हुई कि रडार के फेज्ड-ऐरे एंटीना क्षतिग्रस्त हो गए.. अमेरिकी स्पेस फोर्स का यह सिस्टम खाड़ी क्षेत्र की अर्ली वार्निंग का केंद्र था.. ईरान ने इसे भी ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस का हिस्सा बताया.. कतर सरकार ने कहा कि बेस सुरक्षित है.. लेकिन सैन्य कम्युनिकेशन प्रभावित हुआ है..
आपको बता दें कि वेस्ट एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ.. जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु साइट्स पर हमला किया.. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया.. जबकि इजरायल ने इसे ऑपरेशन रोअरिंग लायन कहा.. हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या हुई.. ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया और मिसाइलें दागीं.. युद्ध के पहले हफ्ते में 1 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं..



