हिजाब विवाद के 24 दिनों बाद नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी, सीएम नीतीश ने मंच पर हटाया था हिजाब!
बिहार में एक बार फिर हिजाब को लेकर चर्चा हो रही है। और इस बार फिर चर्चा का विषय हैं डॉक्टर नुसरत परवीन। दरअसल बीते साल बिहार में उठा हिजाब विवाद पर पूरी तरफ से फिलहाल के लिए खत्म होता नजर आ रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार में एक बार फिर हिजाब को लेकर चर्चा हो रही है। और इस बार फिर चर्चा का विषय हैं डॉक्टर नुसरत परवीन। दरअसल बीते साल बिहार में उठा हिजाब विवाद पर पूरी तरफ से फिलहाल के लिए खत्म होता नजर आ रहा है। क्योंकि हिजाब विवाद पर विराम लगाते हुए डॉक्टर नुसरत परवीन ने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है।
डॉ. नुसरत परवीन ने आखिरकार 23 दिनों बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है। वह पहले स्वास्थ्य विभाग पहुंची। इसके बाद गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचकर अपना योगदान दिया। इनकी ज्वाइनिंग सीधे विभाग से हुई है। इस संबंध में जब पटना के सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हिजाब खींचने का वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले दिनों वायरल हुआ था। जिसे लेकर खूब विवाद भी हुआ था।
नियुक्ति पत्र के वितरण के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कथित तौर पर एक आयुष डॉक्टर की नकाब खींची थी। जिसके बाद विवादों में आईं डॉक्टर नुसरत प्रवीण के नौकरी ज्वाइन करने को लेकर सस्पेंस गहराने लगा। 31 दिसंबर को ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि थी। लेकिन अंतिम दिन भी उन्होंने नौकरी ज्वाइन नहीं की। जबकि 63 डॉक्टरों ने ड्यूटी ज्वाइन कर लिया था। लेकिन नुसरत ने नहीं किया था।
हिजाब विवाद के बाद से नुसरत परवीन ने कॉलेज जाना भी बंद कर दिया था. फिर खबरें आईं कि वो परिवार के साथ कोलकाता चली गई हैं. पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल ने भी कई बार उनसे नौकरी ज्वाइन करने की अपील की थी. हिजाब खींचने का वीडियो सामने आने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने निशाने पर आ गए थे. कई धार्मिक नेताओं और अलग-अलग दलों के नेताओं ने उनपर निशाना साधा था. हालांकि, उनकी पार्टी जेडीयू और बीजेपी ने सीएम का बचाव किया था.
बिहार के सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने शिकायत भी दर्ज कराई थी. मामले ने इस कदर सियासी तूल पकड़ा कि पाकिस्तान से भी प्रतिक्रिया आने लगी। देश के कई नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने आयुष चिकित्सक को मनचाही पोस्टिंग और तीन लाख सैलरी का ऑफर दिया था। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नुसरत को 3 लाख रुपये मासिक वेतन, मनचाही पोस्टिंग और सरकारी फ्लैट का प्रस्ताव दिया। उन्होंने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए बिहार सरकार और नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला। तुलना करते हुए कहा गया कि बिहार में जहां नुसरत को करीब 32 हजार रुपये मिलते, वहीं झारखंड उन्हें सम्मान और बेहतर अवसर देगा। इस घटना के बाद से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या डॉ. नुसरत परवीन आयुष चिकित्सक के रूप में अपना पदभार संभालेंगी या नहीं।
राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कृत्य को महिला गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। विपक्षी नेताओं ने नीतीश कुमार से सार्वजनिक माफी की मांग की और इसे एक असंवेदनशील व्यवहार करार दिया। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने नीतीश कुमार का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया था और उनका इरादा किसी को अपमानित करना नहीं था। एनडीए नेताओं ने इसे एक सामान्य घटना के रूप में पेश करने की कोशिश की, जिसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा था। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।
वीडियो क्लिप्स और तस्वीरें विभिन्न प्लेटफार्मों पर साझा की गईं, जिससे सार्वजनिक बहस छिड़ गई। कई लोगों ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने उनके बचाव में तर्क दिए। इस वायरल वीडियो ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया, जिससे डॉक्टर नुसरत परवीन एक अनजाने विवाद का चेहरा बन गईं। इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया, जहां धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।
हालांकि डॉक्टर नुसरत परवीन द्वारा नौकरी ज्वाइन करने के बाद भी, उनकी वर्तमान स्थिति और लोकेशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह देखना बाकी है कि वह कब अपनी पोस्टिंग वाले अस्पताल में रिपोर्ट करती हैं और इस पूरे प्रकरण पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है। इस घटना ने बिहार में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को गहरा कर दिया है।



