गुजरात में BJP को बड़ा झटका, पूर्व विधायक महेश वसावा ने छोड़ी पार्टी
गुजरात की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है... पूर्व नर्मदा विधायक महेश वसावा ने BJP छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बड़ा हलचल मचा हुआ है.. पूर्व नर्मदा विधायक महेश वसावा भारतीय ट्राइबल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष छोटू वसावा के बेटे हैं.. उन्होंने 6 जनवरी को दाहोद में कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा के समापन पर.. औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए.. बता दें यह घटना राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है.. महेश वसावा पहले बीटीपी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे.. लेकिन नौ महीने पहले उन्होंने भाजपा से दूरी बना ली थी.. वहीं अब उनकी कांग्रेस में वापसी से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है..
आपको बता दें कि महेश वसावा गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं.. वे एक प्रमुख आदिवासी नेता छोटू वसावा के बेटे हैं.. छोटू वसावा गुजरात में आदिवासी समुदाय के बड़े चेहरे हैं.. और उन्होंने भारतीय ट्राइबल पार्टी की स्थापना की थी.. बीटीपी मुख्य रूप से आदिवासी अधिकारों, पानी, जंगल.. और जमीन के मुद्दों पर काम करती है.. महेश वसावा ने अपने पिता की पार्टी से राजनीति की शुरुआत की..
2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में महेश वसावा बीटीपी के टिकट पर डेडियापाड़ा से विधायक चुने गए थे.. उस समय उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों को कड़ी टक्कर दी थी.. डेडियापाड़ा आदिवासी बहुल क्षेत्र है.. जहां आदिवासी वोटरों की संख्या बहुत ज्यादा है.. महेश वसावा ने वहां से जीतकर दिखाया कि आदिवासी मुद्दों पर वे कितने मजबूत हैं.. लेकिन 2022 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.. उस चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चैतर वसावा ने जीत हासिल की..
महेश वसावा का परिवार राजनीति में गहराई से जुड़ा है.. उनके पिता छोटू वसावा कई बार विधायक रह चुके हैं.. और वे आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं.. छोटू वसावा ने कभी कांग्रेस में भी काम किया था.. लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई.. महेश वसावा भी शुरू में पिता के रास्ते पर चले.. लेकिन हाल के वर्षों में उनके राजनीतिक फैसले बदलते रहे हैं..
मार्च 2024 में महेश वसावा ने बीटीपी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया.. यह फैसला उस समय बड़ा चौंकाने वाला था.. क्योंकि बीटीपी हमेशा भाजपा की नीतियों की आलोचना करती रही है.. महेश वसावा ने भाजपा जॉइन करते हुए कहा था कि वे आदिवासी समुदाय के विकास के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म चाहते हैं.. लेकिन उनका भाजपा में सफर ज्यादा लंबा नहीं चला..
अप्रैल 2025 में सिर्फ एक साल बाद, महेश वसावा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया.. और उन्होंने अपना भगवा गमछा उतार दिया.. और पार्टी से दूरी बना ली.. वहीं इस्तीफे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि देश संविधान के मुताबिक नहीं चल रहा है.. और उन्होंने भाजपा की नीतियों को आदिवासी विरोधी बताया.. पानी, जंगल और जमीन के अधिकारों पर उन्होंने सवाल उठाए.. महेश वसावा ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले 30 सालों से जनविरोधी नीतियां चला रही है.. जो आदिवासी समुदाय को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं..
बता दें कि यह फैसला अंबेडकर जयंती के मौके पर लिया गया.. जो संकेत देता है कि वे संवैधानिक मूल्यों पर जोर देना चाहते थे.. भाजपा छोड़ने के बाद महेश वसावा ने कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाई.. लेकिन अब वे कांग्रेस में शामिल होकर वापस आ गए हैं.. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जो वे उम्मीद कर रहे थे.. साथ ही, आदिवासी इलाकों में भाजपा की पकड़ कमजोर होने से वे असंतुष्ट थे..
6 जनवरी 2026 को दाहोद में कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा का समापन हुआ.. यह यात्रा गुजरात में कांग्रेस की ओर से जनता की समस्याओं को उठाने के लिए निकाली गई थी.. इसी मौके पर महेश वसावा ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान किया.. कार्यक्रम में कांग्रेस के गुजरात इंचार्ज मुकुल वासनिक.. और जीपीसीसी अध्यक्ष अमित चावड़ा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे..
आपको बता दें कि महेश वसावा ने मंच से भाषण देते हुए भाजपा पर जमकर हमला किया.. और उन्होंने कहा कि पिछले 30 सालों में भाजपा सरकार की नीतियां जनविरोधी रही हैं.. आदिवासी समुदाय को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है.. पानी, जंगल और जमीन के अधिकार छीने जा रहे हैं.. वहीं अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं.. और उन्होंने दावा किया कि आदिवासी इलाकों में लोग भाजपा से नाराज हैं.. और कांग्रेस ही उनका सच्चा साथी है..
कांग्रेस नेताओं ने महेश वसावा का स्वागत किया.. अमित चावड़ा ने कहा कि महेश वसावा के आने से पार्टी की ताकत बढ़ेगी.. मुकुल वासनिक ने इसे आदिवासी समुदाय के लिए बड़ा कदम बताया.. यह घटना दाहोद में हुई, जो खुद आदिवासी बहुल जिला है.. यहां से महेश वसावा का संदेश पूरे गुजरात के आदिवासी इलाकों में फैल रहा है.. भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वे आदिवासियों की जमीन छीन रही है.. बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर जंगल काटे जा रहे हैं.. और पानी की कमी हो रही है..
बता दें पिछले 30 सालों की भाजपा शासन को दोषी ठहराया.. कहा कि विकास के नाम पर सिर्फ अमीरों को फायदा हो रहा है.. गरीब आदिवासी पीछे छूट रहे हैं.. अब समय है कि सभी मिलकर लड़ें.. कांग्रेस को उन्होंने आदिवासी हितों की रक्षक बताया.. और उन्होंने संकेत दिया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनेगी.. वे खुद झगड़िया या डेडियापाड़ा से चुनाव लड़ सकते हैं.. यह भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.. कई X पोस्ट्स में लोग इसे शेयर कर रहे हैं.. और राजनीतिक विश्लेषक इसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं..
महेश वसावा के कांग्रेस में शामिल होने से गुजरात की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है.. गुजरात में आदिवासी सीटें बहुत महत्वपूर्ण हैं.. यहां 27 विधानसभा सीटें आदिवासी आरक्षित हैं.. 2022 के चुनाव में भाजपा ने 12, कांग्रेस ने 3, आप ने 2 और निर्दलीय ने 1 सीट जीती थी.. महेश वसावा के आने से कांग्रेस को आदिवासी वोट बैंक मजबूत हो सकता है..
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह भाजपा के लिए झटका है.. आदिवासी इलाकों में पहले से ही कांग्रेस और आप का प्रभाव बढ़ रहा है.. महेश वसावा के पिता छोटू वसावा भी बीटीपी से अलग होकर कांग्रेस के करीब आ सकते हैं.. चर्चा है कि महेश वसावा झगड़िया सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार बन सकते हैं.. जहां आप के चैतर वसावा विधायक हैं.. चैतर वसावा भी छोटू वसावा के बेटे हैं.. लेकिन परिवार में मतभेद हैं..



