इन चीजों में भरपूर मात्रा में मिलता है ओमेगा 3 फैटी एसिड

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते चलन के कारण हमारे शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे जरूरी पोषक तत्वों की भारी कमी होने लगी है। ओमेगा-3 एक एसेंशियल फैट है, जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता, इसलिए इसे आहार के माध्यम से लेना जरूरी होता है। अक्सर जब ओमेगा-3 की बात आती है, तो लोगों के मन में महंगे चिया सीड्स या विदेशी साल्मन मछली का ख्याल आता है, जिससे आम मध्यमवर्गीय व्यक्ति इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाने से कतराता है। मगर क्या आप जानते हैं कि हमारे भारतीय रसोई घर और स्थानीय बाजारों में ऐसी कई सस्ती और सुलभ चीजें मौजूद हैं जो ओमेगा-3 का पावरहाउस हैं? यह पोषक तत्व न केवल आपके हार्ट को स्वस्थ रखता है और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता और आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए भी रामबाण माना जाता है। अगर आप भी बजट में रहकर अपनी सेहत को दुरुस्त करना चाहते हैं, तो इन देसी सुपरफूड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं।

अखरोट

मुट्ठी  भर अखरोट का सेवन आपके दैनिक ओमेगा-3 की जरूरत को पूरा कर सकता है। भीगे हुए अखरोट में कैल्शियम ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके साथ भीगे हुए अखरोट अल्फा-लिनोलेनिक एसिड का अच्छा सोर्स माना जाता है। अल्फा-लिनोलेनिक एसिड हड्डियों और दांतों के विकास के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भीगे हुए अखरोट काफी मददगार साबित होते हैं। अखरोट पर हुई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि रोजाना खाली पेट भीगे हुए अखरोट का सेवन करने से शरीर का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

सरसों का तेल

जैतून के तेल के मुकाबले सरसों के तेल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का बेहतरीन संतुलन होता है। सरसों का तेल एक प्राकृतिक मॉइश्चराइजर है। यह त्वचा में नमी को लॉक करने और पोषण प्रदान करने में मदद करता है। ड्राई स्किन की समस्या दूर करने में यह बहुत प्रभाव है। सरसों का तेल एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुणों भरपूर होती है। यह त्वचा पर मौजूद हानिकारक बैक्टरीया से लडऩे और हटाने में मदद करता है। त्वचा के घाव जल्दी भरता है और कील-मुहांसों को कम करने में मदद करता है।

सोयाबीन

सब्जी या तेल के रूप में सोयाबीन एक बजट-फ्रेंडली विकल्प है। सोयाबीन प्रोटीन का भंडार होता है। इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन शरीर में पचने के बाद यूरिक एसिड भी नहीं बनाता है। शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स सोयाबीन होता है। रोजाना एक कटोरी सोयाबीन को भिगोकर खाने से वजन बढ़ाने, मांसपेशियों को विकसित और मजबूत बनाने में मदद मिलती है। खानपान में गड़बड़ी की वजह से डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डायबिटीज में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए सोयाबीन बहुत फायदेमंद होता है।
इसमें प्रोटीन की ठीक मात्रा पायी जाती है और शरीर को इसका सेवन करने से शरीर में शुगर को मैनेज करने में फायदा मिलता है। इसके अलावा भिगोया हुआ सोयाबीन खाने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस ठीक रहता है।

अलसी के बीज

अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड के सबसे अच्छे प्लांट-बेस्ड सोर्स में से एक हैं, जो सूजन को कम करने और कोलेस्ट्रॉल के लेवल में सुधार करके दिल के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। अलसी के बीज घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं, कब्ज से राहत दिलाते हैं और हेल्दी गट माइक्रोबायोम को बढ़ावा देते हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण अलसी के बीज आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं, फूड क्रेविंग को कम करते हैं और कम खाने के लिए प्रेरित करते हैं। अलसी के बीज लिग्नान से भरपूर होते हैं, जिनमें फाइटोएस्ट्रोजेनिक गुण होते हैं। ये सीड्स हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं, खासकर पीसीओएस और मेनोपॉज में फायदेमंद होते हैं।

ओमेगा-3 क्यों है जरूरी

ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के हर अंग के सुचारू कामकाज के लिए एक ईंधन की तरह काम करता है। यह धमनियों में प्लाक (जमावट) को रोकता है और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करता है। मस्तिष्क का लगभग 60प्रतिशत हिस्सा फैट है, जिसमें ओमेगा-3 याददाश्त और फोकस बढ़ाने में मदद करता है। यह शरीर की आंतरिक सूजन को कम कर जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत देता है।

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