खराब लाइफस्टाल बनी महिलाओं की सेहत की दुश्मन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
दुनियाभर में जिस तरह से क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। स्वस्थ जीवन जीने की चाहत हर किसी की होती है, लेकिन गड़बड़ जीवनशैली, तनाव, खानपान की आदतों और हार्मोनल बदलाव कम उम्र में ही कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। महिलाएं कई गंभीर बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाती हैं, कई बीमारियां ऐसी भी होती हैं जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं। यही कारण है डॉक्टर कम उम्र से ही सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की सलाह देते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल में लैंगिक असमानताओं को दूर करने, समग्र कल्याण को बढ़ावा देने, बीमारियों से बचाव को लेकर सावधान और जागरूक करने का कार्य सरकार करती रहती है। युवावस्था से ही इन बातों का पालन कर महिलाएं न सिर्फ इन बीमारियों से बच सकती हैं, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जी सकती हैं।

महिलाओं में थायरॉइड का जोखिम

अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, दुनियाभर में 200 मिलियन (20 करोड़) से अधिक लोग इस विकार का शिकार हैं। थायरॉइड विकार बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिला-पुरुष किसी को भी हो सकता है। हालांकि आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में थायरॉइड की समस्याओं का अधिक जोखिम होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड विकार की आशंका 8 से 10 गुना अधिक होती है। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन (जैसे प्रेग्नेंसी, पीरियड्स, मेनोपॉज आदि) उन्हें इस विकार के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।

महिलाओं में कैंसर के मामले

कुछ प्रकार के कैंसर के मामले भी महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। भारत में भी यह कैंसर काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसी तरह से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम भी हाल के वर्षों में बढ़ा है। कैंसर के बढ़ते जोखिमों के लिए फैमिली हिस्ट्री, मोटापा और हार्मोनल असंतुलन को जिम्मेदार माना जाता है। सर्वाइकल कैंसर के लिए एचपीवी संक्रमण को जिम्मेदार माना जाता है जिससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती रही है। अंडाशय कैंसर अक्सर मौन प्रकार का होता है क्योंकि शुरुआती चरणों में लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। बार-बार पेट में सूजन या फूलाव महसूस होना, भोजन कम लगना या जल्दी भर जाने की भावना, लगातार थकावट, लगातार पेशाब का बार-बार झुरझुर कर जाना, या वजन अचानक कम होना ये सभी संकेत हो सकते हैं। महिलाओं को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और इन बीमारियों के प्रति जागरूक रहें।

आर्थराइटिस की समस्या

वैसे तो बीमारियां किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती हैं, हालांकि 50 की उम्र के बाद महिलाओं की सेहत कई प्रकार से प्रभावित होने लग जाती है। इसके पीछे कई जैविक, हार्मोनल और जीवनशैली संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। यही वजह है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हृदय रोग, डायबिटीज, आर्थराइटिस, सांस की समस्या और एनीमिया के मामले काफी ज्यादा देखे जाते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, वजन बढऩा और अनुचित खानपान के कारण भी आपमें गठिया का जोखिम अधिक हो सकता है। नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित आहार, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

हृदय रोगों के बढ़ते मामले

हृदय रोग का खतरा भी दुनियाभर में बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रभावित करता है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लाखों महिलाएं दिल की बीमारियों के कारण जान गंवाती हैं। महिलाओं में बढ़ते हृदय रोग के मामलों के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन के असंतुलन को एक बड़ा कारण माना जाता है जिससे रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है। तनाव और अवसाद की समस्या भी महिलाओं में अधिक देखी जाती है, जो हृदय रोग को बढ़ा सकती है। नियमित व्यायाम और ब्लड प्रेशर की जांच, संतुलित आहार के साथ धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर आप हृदय रोगों से बची रह सकती हैं।

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