एक बार फिर क्रिकेट कंट्रोवर्सी चरम पर राजनीति तेज

  • देवकी नंदन ने केकेआर पर उठाये सवाल
  • हसीना पर चुप्पी शाहरूख पर रार
  • शाहरूख खान को यदि देश में रहना है तो खत्म कराना होगा कांट्रैक्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं रहा। यह राजनीति के विस्तार के साथ भावनाओं के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा है। यही नहीं इसे चुनावी प्रयोगशाला का सबसे संवेदनशील रसायन भी कह सकते हैं। ताजा विवाद ने एक बार फिर यही साबित किया है। बांग्लादेशी खिलाड़ी को आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा खरीदे जाने के बाद देश में क्रिकेट कम और हिंदू-मुस्लिम, देशभक्ति-देशद्रोह का शोर ज्यादा सुनाई देने लगा है। एक तरफ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लेकर रह रही हैं जिनके रहन-सहन, सुरक्षा और सुविधाओं पर करोड़ों रुपये के खर्च की चर्चा है लेकिन वहां राजनीतिक चुप्पी है। दूसरी तरफ एक बांग्लादेशी क्रिकेटर के आईपीएल खेलने पर सड़कों से लेकर संसद तक हंगामा नजर आ रहा है। सवाल सीधा है देशभक्ति की कसौटी खिलाड़ी पर क्यों सत्ता पर क्यों नहीं?

केकेआर के बहाने क्रिकेट पर सांप्रदायिक चश्मा

धार्मिक कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर के बाद अब भाजपा सांसद ने भी केकेआर पर सवाल उठा दिए हैं। आरोप है कि जिस देश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हों वहां के खिलाड़ी को भारतीय लीग में क्यों जगह दी जा रही है? यह सवाल सुनने में राष्ट्रवादी लगता है लेकिन अंदर झांकिए तो यह चयनात्मक राष्ट्रवाद है। यही देश कुछ महीने पहले पाकिस्तान की टीम से मैच खेलता है खिलाड़ी गले मिलते हैं कैमरे मुस्कान पकड़ते हैं तब राष्ट्र खतरे में नहीं पड़ता। लेकिन जैसे ही मामला बांग्लादेश प्लस मुस्लिम प्लस शाहरुख खान तक पहुंचता है राष्ट्रवाद उफान पर आ जाता है।

शाहरुख खान हर विवाद का स्थायी विलेन

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान इस कहानी के सबसे आसान टारगेट हैं। वानखेड़े स्टेडियम विवाद उसके बाद फिल्म पठान पर भगवा उबाल और और अब बांग्लादेशी खिलाड़ी की खरीद पर सवाल। उन्हें देश छोड़ देने की धमकी दी जा रही है। हर बार कहानी वही है नाम शाहरुख हो तो इरादा शक के दायरे में कोई यह पूछने को तैयार नहीं कि केकेआर एक कारपोरेट फ्रेंचाइजी है खिलाड़ी चयन व्यावसायिक और क्रिकेटिंग निर्णय होता है न कि विदेश नीति का एलान।

देशभक्ति या दोहरा चरित्र?

अगर बांग्लादेशी खिलाड़ी गलत है तो फिर बांग्लादेश से व्यापार क्यों? राजनयिक रिश्ते क्यों? पूर्व प्रधानमंत्री को शरण क्यों? और अगर ये सब ठीक है तो फिर क्रिकेटर को निशाना क्यों? समझना होगा कि यह विवाद खेल का नहीं पहचान का है ध्रुवीकरण का है चुनावी मौसम की तैयारी का है।

हसीना भारत में, लेकिन सवाल गायब

इस पूरे विरोध प्रकरण में सबसे बड़ा विरोधाभास यहीं है कि बंग्लादेशी पूर्व पीएम शेख हसीना जिनके कार्यकाल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले किये गये विपक्ष पर दमनात्मक कार्रवाई हुई। मीडिया की आजादी पर सवाल उठते रहे आज भारत में शरण लिए हुए हैं। उनकी सुरक्षा, आवास, प्रोटोकॉल और सुविधाओं पर सरकारी खजाने से खर्च हो रहा है लेकिन कोई टीवी डिबेट नहीं, कोई सांसद सवाल नहीं किसी साधु-संत का कोई बयान नहीं क्यों? क्योंकि वहां सत्ता से टकराव है और यहां सिर्फ शाहरुख से।

देवकीनंदन के बाद बीजेपी सांसद का विरोध

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद योगेंद्र चंदोलिया विरोध में उतरे हैं। उन्होंने मांग की है कि केकेआर को बांग्लादेशी खिलाड़ी के साथ कान्ट्रैक्ट खत्म कर देना चाहिए। भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा है कि देवकीनंदन ठाकुर शायद धार्मिक नजरिए से बात कर रहे हैं लेकिन जिस तरह से बांग्लादेश में हमारे हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और अगर शाहरुख खान को मुंबई या देश में रहना है तो वह कई भारतीय खिलाडिय़ों को शामिल कर सकते थे। जानबूझकर उन्होंने एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को साइन किया है। साफ तौर पर विवाद खड़ा करने के लिए यह किया गया है जो गलत है। उसका कान्ट्रैक्ट खत्म कर देना चाहिए। इससे पहले देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यह बात माननी चाहिए कि कोई भी बांग्लादेशी क्रिकेटर आईपीएल में न खेले। यहां के पैसे का प्रयोग हमारे हिंदू भाई बहनों के खिलाफ नहीं होना चाहिए। हम और हमारा सनातन बोर्ड उनसे जुड़े हुए सारे लोग व सच्चे सनातनी यही चाहते हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो सनातन धर्म से जुड़े लोग इसका विरोध करेंगे। हमारे पास भी अपनी रणनीति है और आने वाले समय में वे यह साबित करेंगे कि खेल के माध्यम से भी देशप्रेम कैसे दिखाया जा सकता है।

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