ईरान के खिलाफ भारत के रुख पर विपक्ष का हमला

यूएनएससी में एनडीए सरकार केकदम से कांग्रेस बिफरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को समर्थन करने के लिए सरकार की आलोचना की है। चिदंबरम ने भारत की मौजूदा विदेश नीति को एकतरफा करार दिया है।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की विदेश नीति अब निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली अब पूरी तरह अमेरिका और इस्राइल के पक्ष में खड़ी दिख रही है। चिदंबरम के अनुसार, भारत ने ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को पेश करने में मदद की, लेकिन अमेरिका और इस्राइल के उन हमलों पर एक शब्द नहीं कहा जिनमें 1300 ईरानी लोग मारे गए।
उन्होंने बताया कि इन हमलों में 168 बच्चों की भी जान गई है। चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या यही सही कूटनीति और निष्पक्ष विदेश नीति है? उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं दिया, जबकि भारत ने अमेरिका और 12 अन्य देशों का साथ दिया।

सुरक्षा परिषद में ये हुआ

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 (2026) पास किया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पडे, जबकि चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव में ईरान के उन हमलों की कड़ी निंदा की गई है जो उसने अपने पड़ोसी देशों पर किए। अमेरिका ने कहा कि ईरान हर दिशा में हमले कर रहा है। भारत सहित करीब 140 देशों ने इस टेक्स्ट को समर्थन किया। प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हुए हमलों को गलत बताया गया। इसमें ईरान से मांग की गई कि वह रिहायशी इलाकों पर हमले तुरंत रोके। साथ ही, समुद्री व्यापार में दखल देना और उकसावे वाली कार्रवाई बंद करे। बहरीन ने इस अंतरराष्ट्रीय फैसले का स्वागत किया है।

अमेरिकी-इजरायली दोस्तों को नाराज नहीं करना चाहते पीएम मोदी : जयराम रमेश

कांग्रेस ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत के एक दिन बाद शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर अब तक मौन हैं क्योंकि वह अपने अमेरिकी एवं इजराइली दोस्तों को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स’ पर पोस्ट किया, ईरान के संवैधानिक प्रमुख अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा हत्या कर दी गई। प्रधानमंत्री मौन हैं। विदेश मंत्री मौन हैं। संसद में अब तक शोक प्रस्ताव तक नहीं रखा गया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की सही तरह से निंदा की है लेकिन ईरान पर हुए अमेरिका-इजराइल के हमले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।कांग्रेस ने कहा कि यह भी याद रखा जाना चाहिए कि ईरान ब्रिक्स+ मंच का हिस्सा है, जिसकी अध्यक्षता इस वर्ष भारत के पास है।

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत पर किया था राजकीय शोक
जयराम रमेश ने कहा, मई 2024 में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक रहस्यमय हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। तब मोदी सरकार ने 21 मई 2024 को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी और संसद में एक जुलाई 2024 को, जब सत्र शुरू हुआ, शोक प्रस्ताव भी रखा गया था। अब यह हिचकिचाहट क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें कोई संदेह नहीं कि एक कम्प्रोमाइज्ड प्रधानमंत्रीअपने अमेरिकी और इजराइली दोस्तों को नाराज़ करने से बचना चाहते हैं।

ईरान ने किया अमेरिका एयरक्रॉफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पर मिसाइल अटैक का दावा

अमेरिका-इजरायल व ईरान जंग और तेज हुई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन को भारी नुकसान पहुंचाने का बड़ा दावा किया है, जबकि अमेरिका ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह विवाद मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच सामने आया है।
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नेवी ने दावा किया कि उसके बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों ने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर सटीक हमला किया। आईआरजीसी मुख्यालय के बयान के अनुसार, यह हमला ओमान सागर में ईरान की समुद्री सीमा से लगभग 340 किलोमीटर दूर किया गया। ईरानी मीडिया ने बताया कि हमले के बाद अमेरिकी पोत और उसका स्ट्राइक ग्रुप इलाके से भाग गया। आईआरजीसी ने दावा किया कि पोत अब ऑपरेशनल नहीं रहा। ईरान ने इसे अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन बताया है।

अमेरिका ने किया पलटवार

हालांकि, अमेरिकी सेना ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है। यूएस सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट किया कि अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत समुद्र से शक्ति प्रदर्शन जारी रखे हुए है।

ईरान ने इजरायल समेत खाड़ी देशों पर किया अटैक

आईआरजीसी के मुताबिक, उत्तरी इजरायल, किरयात शमोना, हदेरा, हाइफ़ा, बहरीन में अमेरिकी पांचवां बेड़ा और क्षेत्र में अन्य अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया गया है. ईरान ने खोर्रमशहर, खेबर, शेकान, फत्ताह, इमाद और क़द्र मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया।

इजरायल का दावा ईरान में 200 से अधिक ठिकानों पर किया हमला

अल जज़ीरा के मुताबिक, इजरायली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले दिन पश्चिमी और मध्य ईरान में 200 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है. वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायली ड्रोन ने बेरूत के बाहरी इलाके में एक रिहायशी अपार्टमेंट इमारत को निशाना बनाया है। ईरान की तरफ से आधी रात से किए गए तीसरे बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान इजरायल के सबसे दक्षिणी शहर इलात में सायरन बजने लगे. प्रारंभिक आकलन से संकेत मिला है कि मिसाइल को संभवत: रोक लिया गया था किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।

अरावली के बाद चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

स्वत: संज्ञान लेकर जताई चिंता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में धड़ल्ले से हो रहे अवैध रेत खनन के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और वहां रहने वाले दुर्लभ वन्यजीवों पर मंडराते खतरे को देखते हुए स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो ) लिया है। चंबल का यह संरक्षित क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध खनन वहां के लुप्तप्राय और दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। कोर्ट के अनुसार, चंबल क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र अत्यंत संवेदनशील है, और अवैध खनन की गतिविधियां इसे स्थाई नुकसान पहुंचा रही हैं। चंबल अभयारण्य एक लंबे अरसे से रेत माफियाओं और अवैध खनन की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जिसे रोकने में अब तक की चुनौतियां चिंताजनक रही हैं। बेंच ने कहा,हमने आज राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और खतरे में पड़ी जलीय वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर संज्ञान लिया है. हमने हाल की कुछ अख़बारों की रिपोर्टों और ष्टस्क्र द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर गौर किया है। इन रिपोर्टों में बताया गया है कि जिन पूरे संरक्षित क्षेत्रों में घडय़िाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है।

पीरियड्स लीव अनिवार्य करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया सुनवाई से इनकार

सीजेआई बोले- इससे महिलाओं का ही नुकसान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की मांग वाली याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के सामने ये मामला उठाया गया था। ये याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- इस तरह की याचिकाए कभी-कभी महिलाओं को कमजोर या कमतर दिखाने का माहौल बना देती हैं. ऐसी याचिकाएं यह डर पैदा करती हैं कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ कुछ बुरा होने जैसा है. इससे उन्हें ही नुकसान होगा। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई तो नियोक्ता महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचक सकते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायिक सेवाओं में भी महिलाओं को सामान्य ट्रायल जैसे महत्वपूर्ण काम सौंपने से बचा जा सकता है, जिससे उनके करियर पर असर पड़ सकता है।

असम चुनाव से पहले कांग्रेस ने तेज की रणनीतिक धार

केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चर्चा, असम गण परिषद ने भी लिया भाग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है, जिसके तहत राहुल गांधी ने केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक की अध्यक्षता की और वहीं असम गण परिषद के नेता जयंत खाउंद पार्टी में शामिल हुए। कांग्रेस ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष का संकेत बताया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ आगामी असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक की अध्यक्षता की। एक अलग घटनाक्रम में, सोमवार को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले असम में कांग्रेस को एक बड़ा प्रोत्साहन मिला, जब असम गण परिषद (एजीपी) के पूर्व राष्ट्रीय वित्त सचिव जयंत खाउंद कुछ अन्य नेताओं के साथ पार्टी में शामिल हो गए।
खाउंद को पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल किया गया। इनमें असम प्रभारी और एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और असम के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक डी के शिवकुमार, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई और राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान शामिल थे।

हिमंता के नेतृत्व के खिलाफ असम में बढ़ा जन असंतोष : गोगोई

खाउंद का पार्टी में स्वागत करते हुए गोगोई ने कहा कि उनके जैसे जमीनी नेता का पार्टी में शामिल होना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व के खिलाफ असम में बढ़ती जन असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि असम में राजनीतिक परिवर्तन की लहर उठ रही है। उन्होंने कहा कि असम गण परिषद के जयंता खाउंद ने कुछ दिन पहले हमसे संपर्क किया था और कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की थी… आज हम उन्हें और उनके साथियों को पार्टी में शामिल करने जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के मनमाने ढंग से काम करने, अयोग्य लोगों को राजनीति में बढ़ावा देने और वर्षों से सक्रिय राजनीति में कड़ी मेहनत करने वालों को दरकिनार करने के खिलाफ एक लहर उठ रही है। वे अपने साथ केवल भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को रख रहे हैं।

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