स्कूल पर बुलडोजर एक्शन से विपक्ष आगबबूला, बीजेपी सरकार को जमकर धोया!
भाजपा राज में कब किसके घर को अवैध बता दिया जाए और उसपर बुलडोजर चलवा दी जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। सरकार मनमानी ढंग से बुलडोजर चलवा रही है और इन सबमें पिस रही है बेचारी गरीब जनता।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में कब किसके घर को अवैध बता दिया जाए और उसपर बुलडोजर चलवा दी जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। सरकार मनमानी ढंग से बुलडोजर चलवा रही है और इन सबमें पिस रही है बेचारी गरीब जनता।
जिनका कोई कसूर भी नहीं है वो भी बुलडोजर एक्शन की जद में आ जा रहे हैं और सरकारी सिस्टम का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसी ही एक घटना आई है एमपी से जो की चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे लेकर विपक्ष भाजपा सरकार पर हमलावर है। इसी बीच एमपी से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां मध्य प्रदेश के बैतूल में स्कूल की बिल्डिंग को अवैध बताकर बुलडोजर कार्रवाई हुई है। प्रशासन की तरफ से कहा गया कि बिना अनुमति अवैध तरीके से निर्माण हुआ था। पूरा मामला भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ढाबा गांव का है। गांव के रहने वाले अब्दुल नईम ने अपने खर्च से अपनी जमीन पर स्कूल बनवाया था।
ढाबा गांव में अपनी जमीन पर अब्दुल नईम ने स्कूल का निर्माण करवाया है। स्कूल निर्माण में कुल 20 लाख रुपए खर्च हुए। निर्माण का कार्य अभी चल रहा था। ढाबा गांव में करीब 2000 लोग रहते हैं। वहीं, पूरे गांव में तीन ही मुस्लिम परिवार हैं। गांव में अचानक से यह अफवाह फैलने लगी कि इसमें गैरकानूनी मदरसा चल रहा है। वहीं, अब्दुल नईम का कहना है कि अभी तो बिल्डिंग तैयार नहीं हुई है तो संचालन का सवाल ही नहीं है। खैर इस घटना के सामने आने के बाद विपक्ष ने भाजपा की तानाशाह सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठा दिए हैं।
गौरतलब है कि भाजपा सरकार में हो रही इस मनमानी ओर लगाम कब लगेगी इसपर अभी भी संशय बरकरार है। आपको बता दें कि अब्दुल नईम एक साधारण आदमी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और कुछ उधार लेकर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए। अपनी निजी जमीन पर स्कूल की बिल्डिंग बनवाई और नाम रखा SK पब्लिक स्कूल। सामने आई जानकारी के मुताबिक स्कूल को लेकर उनका प्लान था नर्सरी से आठवीं क्लास तक के बच्चों को पढ़ाना। गांव में ज्यादातर आदिवासी और दलित परिवार रहते हैं, करीब 2000 की आबादी है, और मुस्लिम परिवार महज 3-4 घर। जहां ये स्कूल बनवाया जा रहा था वहां से सरकारी स्कूल दूर है, बच्चों को पढ़ाई के लिए परेशानी होती है। अब ऐसे में अब्दुल का इरादा नेक था, गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, गांव आगे बढ़े। लेकिन भाजपा राज में भला नेक इरादे वालों का कहाँ भला हो पाया है जो नईम का होता।
हैरानी की बात ये है कि जब निर्माण चल रहा था, तभी अफवाह फैल गई। कुछ लोग कहने लगे – ये मदरसा बन रहा है, अवैध तरीके से धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। जबकि बिल्डिंग अभी पूरी भी नहीं हुई थी, कोई क्लास शुरू नहीं हुई, कोई साइनबोर्ड नहीं लगा, कोई किताबें नहीं आईं। गांव वाले तो खुश थे। कई लोगों ने कहा हमारे बच्चों के लिए स्कूल बन रहा है, इसमें बुराई क्या? एक स्थानीय आदिवासी कार्यकर्ता ने तो खुलकर सपोर्ट किया। लेकिन अफवाह ने अपना काम कर दिखाया।
दरअसल 11 जनवरी को ग्राम पंचायत ने नोटिस जारी कर दिया – बिल्डिंग खुद तोड़ो, अनुमति नहीं है। जबकि अब्दुल का कहना है कि उनके पास कुछ कागजात थे, पंचायत से NOC की बात भी चल रही थी। लेकिन 13 जनवरी को जब वो और गांव वाले कलेक्टर से मिलने गए, तब प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। बिल्डिंग का कुछ हिस्सा – शेड और दीवारें – गिरा दी गईं। किताबें जो आई थीं, वो भी मलबे में दब गईं। प्रशासन का कहना है कि निर्माण अवैध था, पंचायत से पूरी अनुमति नहीं ली गई, इसलिए कार्रवाई की। कलेक्टर साहब का कहना है कि कानून के तहत एक्शन लिया गया। लेकिन इसपर गांव वाले और अब्दुल का कहना है कि अफवाह की वजह से ऐसा हुआ। गांव में सिर्फ 3-4 मुस्लिम परिवार, फिर मदरसा कैसे चलता? जांच में भी कुछ गलत नहीं मिला। फिर भी बुलडोजर क्यों?
वहीं इस पूरे मामले पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा – “अब्दुल की गलती यह नहीं है कि उनका स्कूल गैर-कानूनी तौर पर चल रहा है, उनके स्कूल के तमाम कागजात मौजूद हैं। गलती यह है कि वे भारतीय मुसलमान हैं और अपने गरीब, गैर-मजहबी हमवतन के लिए उनके दिल में हमदर्दी है।” ओवैसी साहब का इशारा साफ है – ये धार्मिक भेदभाव है। एक मुस्लिम शख्स गरीब हिंदू-आदिवासी बच्चों के लिए कुछ अच्छा कर रहा है, तो उसे टारगेट किया जा रहा है।
हालांकि ये मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं है। ये सवाल उठाता है हमारे समाज पर। मध्यप्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों की हालत खराब है – कोई बिल्डिंग नहीं, कोई शौचालय नहीं। बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ते हैं। वहां एक शख्स अपना पैसा लगाकर मदद कर रहा है, तो उसे सपोर्ट करना चाहिए न? जुर्माना लगाओ, कागजात पूरे करवाओ, लेकिन बुलडोजर क्यों? अफवाहों पर इतनी जल्दी एक्शन? कुछ लोगों का कहना है कि ये एक्शन अब्दुल के मुसलमान होने पर हुआ है तो कुछ का कहना है कि ये सरकार शिक्षा विरोधी है जिस वजह से ऐसे एक्शन ले रही है। हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है जिसपर सरकार घिरी हो या फिर सरकार के फैसलों पर सवाल उठाया गया हो। भाजपा राज में ऐसे बुलडोजर एक्शन आम हो गए हैं।



