संसद में PM के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष का हंगामा, एकजुट हुआ पूरा ‘INDIA’, नर्वस हुए Modi !
संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बदले-बदले से नजर आए......जब विपक्ष की एक आवाज ने 56 इंची सीने के दावों को चुनौती दे दी....दरअसल, बीते दिनों संसद में जो पल देखने को मिला...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बदले-बदले से नजर आए……जब विपक्ष की एक आवाज ने 56 इंची सीने के दावों को चुनौती दे दी….दरअसल, बीते दिनों संसद में जो पल देखने को मिला…
वो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है…राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जो कुछ भी हुआ…उसने ये साफ कर दिया है कि अब विपक्ष न केवल एकजुट है…बल्कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकाधिकार और उनकी भाषण शैली को सीधी चुनौती देने की स्थिति में आ गया है…इस पूरे घटनाक्रम को अगर गहराई से देखा जाए…तो इसमें INDIA गठबंधन की मजबूती और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मविश्वास में आती कमी साफ दिखाई देती है…
दरअसल, संसद के भीतर INDIA गठबंधन ने जिस तरह की एकजुटता दिखाई…उसने सत्ता पक्ष को हैरान कर दिया…जिसके बाद से कहा जा रहा है कि…ये वो दौर नहीं है…जब विपक्ष बिखरा हुआ था और प्रधानमंत्री की हर बात को चुपचाप स्वीकार कर लिया जाता था…जैसे ही प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में बोलना शुरू किया…पूरा विपक्ष एक सुर में खड़ा हो गया और तानाशाही नहीं चलेगी, LoP को बोलने दो…के नारों से पूरा सदन गुंज उठा…ये एकजुटता केवल शोर-शराबा नहीं थी…बल्कि ये संदेश था कि अब विपक्षी दल एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और सरकार की मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेंगे…
प्रधानमंत्री मोदी को हमेशा एक बहुत ही प्रभावशाली वक्ता के रूप में देखा जाता है…जो किसी भी परिस्थिति में अपना आपा नहीं खोते…लेकिन इस बार राज्यसभा में उनकी बॉडी लैंग्वेज यानी शारीरिक हाव-भाव कुछ अलग ही कहानी कह रहे थे…जहां विपक्ष के लगातार हंगामे और कड़े विरोध के बीच उनके चेहरे पर वो चिर-परिचित मुस्कान और आत्मविश्वास गायब था……उनके चेहरे पर आई छटपटाहट और असहजता ये बता रही थी कि उन्हें इस तरह के कड़े विरोध की उम्मीद नहीं थी…जब सामने से एक स्वर में विरोध के नारे लगते हैं….तो किसी के लिए भी अपनी लय बनाए रखना मुश्किल होता है….और मोदी जी के मामले में ये साफ दिखा कि वो थोड़े नर्वस थे…
तो देखा आपने की कैसे पीएम मोदी के चेहरे की रंगत गायब है…यानी दोस्तों, तस्वीर साफ है, और सच भी सामने है कि संसद में पीएम मोदी का वो पुराना आत्मविश्वासस गायब था…जब पूरा INDIA गठबंधन एक साथ खड़ा हुआ…तो मोदी जी के चेहरे की नर्वसनेस पूरी दुनिया ने देखी…विपक्ष के इस हंगामें से साफ है कि अब सिर्फ एकतरफा संवाद नहीं चलेगा…अब सवाल भी होंगे, और जवाब भी देने होंगे…
अक्सर ये देखा गया है कि जब सरकार के पास विपक्ष के ठोस सवालों का जवाब नहीं होता, तो वो व्यक्तिगत हमलों पर उतर आती है…प्रधानमंत्री द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र का मजाक उड़ाना इसी बात का प्रमाण माना जा सकता है…पीएम मोदी अपने अभिभाषण के दौरान खड़गे का मजाक बना रहे हैं…कहा जाता है कि जब तर्क खत्म हो जाते हैं…तब अहंकार जन्म लेता है…राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र का मजाक उड़ाना न केवल असंसदीय है…बल्कि प्रधानमंत्री की हताशा को भी दर्शाता है…एक वरिष्ठ नेता के प्रति इस तरह की टिप्पणी ये दिखाती है कि विपक्ष के बढ़ते दबाव ने प्रधानमंत्री को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया है…ये तंज दरअसल उनकी अपनी परेशानी को छिपाने का एक जरिया था…वो ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि…वो अभी भी नियंत्रण में हैं…लेकिन उनकी नजरों का बार-बार इधर-उधर घूमना कुछ और ही बयां कर रहा था…
सदन में जब विपक्ष ने वॉकआउट किया…तब जाकर प्रधानमंत्री ने राहत की सांस ली…ये इस बात का सबूत है कि मोदी जी केवल तभी सहज महसूस करते हैं…जब उनके सामने कोई चुनौती न हो…वीडियो को देखकर पता चलता है कि उन्होंने अपने भाषण का एक बहुत छोटा हिस्सा ही देश की वर्तमान उपलब्धियों पर दिया…बाकी समय वो कांग्रेस के पिछले 70 सालों के इतिहास को कोसने और पुरानी यादों को कुरेदने में बिताते रहे…जोकि ये दिखाता है कि 12 साल के शासन के बाद भी प्रधानमंत्री के पास भविष्य का ठोस रोडमैप पेश करने के बजाय केवल कांग्रेस की आलोचना करने का सहारा बचा है…
प्रधानमंत्री ने भारत को ग्लोबल साउथ…विकासशील देशों की आवाज बताया…लेकिन INDIA गठबंधन और जानकारों ने इसकी पोल खोल दी…अगर भारत वास्तव में ग्लोबल साउथ का नेता है…तो वो अमेरिका के दबाव में ईरान जैसे महत्वपूर्ण साथी के मुद्दे पर चुप क्यों है?…चाबहार पोर्ट, जो भारत के व्यापार के लिए संजीवनी था…आज अमेरिकी प्रतिबंधों की भेंट चढ़ रहा है और सरकार बेबस है…अमेरिका द्वारा भारतीय ट्रेडर्स पर लगाए गए 18% टैरिफ पर प्रधानमंत्री की चुप्पी ये सवाल खड़ा करती है कि…क्या हम वास्तव में एक स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति का पालन कर रहे हैं…या सिर्फ अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं…
कुल मिलाकर, संसद का ये सत्र INDIA गठबंधन के लिए एक बड़ी जीत की तरह उभरा है…जहां विपक्ष ने ये साबित कर दिया है कि…संख्या बल से ऊपर उठकर अब उनके पास संकल्प बल है…प्रधानमंत्री मोदी की घबराहट ये साफ संकेत देती है कि…अब एकतरफा संवाद का दौर खत्म हो चुका है…अब संसद में सवाल पूछे जाएंगे….जवाब मांगे जाएंगे और सरकार को हर कदम पर घेरा जाएगा…ये मजबूत विपक्ष ही भारतीय लोकतंत्र की असली खूबसूरती है….जिसने आज देशभर में अपनी पीठ-थपथपाने वाले मोदी जी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है….



