उन्नाव: टोल से फर्राटा भरते ओवरलोड ट्रक, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति! पढ़िए ख़ास रिपोर्ट
उन्नाव के नवाबगंज टोल प्लाजा पर ओवरलोड वाहनों का खेल सामने आया है। आरोप है कि ARTO स्तर पर मिलीभगत से हजारों ओवरलोड ट्रकों को बिना कार्रवाई के छोड़ा जा रहा है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्ती के दावे लगातार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह कई बार साफ कर चुके हैं कि नियमों के उल्लंघन पर कोई समझौता नहीं होगा। लेकिन उन्नाव से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर स्थित नवाबगंज टोल प्लाजा पर 4PM के रिपोर्टर रंजन बाजपाई की देर रात की पड़ताल में जो दृश्य सामने आए, उन्होंने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की पोल खोल दी। आरोप है कि एआरटीओ स्तर पर ही ओवरलोड ट्रकों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
रात 12 बजे टोल प्लाजा पर दिखी हकीकत
रात करीब 12 बजे, नवाबगंज टोल प्लाजा पर भारी संख्या में ओवरलोड वाहन बिना किसी रोक-टोक के गुजरते दिखाई दिए। कैमरे में कैद तस्वीरों में साफ देखा गया कि ट्रक और भारी वाहन तेज रफ्तार से लखनऊ की ओर बढ़ रहे थे। न कोई जांच, न कोई रोकथाम और न ही मौके पर किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नजर आई।
7000 वाहन गुजरे, सिर्फ 25 का चालान
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, टोल प्लाजा से गुजरने वाले ओवरलोड वाहनों की सूची नियमित रूप से एआरटीओ कार्यालय को भेजी जाती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पिछले दो महीनों में करीब 7000 वाहनों के गुजरने के बावजूद केवल 25 वाहनों का ही चालान किया गया। यहीं से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बाकी हजारों वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
हर दिन 5 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान
जानकारों के अनुसार, इस टोल से रोजाना करीब 500 ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। यदि नियमों के अनुसार प्रत्येक वाहन पर औसतन 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए, तो:
- प्रतिदिन संभावित राजस्व: 5 करोड़ रुपये
- मासिक संभावित राजस्व: लगभग 150 करोड़ रुपये
ऐसे में यह सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला मामला भी बन जाता है।
हादसों को भी दे रहे न्योता
ओवरलोड वाहन सिर्फ राजस्व हानि का कारण नहीं हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। तेज रफ्तार और अतिरिक्त वजन के कारण ऐसे वाहनों से दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, जिनकी एक बड़ी वजह यही ओवरलोड ट्रक हैं।
सवाल पूछते ही चालक फरार
जब संवाददाता रंजन बाजपई ने मौके पर एक वाहन चालक से ओवरलोडिंग को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की, तो वह बिना जवाब दिए वहां से निकल गया। यह स्थिति पूरे सिस्टम पर और भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर ओवरलोड वाहनों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
उन्नाव का यह मामला बताता है कि जमीन पर हालात अक्सर सरकारी दावों से अलग होते हैं। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि इसका असर सड़क सुरक्षा, सरकारी राजस्व और आम जनता, तीनों पर पड़ता है। अब जरूरत है पारदर्शी जांच और जवाबदेही की, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर ओवरलोड वाहनों का यह खेल किसकी छत्रछाया में चल रहा है।
रिपोर्ट – रंजन बाजपाई
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