शहर में जाम, लोग परेशान, प्रशासनिक व्यवस्था नाकाम
बड़े दफ्तरों की भीड़, सिंगल रोड का बोझ, हर बार कटघरे में वर्दी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ शहर में जाम अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। खासकर परिवर्तन चौराहे से लेकर डालीगंज चौराहे तक का इलाका रोज़ाना भीषण जाम से जूझता है। हालात इतने खराब हैं कि आम जनता को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि इस जाम की असली वजह क्या है और जिम्मेदारी किसकी है? इस पूरे रूट पर मंडलायुक्त कार्यालय, परिवहन कार्यालय, कचहरी, कैसरबाग बस अड्डा, मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े-बड़े सरकारी संस्थान स्थित हैं।
एक ही सिंगल रोड पर इतनी भारी आवाजाही, ऊपर से सडक़ की सीमित चौड़ाई और नो पार्किंग के बावजूद बेतरतीब खड़े वाहन—ये सभी मिलकर जाम को स्थायी समस्या बना चुके हैं। इसके बावजूद समाधान के नाम पर सिर्फ तात्कालिक इंतजाम ही दिखाई देते हैं। चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी और ट्रैफिक सिपाही पूरी मुस्तैदी से ट्रैफिक संभालते नजऱ आते हैं। जनता को भी उम्मीद रहती है कि चौराहे पर पुलिस खड़ी है तो रास्ता निकल जाएगा। लेकिन जाम की जड़ सडक़ पर नहीं, बल्कि सिस्टम में है। ऐसे में सवाल यह है कि जब समस्या प्लानिंग और व्यवस्था की है, तो कार्रवाई हर बार नजदीकी चौकी इंचार्ज या सिपाही पर ही क्यों होती है?
यह वही रूट है जो परिवर्तन चौराहे से सीधे मेडिकल कॉलेज, दुबग्गा चौक, बालागंज, मलिहाबाद और हरदोई रोड को जोड़ता है। सिंगल रूट होने के कारण यहां थोड़ी सी भी अव्यवस्था पूरे शहर के ट्रैफिक को प्रभावित कर देती है। सडक़ को चौड़ा करने, वैकल्पिक रूट विकसित करने या बड़े कार्यालयों के लिए अलग पार्किंग और ट्रैफिक प्लान बनाने पर अब तक गंभीरता से काम नहीं हुआ।आला अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे जाम के मूल कारणों पर ध्यान दें। सिर्फ फील्ड में खड़े पुलिसकर्मियों पर दबाव डालना या कार्रवाई करना समाधान नहीं है। जरूरत है परिवहन विभाग, कचहरी प्रशासन, नगर निगम और पुलिस के बीच समन्वय की, ताकि इस रूट के लिए स्थायी ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार हो सके।

भारत सरकार में कूटनीतिक दृष्टिकोण की कमी: गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हुए हमलों की निंदा की
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हुए हमलों की निंदा की और पड़ोसी देश के प्रति भारत सरकार के कूटनीतिक दृष्टिकोण की आलोचना की। एक पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही बर्बरता की खबरों को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पांच हिंदुओं की हत्या और महिलाओं के खिलाफ किए गए अत्याचार मानवता पर कलंक हैं।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को याद करते हुए, गहलोत ने बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाओं के बढऩे पर चिंता व्यक्त की और इसे भारत सरकार की कूटनीति की विफलता बताया। गहलोत ने कहा, बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही बर्बरता की खबरें चिंताजनक हैं। महज 19 दिनों में 5 हिंदुओं की हत्या और वहां महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार मानवता पर कलंक हैं। 1971 के उस दौर की यादें आज भी ताजा हैं, जब श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने न केवल कूटनीतिक दृढ़ता दिखाई, बल्कि अपने दृढ़ संकल्प से इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया। उन्होंने अमेरिका जैसी महाशक्ति की भी परवाह नहीं की, जिसने भारत के खिलाफ अपना सातवां बेड़ा भेजा था। यह भी चिंताजनक है कि जिस देश के निर्माण में भारत ने ही मदद की थी, वह भारत के खिलाफ हो गया है। यह भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता है।
प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के जीवन और गरिमा की रक्षा करना भारत का नैतिक और कूटनीतिक दायित्व है। गहलोत ने कहा, केंद्र सरकार को गहरी चिंता व्यक्त करने जैसे औपचारिक बयानों से आगे बढक़र ठोस कदम उठाने चाहिए। पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के जीवन और गरिमा की रक्षा करना हमारा नैतिक और कूटनीतिक दायित्व है। इतिहास गवाह है कि निर्दोषों की जान केवल खोखले नारों से नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व से बचाई जा सकती है। प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर प्रभावी दबाव डालना चाहिए।
संस्था को बदनाम करने और छात्रों के उत्पीडऩ को तेज करने का एक संगठित प्रयास किया जा रहा: जेएनयूएसयू
छात्र संघ ने दिल्ली पुलिस पर भी साधा निशाना
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने मंगलवार को परिसर में लगाए जा रहे भडक़ाऊ नारों को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था को बदनाम करने और छात्रों के उत्पीडऩ को तेज करने का एक संगठित प्रयास किया जा रहा है।
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ भडक़ाऊ नारे लगाए जाने की घटना के बारे में बात करते हुए, जेएनयूएसयू ने कहा कि परिसर में जनवरी 2020 में हुई हिंसा के विरोध में 5 जनवरी को एक कैंडल मार्च निकाला गया था। जेएनयूएसयू के बयान में कहा गया कि 5 जनवरी 2020 को, नकाबपोश हथियारबंद गुंडों ने जेएनयू परिसर में घुसकर साबरमती हॉस्टल और अन्य इलाकों में छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया। यह कोई मामूली झड़प नहीं थी, बल्कि एक ऐसे समुदाय पर खुला हमला था जो शांतिपूर्वक फीस में भारी बढ़ोतरी का विरोध कर रहा था, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। उस आतंक भरी रात को छह साल बीत चुके हैं।
कोमल शर्मा और एबीवीपी के वे गुंडे अब तक नहीं पकड़े गए
बयान में आगे कहा गया कि कोमल शर्मा और एबीवीपी के वे गुंडे कहां हैं जिन्होंने राष्ट्रीय टेलीविजन पर हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की बात स्वीकार की थी? दिल्ली पुलिस—जो लोकतांत्रिक प्रतिरोध के छोटे से छोटे कृत्यों के लिए भी जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में असाधारण दक्षता दिखाती है—5 जनवरी के मामले में एक भी गिरफ्तारी करने में विफल रही है। 5 जनवरी 2020 को, छात्रावास शुल्क वृद्धि के विरोध में कैंपस में हो रहे प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष पर हमला कर दिया था। कुछ दिनों बाद, हमलावरों के साथ एक अज्ञात महिला देखी गई, जिसकी पहचान कोमल शर्मा के रूप में हुई। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
यूपी में भीषण ठंड से घरों में दुबकेलोग 31 जिलों में घने कोहरे की चेतावनी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा हैं। हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के चलते शीतलहर चल रही है, जिससे ठंड और बढ़ गई हैं। घने कोहरे की वजह से सडक़ों पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। मौसम विभाग ने 7 जनवरी को 31 जिलों में घने कोहरे और शीत दिवस की चेतावनी दी है।
यूपी में पहाड़ों पर हुई बर्फबारी की वजह से मैदानी इलाकों में भी ठंड में इजाफा हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक यूपी के दोनों संभागों में आज भी मौसम शुष्क रहने का अनुमान हैं. इस दौरान प्रदेश के ज़्यादातर जिलों में घने से अत्यंत घना कोहरा होने की संभावना है जबकि कहीं-कहीं शीत दिवस की भी चेतावनी दी गई हैं। कई जगहों पर विजिबिलिटी जीरो मीटर रहने का अनुमान हैं। घने कोहरे की वजह से लोग सुबह और शाम के समय घर से निकलने में परहेज कर रहे हैं। सडक़ों पर सन्नाटा छाया है और दूर-दूर तक कोहरे की सफेद परत दिख रही है. ठंड की वजह से प्रदेश के कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां भी बढ़ा दी गई है तो कहीं समय में बदलाव किया गया है।
स्ट्रीट डॉग पर सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट बोला कुत्तों का दिमाग नहीं पढ़ सकते कि कब काटेगा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर सुनवाई जारी है। इस दौरान पीठ ने कहा है कि ये कहा नहीं जा सकता की कुत्तों के मन में क्या चल रहा है और कब वो किसी को काट लें। गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया कर रहे हैं।
7 नवंबर को न्यायालय ने स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने और उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था। मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों से सिर्फ रेबीज ही नहीं बल्कि सडक़ दुर्घटना का भी खतरा बढ़ जाता है।
सभी कुत्तों को पकडऩा समाधान नहीं : सिब्बल
डॉग लवर्स की ओर से पैरोकारी कर रहे वकील कपिल सिब्बल ने कहा, सभी कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना शारीरिक रूप से संभव नहीं है। आर्थिक रूप से भी यह व्यवहार्य नहीं है। मनुष्यों के लिए भी खतरनाक है। इसे वैज्ञानिक तरीके से ही करना होगा। समस्या यह है कि कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है। सिब्बल ने कहा, सभी कुत्तों को पकडऩा समाधान नहीं है।
जिन राज्यों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे : जस्टिस संदीप मेहता
इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने जवाब देते हुए कहा, रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। जस्टिस मेहता ने कहा, हम केवल यह निगरानी करने की कोशिश कर रहे हैं कि नियमों और कानूनों का पालन हो रहा है या नहीं, जो अभी तक नहीं हुआ है। जिन राज्यों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे।


