केरल में राजनीतिक सरगर्मी तेज, कांग्रेस को विधानसभा चुनाव से बड़ी उम्मीदें

केरल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से सत्ता के वनवास को समाप्त करने की कोशिश में जुटी है और अब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत झोंक रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केरल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से सत्ता के वनवास को समाप्त करने की कोशिश में जुटी है और अब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत झोंक रही है।

पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से उत्साहित है और इसे आगामी विधानसभा चुनाव में अपने लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की यह तैयारी राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है।

केरल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां पर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस 10 साल से सत्ता से दूर है और उसकी कोशिश सत्ता में वापसी की है. पार्टी विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तरह से इलेक्शन मोड में आ गई है और उसने सत्ता पर फिर से कब्जा के लिए खास एजेंडे पर काम भी शुरू कर दिया है. साथ ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के लिए 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए गठबंधन अपना आधार बढ़ा रहा है.

साल 2026 में अभी 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं. इसके लिए कांग्रेस ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए अपनी स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर दिया है. राज्यवार तौर पर बनाई गई कमेटी केरल, असम, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और पश्चिम बंगाल में प्रत्याशियों के चयन का काम देखेगी.

प्रियंका नहीं मधुसूदन को केरल की जिम्मेदारी
केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को असम की जिम्मेदारी दी गई है. प्रियंका के अलावा केरल की जिम्मेदारी मधुसूदन मिस्त्री को सौंपी गई है. इसी तरह तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के लिए छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव और पश्चिम बंगाल के लिए बीके हरिप्रसाद कमेटी के चेयरमैन बनाए गए हैं.

दूसरी ओर, पार्टी से जुड़े सूत्रों ने सोमवार को बताया कि केरल प्रदेश कांग्रेस समिति की ओर से आयोजित 2 दिवसीय KPCC लीडरशिप समिट 2026 के दौरान केरल में चुनाव से जुड़े इन मसलों पर चर्चा की गई.

चुनाव के लिए केरल में मिशन 100 का टारगेट
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि चुनाव में 100 सीटों का लक्ष्य इसलिए रखा गया है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद हमारा आत्मविश्वास बढ़ गया है, और अब हमें लगता है कि सत्ताधारी CPI(M) के नेतृत्व वाले LDF को हराया जा सकता है.

गठबंधन के विस्तार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले UDF का विस्तार होने वाला है, इसको लेकर कई समूहों से बात चल रही है और गठबंधन कुछ नए साझेदारों को जोड़ने की उम्मीद कर रहा है. LDF के साथ गठबंधन करने वाले दलों, जिसमें केरल कांग्रेस (M) भी ​​शामिल है, को शामिल करने की कवायद चल रही है.

UDF का कुनबा बढ़ाने की कोशिश
उनका कहना है कि केरल कांग्रेस (M) के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है, हालांकि सांसद जोस के मणि की अगुवाई वाली पार्टी ने किसी तरह की बातचीत की पुष्टि नहीं की है. उन्होंने आगे कहा कि लीडरशिप समिट में यह माना गया कि स्थानीय निकाय में कांग्रैस का बढ़िया प्रदर्शन कोई संयोग नहीं है, बल्कि संगठनात्मक तौर पर लगातार काम करने और सामाजिक पहुंच की वजह से ऐसा हुआ.

इस समिट में सबरीमाला में सोने के गायब होने, तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंताओं सहित प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक मसलों पर चर्चा की गई. पार्टी से जुड़े नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी केरल के लिए एक वैकल्पिक विकास योजना पेश करने वाली है, जो आर्थिक पुनरुद्धार और जन-केंद्रित नीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगी.

समिट में चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के चयन पर भी चर्चा हुई, नेताओं ने कहा कि उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए अभी काफी समय है. लेकिन जीतने की क्षमता ही चयन का मुख्य आधार होगा, और UDF साझेदारों के साथ परामर्श करके सीट-बंटवारे में समायोजन किया जाएगा. बैठक में सामाजिक पहुंच के प्रयासों की भी समीक्षा की गई.

धार्मिक सियासत के जरिए साधने की कवायद
चुनाव में धार्मिक सियासत का सहारा लेने की भी कोशिश की जा रही है. पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है, ईसाई समुदाय के कुछ वर्ग, खासकर कोल्लम से कोट्टायम तक के गैर-कैथोलिक क्षेत्र में, और पार्टी का पारंपरिक कैथोलिक वोट बैंक कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के करीब आ रहा है. इसके अलावा यह भी देखा गया कि कई सुन्नी मुस्लिम समूह जो पहले वाम गठबंधन का समर्थन किया करते थे, लेकिन अब वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जुड़ना पसंद कर रहे हैं.

पार्टी नेताओं के अनुसार, हिंदू समुदाय के कुछ वर्गों में वामपंथी सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि UDF सबरीमाला मंदिर में कथित तौर पर कई किलो के सोने के गायब होने को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठा सकती है. उनका दावा है कि BJP इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक्टिव नहीं रही थी.

दूसरी ओर, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि कांग्रेस और UDF लोगों के सामने एक विजन रखेंगे कि केरल को मौजूदा स्थिति से कैसे उबारा जा सकता है. UDF को अगले विधानसभा चुनावों में केरल की सत्ता में लौटने और एक “सरप्राइज” देने का भरोसा है. उनका कहना है कि पार्टी का फोकस महज LDF की आलोचना करना नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां लेफ्ट सरकार नाकाम रही और लोगों के सामने उनका स्पष्ट विकल्प पेश करना है.

राहुल गांधी केरल में निकालेंगे UDF यात्रा
लीडरशिप समिट के बाद KPCC के प्रमुख सनी जोसेफ ने कहा कि कांग्रेस सबरीमाला में सोने की चोरी और रोजगार गारंटी योजना में प्रस्तावित संशोधनों सहित कई अलग-अलग मुद्दों पर मजबूत और लगातार विरोध प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को मौजूदा केंद्र सरकार कानूनी बदलावों के जरिए कमजोर कर रही है. साथ ही इस योजना से राष्ट्रपिता का नाम हटाना भी शामिल है.

मनरेगा का नाम बदलने को लेकर देशव्यापी आंदोलनों के हिस्से के रूप में अगले हफ्ते 13 और 14 तारीख को तिरुवनंतपुरम में अकाउंटेंट जनरल ऑफिस के सामने पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी. साथ ही जोसेफ ने बताया कि 19 जनवरी को एक “महापंचायत” भी आयोजित की जाएगी जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में जीतने वाले और चुनाव लड़ने वाले दोनों लोगों को इसमें बुलाया जाएगा. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे.

राहुल गांधी की अगुवाई में UDF यात्रा निकाली जाएगी, जिसका मकसद एक नया केरल बनाना और जनता का समर्थन हासिल करना है. यह यात्रा 6 फरवरी को शुरू होगी. जोसेफ ने कहा कि जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ेगी, उम्मीदवार चयन से संबंधित प्रक्रियाएं भी होती जाएंगी. पार्टी ने लोगों का भरोसा जीता है और उस भरोसे को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध पार्टी कार्रवाई के साथ आगे बढ़ेगी.

2021 के चुनाव में किसे मिली जीत
केरल में वाम मोर्चा लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) 2021 के चुनाव में अपनी सत्ता बचाए रखने में कामयाब रहा. इस चुनाव में 140 सीटों वाली केरल विधानसभा में एलडीएफ को 99 सीटों पर जीत मिली थी. एलडीएफ का यह प्रदर्शन 2016 के चुनाव से भी कहीं बेहतर था. तब उसे 91 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

इसी तरह कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को महज 41 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. यूडीएफ को 2016 की तुलना में 6 सीटों का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़ गया था. बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का खाता भी नहीं खुल पाया था.

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