मेयर चुनाव पर सियासी संग्राम, शिंदे गुट के पास बहुमत नहीं
बीएमसी रिजल्ट के बाद महराष्ट्र के राजनीतिक के नए चाणक्य देवेंद्र फडणवीस बुरा फंस गया है, कहने को तो उन्होंने महारष्ट्राय के महापालिका चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अपने सूटबूट वाले पीएम साहब ने भले से ये ऐलान कर दिया है कि मुंबई में मेयर बीजेपी को होगा लेकिन रास्ते फिलहाल हमवार नहीं दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि बड़ी खबर आ रही है कि ताज होटल में बंद शिंदे गुट के पार्षदों को रिहाई मिल गई है। लेकिन छुट्टी से पहले शिंदे सेना ने अपने पार्षदों के डाक्यूमेंट जमा कर लिए हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि आज कोकर्ण भवन में होने वाली बैठक में फिलहाल शिंदे गुट के पार्षद नहीं जाएंगे।
इस बीच एक बड़ा दावा सामने आया है कि कुछ पार्षद पहले ही अचानक गायब हो गए थे। जैसे ही ये खबर वायरल हुई है, हड़कंप मच गया है। एक ओर जहां बीजेपी अपने मेयर का चुनाव लॉटरी सिस्टम से कराने जा रही है तो वहीं उद्धव गुट ने मेयर चुनाव में मतदान न करने का फैसला ले सकता है। कहां से और कैसे ये खबर निकल कर आई है कि शिंदे गुट के होटल में बंद पार्षद अचानक गायब हो गए थे
बीएमसी रिजल्ट के बाद महराष्ट्र के राजनीतिक के नए चाणक्य देवेंद्र फडणवीस बुरा फंस गया है, कहने को तो उन्होंने महारष्ट्राय के महापालिका चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है लेकिन जिसे सपनों का शहर कहा जाता है यानि कि मुंबई कहा जाता है वहां पर गेम फंस गया है क्योंकि बीजेपी को यहां सिर्फ 89 सीटें ही मिली है और अब अगर बीजेपी को अपना मेयर चाहिए तो उनको एकनाथ शिंदे के साथ समझौता करना पड़ेगा। वैसे एकनाथ शिंदे की सीधी डिमांड सामने आ चुकी है कि ढाई-ढाई साल का मेयर दोनों पार्टियों का होना चाहिए। और यह बात भी पूरी तरह से तय है कि एकनाथ शिंदे किसी कीमत पर अपने इस फैसले से हटने वाले नहीं है, क्योंकि उन्होंने बीजेपी को बहुत करीब से देखा है, उनको इस बात की पूरी जानकरी है कि बीजेपी अचानक अपने वादे से यू टर्न ले लेती है।
इसलिए शिंदे ने पहले ढाई साल के लिए अपने मेयर का प्रस्ताव रखा है, ऐसे में पेंच फंसा हुआ है और बीजेपी और शिंदे गुट की ओर से दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस मसले को सुलझा लेंगे लेकिन दरअसल ये मामला जितना आसान लग रहा है, उतना है नहीं। क्योंकि अंदरखाने में काफी उठापटक चल रही है। एक ओर जहां शिंदे गुट के एक नेता गाली गलौच पर उतर आए हैं तो वहीं दूसरी ओर शिंदे के होटल ताज से पार्षदों को रिलीज तो कर दिया है लेकिन अभी भी पार्षदों पर पूरी निगाह बनाए हुए है।
मीडिया रिपोर्ट्स से जो खबरें सामने आई हैं उसमें बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों के मूल दस्तावेज अपने पास ही रखे हैं। इससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि पार्टी आगे की रणनीति को लेकर पूरी तरह सतर्क है और कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाना चाहती। इसी बीच बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे सभी शिवसेना नगरसेवकों को चेकआउट करने के निर्देश दिए गए। चौथे दिन आखिरकार सभी 29 शिवसेना पार्षदों को होटल से छुट्टी मिल गई। हालांकि कुछ दावे इस तरह के भी है पहले से ही कुछ पार्षद जा चुके है, अब क्यों गए थे, इस पर संस्पेंश हैं लेकिन ये बात भी सच है कि सभी पार्षद 17 जनवरी से ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स से से मिली जानकारी के मुताबिक, गुट गठन यानी ग्रुप फॉर्मेशन के लिए नवी मुंबई के बेलापुर जाने का जो कार्यक्रम तय था, उसे फिलहाल रद्द कर दिया गया है। इससे साफ है कि पार्टी अंदरखाने अपनी रणनीति पर दोबारा मंथन कर रही है।
शिवसेना की बदली हुई भूमिका के चलते राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. पार्टी के भीतर लगातार बैठकें चल रही हैं और आगे की चाल पर गंभीरता से चर्चा हो रही है। अब सभी की नजरें आज दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद शिवसेना की आगे की राजनीतिक दिशा और रणनीति साफ हो सकती है। फिलहाल पार्टी ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन आने वाले घंटों में बड़ा फैसला सामने आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में संजय राउत के खिलाफ जहां संजय निरुपम को अजीबो गरीब बयान आया है तो संजय राउत का भी बयान आया है।
ऐसे में यह बात बहुत हद तक साफ हो गई है कि बीएमसी का फैसला अब दिल्ली में होने जा रहा है लेकिन पेंच अभी फंसा हुआ है। एक ओर जहां दिल्ली में ढाई ढाई साल के मेयर पर फैसला होने जा रहा है तो दूसरी ओर सरकार ने आरक्षण को लेकर लाटरी सिस्टम की व्यवस्था कर दी गई है। लॉटरी सिस्टम किसी व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि किस वर्ग का मेयर होगा, यह तय करता है। बीएमसी (मुंबई) के लिए इसका क्या मतलब है? 22 जनवरी को लॉटरी निकलते ही तय होगा. जिस वर्ग से मेयर का चयन होगा, उसी वर्ग के निर्वाचित पार्षद मेयर पद के लिए पात्र हो जाएंगे। इसके बाद ही मेयर का चुनाव होगा, निगम में सत्ता गठन की कवायद शुरू होगी।
हालांकि इस मामले में सियासत भी तेज होने की संभावना भी है. राज्य के प्रमुख दल बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सभी की रणनीति आरक्षण पर टिकी है. यदि महिला, एससी, ओबीसी आरक्षण आया तो कई दावेदार अपने आप ही बाहर हो जाएंगे। बीएमसी में मेयर चुनाव की प्रक्रिया 22 जनवरी से शुरू हो रही है. पहले चरण के तहत गुरुवार को आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी। नगर विकास मंत्रालय सुबह 11 बजे से 29 महानगरपालिकाओं के मेयर पद का आरक्षण घोषित करेगा, इससे यह तय होगा कि मुंबई का मेयर जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी के साथ-साथ पुरुष या महिला किस वर्ग से होगा।
अगर लॉटरी के बाद मेयर पद जनरल (ओपन) हुआ तो बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा होगा. ऐसे में बीजेपी कहेगी कि हम सबसे बड़ी पार्टी हैं। जबकि शिंदे गुट की ओर से कहा जा रहा है कि मेयर पद के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला तय किया जाए. उद्धव ठाकरे गुट के बारे में कहा जा रहा है कि यह वोटिंग से दूरी बनाकर रखेगा और इस दौरान गैरहाजिर रह सकता है।
मेयर पद के लिए अगर महिला (ओपन या ओबीसी) तय हुआ तो दोनों प्रमुख दलों के सामान्य वर्ग के कई दावेदार बाहर हो जाएंगे। नई महिला का चेहरा सामने आ सकता है। मराठी महिला मेयर को लेकर महायुति सॉफ्ट इमेज बनाने की कोशिश करेगी। अब अगर मेयर पद ओबीसी के पास गया तो बीजेपी और शिंदे दोनों के पास विकल्प तो होंगे, लेकिन उम्मीदवार सीमित होंगे.
नाम को लेकर अंदरूनी खींचतान भी तेज हो सकती है। अगर मेयर का पद एससी या एसटी के कोटे में गया तो सबसे बड़ा ट्विस्ट यह होगा कि कई बड़े नेता रेस से बाहर हो जाएंगे और कम चर्चित चेहरों को मौका मिलेगा। विपक्ष के पास भी सामाजिक न्याय बनाम सत्ता गणित नैरेटिव रहेगा। हालांकि बीजेपी की पहली कोशिश होगी कि मेयर उनका ही बने, चाहे उसके लिए फिर से एक बार ऑपरेशन लोट्स की क्यों न चलाना पड़े। ऐसे में साफ है कि मुंबई को दिल्ली के इशारों पर चलाने की कोशिश की जा रही है। गुजरात को प्रोजेक्ट्स दिए जा रहे हैं और मुंबई को सिर्फ एक एटीएम मशीन समझा जा रहा है। शिंदे जी तो सिर्फ एक मुखौटा हैं, असली स्क्रिप्ट तो दिल्ली के दो लोग लिख रहे हैं।
हालांकि इस बात को ध्यान रखना चाहिए कि सिर्फ और सिर्फ आठ पार्षद ही पूरा गेम पलट सकते हैं और जिस तरह से उद्धव और राज ठाकरे एक्टिव हैं, उससे साफ है कि कुछ न कुछ पटवार हो सकता है, अब होगा क्या ये तो आने वाला समय बताएगा लेकिन फिलहाल सारी निगाह शिंदे के पार्षदों पर है। आज दिल्ली की बैठक फिर उसके बाद आरक्षण की लॉटरी, ये दोनों मिलकर बीएमसी के नए मेयर का भविष्य तय करने वाले हैं।



