पंजाब में फूटा पॉलिटिकल बम
निकाय नतीजों ने दिखाया 27 का ट्रेलर

- आप की बल्ले-बल्ले कांग्रेस की वापसी के संकेत
- बीजेपी नहीं तलाश सकी अपनी जमीन
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पंजाब निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जीत का परचम लहरा दिया है। आप ने बढिय़ा प्रदर्शन करते हुए 8 नगर निगमों में से 5 पर जीत हासिल की है। मोहाली, बरनाला, बटाला, मोगा, बठिंडा नगर निगम आप के खाते में गया है। कपूरथला पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है वहीं अबोहर बीजेपी का हो गया। पंजाब में 8 नगर निगमों 75 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों समेत कुल 104 स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ था। आम आदमी पार्टी के 958 उम्मीदवारों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस 397 वार्ड जीतकर दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है यह निकाय चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले काफी अहम माने जा रहे हैं इनके नतीजों का असर विधानसभा चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है। इस जीत से भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल गदगद नजर आए केजरीवाल और मान ने इसे काम की राजनीति की जीत बताया।
चुनाव निकाय के थे लेकिन संदेश विधानसभा चुनाव वाला
पंजाब ने एक बार फिर देश की राजनीति को चौंका दिया है। निकाय चुनाव थे लेकिन संदेश विधानसभा चुनाव वाला निकल आया। वार्ड छोटे थे लेकिन राजनीतिक संकेत बहुत बड़े निकले। वोटर सड़क नाली और स्ट्रीट लाइट के नाम पर मतदान करने निकला था मगर परिणामों ने 2027 की सत्ता की लड़ाई का ट्रेलर दिखा दिया। चुनावी नतीजों का सबसे बड़ा संदेश यह निकला कि पंजाब में अभी भी मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी का जलवा कायम है। विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था, नशा, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं के मुद्दे उठाता रहा लेकिन मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी को राजनीतिक ऑक्सीजन देने का काम किया। यह जीत सिर्फ सीटों की नहीं बल्कि नैरेटिव की जीत भी मानी जा रही है।
कांग्रेस ने दिखाई ताकत
पंजाब की राजनीति में कांग्रेस को लेकर उत्साह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। निकाय चुनावों ने यह साबित कर दिया है कि पार्टी का मूल वोट बैंक अब भी मौजूद है और अवसर मिलने पर वह एक मजबूत चुनौती खड़ी कर सकता है। कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत यह रही कि उसने खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में प्रस्तुत किया। कई क्षेत्रों में पार्टी ने सीधे आप को चुनौती दी और बीजेपी तथा अकाली दल को पीछे छोड़ा। कांग्रेस समर्थक मानते है कि राहुल गांधी की लगातार जनसभाएं सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता और संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिशों का असर धीरे-धीरे पंजाब में दिख रहा है। हालांकि कांग्रेस के सामने चुनौती कम नहीं है। उसे गुटबाजी नियंत्रित करनी होगी, मजबूत नेतृत्व सामने लाना होगा और सिर्फ AAP विरोध के बजाय वैकल्पिक विजन देना होगा। यदि पार्टी ऐसा कर पाती है, तो 2027 की लड़ाई को त्रिकोणीय से सीधा मुकाबला बना सकती है।
पंजाब में किसान आंदोलन का साया अब भी बरकरार
पंजाब में बीजेपी की सबसे बड़ी समस्या संगठन नहीं धारणा है। किसान आंदोलन खत्म हुए सालों गुजर चुके हैं लेकिन उसकी राजनीतिक गूंज अभी भी पंजाब के खेतों और गांवों में सुनाई देती है। यही वजह है कि भाजपा लगातार प्रयासों के बावजूद राज्य में वह स्वीकार्यता हासिल नहीं कर पा रही जिसकी उसे उम्मीद थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां हुईं केंद्रीय योजनाओं का प्रचार हुआ नए राजनीतिक सहयोगी भी जोड़े गए लेकिन निकाय चुनाव के नतीजे बताते हैं कि पंजाब का मतदाता अभी पूरी तरह बीजेपी के साथ सहज नहीं हुआ है। बीजेपी का वोट शेयर कुछ इलाकों में बढ़ा जरूर है लेकिन वह लहर नहीं बन पाया जिसकी पार्टी को आवश्यकता थी। शहरी क्षेत्रों में सीमित सफलता मिली लेकिन राज्यव्यापी प्रभाव दिखाई नहीं दिया। किसान आंदोलन के दौरान बने अविश्वास की दीवार अब भी पूरी तरह नहीं टूटी है।
कांग्रेस के प्रदर्शन को हल्के में नहीं लिया जा सकता
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी ऐसा प्रदर्शन किया है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। विधानसभा चुनाव के बाद जिस पार्टी को कई लोग राजनीतिक आईसीयू में मान रहे थे उसने निकाय चुनाव में खुद को मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया है। कांग्रेस भले सत्ता से दूर हो लेकिन वोटर के मन से दूर नहीं हुई है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। सबसे ज्यादा चिंता बीजेपी के लिए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, केंद्र सरकार की योजनाएं और नए सहयोगियों के साथ समीकरण बनाने के बावजूद पंजाब में भाजपा अभी भी वह राजनीतिक जमीन तैयार नहीं कर पाई है जिसकी उसे उम्मीद थी। किसान आंदोलन की स्मृतियां अभी भी पूरी तरह धुंधली नहीं हुई हैं। पंजाब का ग्रामीण और अर्धशहरी मतदाता अब भी बीजेपी को संदेह की नजर से देखता दिखाई देता है। अकाली दल की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। कभी पंजाब की राजनीति का केंद्र रहने वाली पार्टी अब खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की लड़ाई लड़ रही है। कई जगहों पर मुकाबला आप बनाम कांग्रेस बनता दिखाई दिया जबकि अकाली दल हाशिए पर खड़ा नजर आया।
सरकार को बनाते या गिराते नहीं है नतीजे
निकाय चुनावों के ये नतीजे किसी सरकार को बनाते या गिराते नहीं हैं लेकिन राजनीतिक मनोविज्ञान जरूर बदल देते हैं। यही कारण है कि इन चुनावों के बाद सबसे ज्यादा राहत सीएम भगवंत मान को मिली है सबसे ज्यादा उम्मीद कांग्रेस को मिली है और सबसे ज्यादा चिंता बीजेपी तथा अकाली दल के खेमे में दिखाई दे रही है। 2027 अभी दूर है लेकिन पंजाब ने संकेत दे दिया है कि अगली लड़ाई सिर्फ नारों की नहीं भरोसे की होगी। और फिलहाल इस भरोसे की दौड़ में आप आगे है और कांग्रेस पीछा करती हुई दिखायी दे रही है।




