गुजरात बजट पर सियासी बवाल, चैतर वसावा का BJP पर तीखा हमला
चैतर वसावा ने भाजपा सरकार के बजट पर सवाल उठाते हुए आदिवासी वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया... गुजरात बजट को लेकर राहत...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात सरकार ने शुक्रवार को वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया.. वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने विधानसभा में बजट भाषण पढ़ा.. जिसमें कुल आवंटन 4 लाख 8 हजार 53 करोड़ रुपये का है.. सरकार ने इसे विकास-केंद्रित और विकसित गुजरात का रोडमैप बताया है.. लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बजट को जनविरोधी. और चुनाव-केंद्रित करार दिया है.. विपक्ष का कहना है कि बजट में आम लोगों, किसानों, युवाओं, महिलाओं.. और पिछड़े वर्गों की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है..
बजट में आदिवासी विकास के लिए 35,780 करोड़.. स्वास्थ्य के लिए 25,403 करोड़.. और महिला एवं बाल विकास के लिए 7,690 करोड़ का प्रावधान किया गया है.. लेकिन विपक्ष ने कहा कि यह सिर्फ कागजी है.. और पिछले वर्षों की तरह इसका उपयोग नहीं होगा.. विपक्ष ने किसानों की कर्ज माफी, युवाओं को स्थायी रोजगार, कॉन्ट्रैक्ट-फिक्स पे का अंत.. 500 रुपये में गैस सिलेंडर, ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस), एससी/एसटी/ओबीसी को जनसंख्या के अनुसार बजट, विधवा महिलाओं और लाड़ली बहन योजना जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है..
आपको बता दें कि बजट पेश होने के बाद विधानसभा परिसर में विपक्षी विधायकों ने प्रदर्शन किया.. और कहा कि यह बजट जनहित का नहीं, चुनावी है.. गुजरात में यह विवाद सियासी हलचल तेज कर रहा है.. क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं.. गुजरात सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 8 हजार 53 करोड़ रुपये का बजट पेश किया.. यह पिछले साल के बजट से 15 फीसदी ज्यादा है.. सरकार ने इसे विकसित गुजरात की दिशा में एक कदम बताया.. बजट में मुख्य फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और ग्रामीण विकास पर है.. वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने कहा कि यह बजट गुजरात को 2047 तक विकसित राज्य बनाने का रोडमैप है.. बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है.. और विकास व्यय पर जोर है.. और कुल बजट का 70 फीसदी विकास पर खर्च होगा..
लेकिन विपक्ष ने कहा कि यह सिर्फ घोषणाएं हैं.. जमीन पर अमल नहीं होता.. सरकार ने बजट को संतुलित बताया.. और कहा कि राज्य की जीडीपी 7 फीसदी बढ़ेगी.. लेकिन कांग्रेस ने कहा कि बजट में महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज जैसे मुद्दों पर कुछ नहीं है.. बजट में आदिवासी विकास के लिए 35,780 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.. सरकार ने कहा कि अगले 5 सालों में आदिवासी क्षेत्रों में 2 लाख करोड़ का निवेश होगा.. इसमें 5 नए जीआईडीसी, 15 भगवान बिरसा मुंडा लाइब्रेरी.. और आदिवासी जिलों में इंटीग्रेटेड गांव विकास कार्यक्रम शामिल हैं.. स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए भी फंड है.. जिससे आदिवासी क्षेत्रों में नए अस्पताल और स्कूल खोले जाएंगे..
लेकिन विपक्ष ने कहा कि हर साल घोषित बजट का उपयोग नहीं होता.. कांग्रेस के अमित चावड़ा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों में कमरे और शिक्षकों की कमी है.. लेकिन बजट में इसका कोई समाधान नहीं.. आप के चैतर वसावा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं.. कोई एमआरआई, सीटी स्कैन या एक्स-रे मशीन नहीं है.. बजट में इनके लिए कोई स्पष्ट घोषणा नहीं है.. विपक्ष ने कहा कि 5,425 करोड़ का प्रावधान सिर्फ कागजी है.. क्योंकि पिछले वर्षों में भी फंड लैप्स हो गया..
सरकार ने कहा कि आदिवासी विकास के लिए वनबंधु कल्याण योजना में बढ़ोतरी की गई है.. लेकिन विपक्ष ने इसे नाकाफी बताया.. गुजरात में आदिवासी आबादी 14.8 फीसदी है.. और वे सूखा, कुपोषण और शिक्षा की कमी से जूझ रहे हैं.. विपक्ष ने कहा कि बजट में आदिवासी कुपोषण दूर करने का कोई प्लान नहीं है.. वहीं स्वास्थ्य विभाग के लिए बजट में 25,403 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.. इसमें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 3,472 करोड़.. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 8,641 करोड़.. और आयुष्मान भारत के लिए 2,000 करोड़ शामिल हैं.. सरकार ने कहा कि इससे 121 नए श्रमिक अन्नपूर्णा केंद्र और 50 नए धन्वंतरी आरोग्य रथ शुरू होंगे..
लेकिन विपक्ष ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं.. कांग्रेस ने कहा कि आदिवासी इलाकों में कोई एमआरआई, सीटी स्कैन या एक्स-रे मशीन नहीं है.. बजट में इनके लिए कोई प्रावधान नहीं है.. आप ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों को 4 महीने से वेतन नहीं मिला है.. लेकिन बजट में इसका जिक्र नहीं है.. विपक्ष ने कहा कि बजट में कुपोषण दूर करने का कोई ठोस प्लान नहीं है.. गुजरात में कुपोषण दर 39.7 फीसदी है.. जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है..
सरकार ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य पर 15 फीसदी बढ़ोतरी है.. लेकिन विपक्ष ने इसे कागजी बताया.. महिला एवं बाल विकास के लिए बजट में 7,690 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.. इसमें नामो लक्ष्मी योजना के लिए 1,250 करोड़, नामो सरस्वती योजना, लाखपति दीदी योजना के लिए 47 करोड़.. एसएचजी के लिए 45 करोड़.. और विधवा सहायता के लिए 2,848 करोड़ शामिल हैं.. सरकार ने कहा कि इससे महिलाओं को सशक्त बनाया जाएगा..
लेकिन विपक्ष ने कहा कि कुपोषण कैसे दूर होगा.. इस पर सरकार ने कुछ नहीं कहा.. कांग्रेस ने कहा कि गुजरात में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की दर ऊंची है.. लेकिन बजट में कोई योजना नहीं है.. आप ने कहा कि अन्य राज्यों की तरह विधवा.. और लाड़ली बहन योजना में मासिक सहायता होनी चाहिए.. लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं है.. विपक्ष ने कहा कि महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं.. लेकिन राहत नहीं है.. गुजरात में महिलाओं की साक्षरता और रोजगार दर कम है.. विपक्ष ने कहा कि बजट में इसका समाधान नहीं है..
विपक्ष ने कहा कि पंजाब की तरह गुजरात के किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली दी जाए.. लेकिन बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं है.. कांग्रेस ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली महंगी पड़ रही है.. आप ने कहा कि बजट में कृषि के लिए 3,043 करोड़ सिंचाई के लिए है.. लेकिन मुफ्त बिजली नहीं है.. भाजपा ने कहा कि किसानों के लिए बिजली सब्सिडी पहले से है.. लेकिन विपक्ष ने इसे नाकाफी बताया.. गुजरात में किसान बिजली की कमी से परेशान हैं..



