बंगाल में अजय पाल की तैनाती पर सियासी घमासान, अखिलेश बोले-भाजपा के एजेंट काम कर रहे हैं

चुनाव आयोग द्वारा दक्षिण 24 परगना में 'मुठभेड़ विशेषज्ञ' अजय पाल शर्मा को पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: चुनाव आयोग द्वारा दक्षिण 24 परगना में ‘मुठभेड़ विशेषज्ञ’ अजय पाल शर्मा को पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है. उनकी तैनाती पर अखिलेश यादव और TMC ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कई सवाल खड़े किए हैं.

चुनाव आयोग ने 24 परगना के चुनावी मैदान में बड़ा उलटफेर किया है. सिर्फ केंद्रीय बलों को ही नहीं, इस बार योगी सरकार के एक तथाकथित ‘मुठभेड़ विशेषज्ञ’ और विवादों में घिरे रहने वाले IPS अधिकारी अजय पाल को चुनाव के ऑब्जर्वर के तौर पर तैनात किया है.

अजय पाल शर्मा पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले दक्षिण 24 परगना में पुलिस ऑब्जर्वर बने हैं. उत्तर प्रदेश के पुलिस हलकों में इन्हें ‘सिंघम’ के नाम से जाना जाता है और इन्हें योगी का वफादार कहा जाता है. चुनाव के समय उनकी तैनात कई सवाल उठा रही है.

उनकी तैनाती पर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऑब्जर्वर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं. दीदी हैं, दीदी रहेंगी!”

अखिलेश ने आगे कहा, “सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जांच होगी और बेहद सख़्त दंडात्मक कार्रवाई भी. ये सब अधिकारी के रूप में अनरजिस्टर्ड लोगों के अनरजिस्टर्ड अंडरग्राउंड सदस्य हैं. हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे. ये खोज के लाए जाएंगे, खोद के लाए जाएंगे और अपने कुकृत्यों के लिए क़ानूनी सज़ा भी पाएंगे.” उन्होंने आखिर में लिखा कि लोकतंत्र के अपराधी बख़्शे नहीं जाएंगे!.

TMC ने अजय पाल पर उठाए सवाल

TMC ने अजय पाल की तैनाती पर सवाल खड़े करते हुए एक्स पर लिखा, “उत्तर प्रदेश के बदनाम सिंघम और योगी आदित्यनाथ के पसंदीदा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, अजय पाल को चुनाव आयोग ने साउथ 24 परगना के लिए पुलिस ऑब्ज़र्वर नियुक्त किया है. यह वही ऑफिसर है जो अपने ट्रिगर-हैप्पी ठोक दो एटीट्यूड के लिए बदनाम है. उसका ट्रैक रिकॉर्ड और भी खराब है.” बता दें, अजय पाल ने कई ऐसे एंकाउंटर किए है, जिनको फर्जी और सरकार को खुश करने के लिए किया गया बताया गया है. योगी सरकार ने उन्हें SP के तौर पर रामपुर भेजा था, जहां उन्होंने सपा नेता आजम खां के खिलाफ कई कदम उठाए.

अजय पाल का खराब है ट्रैक रिक्रॉर्ड

जनवरी 2020 में अजय पाल को रामपुर से उन्नाव के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रांसफर कर दिया गया, जब एक रिपोर्ट में उनका और पांच दूसरे IPS अधिकारियों का नाम कैश-फॉर-पोस्टिंग स्कैंडल में आया. BJP सरकार को एक SIT बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसने उनके खिलाफ निगरानी पर रोक लगाने की सिफारिश की. उन पर क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट, सबूत गायब करने और क्रिमिनल साज़िश के लिए भी केस दर्ज किया गया था. FIR एक 30 साल की महिला की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसने आरोप लगाया था कि अजय पाल ने उससे शादी की, दूसरी महिलाओं के साथ अपने संबंध छिपाए और बाद में जब वह अपनी शिकायतें लेकर DGP और सीनियर अधिकारियों के पास गई तो उसे फंसाया.

TMC ने कहा है कि इस तरह के ‘इम्प्रैशियल’ पुलिस ऑब्जर्वर को इलेक्शन कमीशन बंगाल के लिए चुन रहा है. जाहिर है, करप्ट और क्रिमिनल ट्रैक रिकॉर्ड अब इस नौकरी के लिए पहली क्वालिफिकेशन बन गया है.

Related Articles

Back to top button