पूछा सवाल तो जवाब में पत्रकार को मिली धमकी

उन्नाव के पुरवा विधानसभा में पत्रकार बनाम विधायक विवाद ने खड़े किए बड़े सवाल, आखिर जनप्रतिनिधि जवाबदेही से क्यों घबराते हैं?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोकतंत्र में नेता जनता के बीच जाकर बड़े-बड़े वादे करते हैं। मंचों से विकास की गंगा बहाने के दावे किए जाते हैं। चुनावी सभाओं में सपनों के पुल बांधे जाते हैं। जनता भरोसा करती है वोट देती है नेता विधायक बनता है विधायक मंत्री बनने का सपना देखता है और सत्ता की सीढिय़ां चढ़ता चला जाता है। लेकिन असली परीक्षा तब शुरू होती है जब कोई पत्रकार इन वादों का हिसाब मांगता है।
जब कोई सवाल करता है कि पांच साल में क्षेत्र को क्या मिला? कितनी सडक़ें बनीं? कितने अस्पताल खुले? कितने युवाओं को रोजगार मिला? तब विधायक जी के चेहरे का रंग बदल जाता है और वह अनाप शनाप बोलने लगते हैं। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की पुरवा विधानसभा से सामने आया विवाद भी कुछ ऐसे ही सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि क्षेत्र के विधायक अनिल सिंह एक पत्रकार के सवालों से इतने असहज हो गए कि मामला सार्वजनिक नाराजगी और कथित धमकी तक पहुंच गया। यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक विधायक और एक पत्रकार के बीच का टकराव नहीं है। यह लोकतंत्र की उस बुनियाद सवाल है जिसके सहारे जनता अपने प्रतिनिधियों से जवाब मांगती है। मामले के केंद्र में हैं जिले के वरिष्ठ पत्रकार रंजन बाजपेई। उनका आरोप है कि क्षेत्र की समस्याओं और राजनीतिक हालात को लेकर किए गए एक कार्यक्रम के बाद विधायक अनिल सिंह उनसे नाराज हो गए। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में विपक्षी नेता से क्षेत्र की बदहाल सडक़ों, अधूरे विकास कार्यों, स्थानीय समस्याओं और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल पूछे गए थे। इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हुई और इसके बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया। रंजन बाजपेई का कहना है कि अब यह व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है। उनके मुताबिक यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पत्रकारिता की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रश्न बन चुका है। उनका तर्क है कि यदि पत्रकार विपक्षी नेता से सवाल पूछे या उसकी बात जनता तक पहुंचाए और इसके लिए उसे निशाना बनाया जाए तो फिर लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका का क्या अर्थ रह जाएगा? वहीं जिलाअध्यक्ष से बात की तो उन्होंने कहा कि वह कही बैठे हैं मीटिंग में बात में बात करेंगे।

जवाबदेही पर आधारित है पूरा ढांचा

दरअसल लोकतंत्र का पूरा ढांचा ही जवाबदेही पर टिका हुआ है। जनता प्रतिनिधि चुनती है और बदले में उनसे जवाब चाहती है। पत्रकार इसी जवाबदेही की कड़ी होता है। उसका काम सत्ता पक्ष की तारीफ करना नहीं बल्कि सवाल पूछना है। वह सरकार से भी सवाल करता है और विपक्ष से भी। यदि पत्रकार केवल सत्ता की बात दिखाए और विपक्ष की आवाज दबा दी जाए, तो लोकतंत्र एकतरफा संवाद बनकर रह जाएगा। इसी वजह से पुरवा का यह विवाद स्थानीय सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक बहस का विषय बन गया है। क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर एक जनप्रतिनिधि विपक्षी नेता के इंटरव्यू से इतना असहज क्यों हो सकता है? यदि विकास कार्य हुए हैं तो सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जा सकता है। यदि दावे सही हैं तो आलोचना का जवाब उपलब्धियों से दिया जा सकता है। लेकिन यदि सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा किया जाने लगे तो यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती।

दल-बदल पर टिका है एमएलए अनिल सिंह का राजनीतिक कैरियर

अनिल सिंह का राजनीतिक सफर भी चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2017 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। उस समय उन्होंने खुद को जनता के बीच रहने वाले सरल नेता के रूप में प्रस्तुत किया था। बाद में 22 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और वे दोबारा विधायक बनने में सफल रहे। यह जीत उनके राजनीतिक कद को और मजबूत करने वाली साबित हुई। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सत्ता और प्रभाव बढऩे के साथ उनकी राजनीतिक शैली भी बदल गई। विरोधियों का दावा है कि अब आलोचना को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानने के बजाय उसे व्यक्तिगत चुनौती समझा जाने लगा है। यही कारण है कि पत्रकारों को लेकर भी असहजता सामने आ रही है।

मारे गए भारतीयों को लेकर अमेरिका पर भडक़ा ईरान

ट्रंप को लिया आड़े हाथों, बोला- इंडिया के साथ गहरी संवेदनाएं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और पब्लिक डिप्लोमेसी सेंटर के प्रमुख इस्माइल बक़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भारतीय नाविकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ईरान मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों और उनके दोस्तों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करता है और भारत की जनता और भारत सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।
इस्माइल बक़ाई ने बयान में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये हमले अमेरिका की कथित हथियारबंद लूट और सरकारी समुद्री डकैती की जारी नीति का स्पष्ट उदाहरण हैं. उनके अनुसार, इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं. इस्माइल बक़ाई ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका के कथित गैर-कानूनी व्यवहार के लिए उसे जवाबदेह ठहराना चाहिए. उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियां ग्लोबल शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं और समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही को भी प्रभावित करती हैं।
ओमान के तट के पास जिस कॉर्मशियल पोत पर अमेरिकी हमले का दावा किया गया, उसमें कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। जहाज पर मौजूद 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय लापता बताए गए थे। बाद में लापता लोगों में से दो के शव बरामद कर लिए गए. अभी तक लापता चीफ इंजीनियर पटानाला सुरेश का कोई पता नहीं चल पाया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जीवित मिलने की उम्मीद अब बहुत कम बताई जा रही है.इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.विदेश मंत्रालय, भारत ने इस हमले की निंदा करते हुए नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को एक औपचारिक विरोध पत्र भेजा है।

पीएम मोदी के पास उत्सवों का समय है, निंदा का नहीं : ओवैसी

हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पास समारोहों में शामिल होने के लिए तो समय है, लेकिन अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीयों की मौत की निंदा करने का समय नहीं है। ओवैसी ने दावा किया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नागरिकों और नाविकों की जान की रक्षा करने में बार-बार विफल साबित हो रही है। ओवैसी ने दावा किया कि केंद्र सरकार भारतीय नाविकों और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम करने वालों की जान की रक्षा करने में बार-बार ‘‘विफल’’ रही है। ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीयों की जान बचाना सरकार का पहला कर्तव्य है। यह दुखद और व्यथित करने वाला है कि प्रधानमंत्री के पास समारोहों के लिए समय है लेकिन भारतीयों की जान लेने के लिए अमेरिकी सेना की निंदा करने का समय नहीं है।’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत के इतिहास में कभी इससे कमजोर सरकार रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस अब भी भारतीयों को सैनिकों के रूप में भर्ती कर रहा है ‘‘जो मारे जा रहे हैं’’ लेकिन सरकार असहाय है।

पांच मंजिला इमारत में भीषण आग, तीन लोगों की दर्दनाक मौत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहाँ शुक्रवार तडक़े एक पांच मंजिला आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गोविंदपुरी थाने को तडक़े करीब रात 2:24 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। यह हादसा तुगलकाबाद एक्सटेंशन स्थित एक रिहायशी इमारत में हुआ। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्वी) हेमंत तिवारी ने बताया, इमारत में घना धुआं भर जाने के कारण कई निवासी अंदर फंस गए थे जिसके बाद समन्वित बचाव अभियान चलाया गया। इमारत से आठ लोगों को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल और एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।

’’ पुलिस ने बताया कि मृतकों में 22 वर्षीय युवक और दो महिलाएं शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि दो घायल लोगों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार हो रहा है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि आग इमारत की भूतल पर बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है।

मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम झटका

शीर्ष कोर्ट ने कहा- नामांकन खारिज होने के बाद यह मामला सुना तो नई परंपरा शुरू होगी
चुनाव परिणाम आने के बाद असंतुष्ट उम्मीदवार हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द होने को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि अगर उनकी याचिका सुनी जाती है तो यह अनुच्छेद 329 के परे होगा। इससे एक नई परंपरा शुरू होगी कि नामांकन खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई कर सकता है।
संविधान के अनुच्छेद 329 में यह व्यवस्था है कि चुनावी मामलों में कोर्ट अंतरिम चरण में हस्तक्षेप नहीं करता। इसी अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद असंतुष्ट उम्मीदवार हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। संविधान में इकलौती व्यवस्था दी गई है कि हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की जाए। मीनाक्षी नजराजन ने बुधवार (1० जून, 26) को देर रात याचिका दाखिल करके नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के विचार योग्य होने पर सवाल उठाए, लेकिन मीनाक्षी नटराजन की अपील पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार हो गया. उन्होंने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए जाने पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने यह अपील स्वीकार नहीं की।

कर्नाटक में कांग्रेस 4 में से 3 सीटों पर जीती

राज्यसभा चुनाव में मल्लिकार्जुन खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान समेत चार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक बार फिर राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा और मंसूर अली खान भी राज्यसभा पहुंचे हैं। सभी चार उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा की गई थी क्योंकि मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है. इनमें भाजपा के इरन्ना कडाडी और नारायण कोरगप्पा, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और जेडी(एस) के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा शामिल हैं। शुरुआत में इन चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था. चुनाव 18 जून को होना था और कर्नाटक विधानसभा के सदस्य विधान सौधा में मतदान करने वाले थे. लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन खारिज कर दिया गया. अधिकारियों के अनुसार गुरुवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद केवल चार उम्मीदवार ही मैदान में बचे. इसके बाद सभी चारों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

मध्य प्रदेश में भाजपा ने जीतीं तीनों राज्यसभा सीटें

वहीं मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की तीनों सीटें निर्विरोध जीत ली हैं. गुरुवार को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को विजयी घोषित कर दिया गया. निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने तीनों भाजपा उम्मीदवारों को चुनाव प्रमाण पत्र सौंपे. चूंकि मैदान में कोई अन्य उम्मीदवार नहीं बचा था, इसलिए तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।

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