चैतर वसावा की सजा पर सियासी घमासान, AAP ने बीजेपी पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा को कोर्ट से सजा मिलने के बाद गुजरात की राजनीति गरमा गई है... AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है.. आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा को नर्मदा जिले की अदालत ने 7 साल की जेल की सजा सुना दी है.. वहीं इस फैसले के बाद से पूरे राज्य में चर्चा का बाजार गर्म है.. आम आदमी पार्टी इस मामले को राजनीतिक साजिश बता रही है.. और बीजेपी पर लगातार हमले कर रही है.. पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चैतर वसावा के समर्थन में पदयात्राएं निकालनी शुरू कर दी हैं.. यह घटना गुजरात की सियासी हलचल को नई दिशा दे रही है.. आपको बता दें कि चैतर वसावा डेडियापाडा विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं.. वे आदिवासी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं.. 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत ने गुजरात में AAP को आदिवासी इलाकों में मजबूत आधार दिया था.. वे आदिवासी लोगों के अधिकारों, जमीन के मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को लेकर हमेशा सक्रिय रहते हैं..

23 जून 2026 को नर्मदा जिले के राजपीला की अतिरिक्त सत्र अदालत ने यह फैसला सुनाया.. चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा.. और सात अन्य लोगों को 7 साल की जेल और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई.. अदालत ने उन्हें वन विभाग के अधिकारियों पर हमला करने.. धमकी देने और जबरन वसूली के मामले में दोषी पाया.. अब चैतर वसावा की विधायक सदस्यता भी खत्म हो गई है..

बता दें कि यह घटना अक्टूबर 2023 की है.. डेडियापाडा में वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर अवैध खेती करने वाली फसलों को हटाया था.. इसके बाद विवाद खड़ा हो गया.. आरोप है कि चैतर वसावा ने इन अधिकारियों को अपने घर बुलाया.. वहां गर्मागर्मी हुई.. आरोपियों ने अधिकारियों को गाली-गलौज की, मारपीट की और मुआवजे की मांग की.. चैतर वसावा पर हवा में गोली चलाने का भी आरोप है.. वन कर्मचारियों ने 2 नवंबर 2023 को डेडियापाडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.. इसमें मारपीट, धमकी, दंगा और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गईं.. मामले की जांच हुई और आरोपियों पर केस चला.. अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला दिया..

आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को पूरी तरह फर्जी और राजनीतिक साजिश बताती है.. पार्टी का कहना है कि चैतर वसावा आदिवासी किसानों के हक के लिए लड़ रहे थे.. वन विभाग की कार्रवाई से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थी.. चैतर भाई ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की थी.. लेकिन बीजेपी ने उन्हें परेशान करने के लिए यह केस बनाया.. AAP गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदन गढ़वी ने कहा कि.. यह फैसला राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया है.. चैतर वसावा बीजेपी में शामिल होने से मना कर चुके थे.. और आदिवासी इलाकों में पार्टी की लोकप्रियता बढ़ रही थी.. इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया..

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी वीडियो मैसेज में चैतर वसावा का समर्थन किया.. उन्होंने कहा कि चैतर भाई आदिवासी समाज की सच्ची आवाज हैं.. उनकी बढ़ती लोकप्रियता से बीजेपी घबरा गई है.. इसलिए झूठा केस लगाकर उन्हें जेल भेजने की साजिश रची गई.. केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में दबाव और गुंडागर्दी से काम नहीं चलता.. जितना दबाने की कोशिश होगी.. चैतर वसावा उतने ही बड़े नेता बनकर उभरेंगे..

इस सजा के बाद चैतर वसावा की विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई है.. गुजरात विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पूर्णेश मोदी ने कहा कि दो साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर विधायक स्वत अयोग्य हो जाता है.. AAP के पास पहले 5 विधायक थे, अब 4 रह गए हैं.. पार्टी इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देगी और राहत की उम्मीद जताई है..

वहीं फैसले के बाद AAP ने पूरे गुजरात में चैतर वसावा के समर्थन में आंदोलन शुरू कर दिया है.. पार्टी के राष्ट्रीय नेता गोपाल राय ने कहा कि.. 26 जून से राज्य भर के सभी जिलों में मार्च और पदयात्राएं निकाली जाएंगी.. अहमदाबाद समेत कई जगहों पर कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए.. पदयात्राओं में पार्टी के स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं..

जानकारी के मुताबिक इन पदयात्राओं का मकसद न सिर्फ समर्थन जुटाना है.. बल्कि आदिवासी इलाकों में पार्टी की मजबूती दिखाना भी है.. यह घटना गुजरात की राजनीति को काफी प्रभावित कर रही है.. AAP ने हाल ही में स्थानीय निकाय चुनावों में नर्मदा जिले की जिला पंचायत बीजेपी से छीन ली थी.. और कई तालुका पंचायतों में अच्छा प्रदर्शन किया था.. चैतर वसावा आदिवासी बेल्ट में पार्टी के चेहरे बने हुए थे.. उनकी सजा AAP के लिए झटका है.. लेकिन पार्टी इसे मुद्दा बनाकर फायदा उठाने की कोशिश कर रही है..

बीजेपी की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया ज्यादा नहीं आई है.. लेकिन सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि.. अदालत का फैसला सबके लिए बाध्यकारी है.. और कानून अपना काम कर रहा है.. कुछ बीजेपी नेता चैतर वसावा पर पुराने आरोपों का जिक्र कर रहे हैं.. चैतर वसावा गुजरात के आदिवासी क्षेत्र के प्रभावशाली नेता हैं.. वे लंबे समय से आदिवासी अधिकारों, वन अधिकार कानून.. और स्थानीय विकास के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं.. 2022 के चुनाव में AAP टिकट पर जीतकर उन्होंने पार्टी को गुजरात में नई पहचान दी.. उनकी पत्नी शकुंतला भी राजनीति में सक्रिय हैं.. और नर्मदा जिला पंचायत से जुड़ी रही..

वहीं उनकी लोकप्रियता का कारण यह है कि वे मैदान स्तर पर काम करते हैं.. आदिवासी किसानों की समस्याएं, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को लेकर वे लगातार संघर्ष करते हैं.. यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी.. और सजा पर आदिवासी समुदाय में नाराजगी है.. भारतीय राजनीति में पदयात्रा एक पुराना और प्रभावी तरीका है.. गांधीजी से लेकर कई नेताओं ने इसका इस्तेमाल जनता से जुड़ने के लिए किया है.. AAP की ये पदयात्राएं न सिर्फ चैतर वसावा के समर्थन में हैं.. बल्कि पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है..

 

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