बंगाल में अब भी नहीं थम रहा सियासी बवाल

चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रत बनर्जी से मांगा जवाब

  • तृणमूल कांग्रेस में और बढ़ा सियासी घमासान
  • चुनाव चिन्ह और संगठन पर दावे को लेकर रार
  • सौगत रॉय ने बागी गुट पर उठाए सवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए दो महीने होने को है। सरकार को बने भी लगभग इतना समय हो गया पर वहां पर सियासी बवाल जारी है। सबसे ज्याद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में घमासान मचा है। पहले जहां पार्टी में बगावत से ममता बनर्जी जूझ रही हैं अब चुनाव आयोग ने जवाब मांग कर उन्हे दोहरा घाव दे दिया है। हालांकि आयोग ने दूसरे गुट का भी तलब किया है। नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।
पार्टी के भीतर बढ़ते टकराव के बीच भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने ममता बनर्जी और ऋ तब्रत बनर्जी, दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर किए गए दावों पर जवाब मांगा है। आयोग ने दोनों गुटों को 6 जुलाई, शाम 5.30 बजे तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम पार्टी के भीतर गहराते राजनीतिक संकट के बीच उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, ऋ तब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संगठन और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार जता रहा है। इसी दावे को लेकर दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के सामने अलग-अलग दावे पेश किए हैं। अब आयोग दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगा। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने चुनाव आयोग की ओर से अलग गुट से बातचीत किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऋ तब्रत बनर्जी को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। ऐसे में उन्हें पार्टी का प्रतिनिधित्व करने या आयोग के सामने अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग ने इस गुट को अलग से मिलने की अनुमति क्यों दी।

यह कोई अधिकृत गुट नहीं : सागरिका घोष

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी बागी गुट को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी अधिकृत संगठन का हिस्सा नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग के नियम साफ कहते हैं कि केवल पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि या नामित हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि निष्कासित नेता के नेतृत्व वाला समूह पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।ज्ज्

ऋ तब्रत बनर्जी ने आयोग के सामने रखा पक्ष

प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि 22 जून को आयोजित विशेष बैठक के बाद उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज आयोग को सौंप दिए थे और पूर्ण पीठ से मिलने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और आगे संपर्क करने का भरोसा दिया।

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