प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना: युवाओं को 12 माह का अनुभव और रू5,000 मासिक सहायता
जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने ढोल-नगाड़ों के साथ ऐलान किया था कि युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना चलाई जाएगी। इसके जरिए 5 साल में 1 करोड़ युवाओं को टॉप कंपनियों में ट्रेनिंग मिलेगी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने ढोल-नगाड़ों के साथ ऐलान किया था कि युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना चलाई जाएगी। इसके जरिए 5 साल में 1 करोड़ युवाओं को टॉप कंपनियों में ट्रेनिंग मिलेगी।
युवाओं को लगा कि शायद अब किस्मत बदलेगी लेकिन अब जो सच सामने आया है वो चौंका देने वाला है। मोदी सरकार के स्किल इंडिया के दावों की हवा निकाल निकल गई है। जिस योजना के लिए 11,000 करोड़ से ज्यादा का बजट रखा गया, वहां सरकार ने सिर्फ 4 प्रतिशत पैसा खर्च किया। यानी खजाना भरा पड़ा है, पर युवाओं तक पहुँचा ही नहीं।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना भारत सरकार के कॉर्पाेरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है, जिसका लक्ष्य 21-24 साल के एक करोड़ युवाओं को 12 महीने की इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना है, जिससे शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई पटे और उनकी रोजगार क्षमता बढ़े; यह योजना युवाओं को रू5,000 मासिक वित्तीय सहायता भी देती है, इसमें 45 सौ रुपए सरकार की ओर से और 500 रुपए कंपनी की ओर से दिए जाते हैं। और उन्हें टॉप कंपनियों में वास्तविक कार्य अनुभव दिलाकर रोज़गार के अवसर प्रदान करती है। योजना का मकसद युवाओं को हकीकत में व्यावसायिक माहौल का अनुभव कराना और उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार कौशल विकसित करना है। योजना में युवाओं को 12 महीने की इंटर्नशिप के दौरान वास्तविक कार्यस्थल पर काम करने का मौका मिलता है, जिससे उन्हें काम करने का अनुभव मिलता है। छात्र सीधे बड़ी कंपनियों में अपने क्षेत्र के नवीनतम कौशल और तकनीकों को सीखते हैं। कुल मिलाकर ये प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना युवाओं को एक 21 से 24 साल के युवाओं को सीधे रोजागार से जोड़ने का प्रयास है लेकिन जमीन पर इसकी हकीकत बहुत ही अजब है।
हिंदू बिजनेस लाइन की रिपोर्ट और कंट्रोलर जनरल ऑफ एकाउंट्स के आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि मंत्रालय ने युवाओं के भविष्य के साथ मजाक किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों (अप्रैल-नवंबर) में कॉर्पाेरेट कार्य मंत्रालय को 11,500 करोड़ रुपये का बजट मिला। इस बजट का 94 प्रतिशत हिस्सा यानी 10,800 करोड़ रुपये अकेले इंटर्नशिप योजना के लिए था। लेकिन खर्च सिर्फ 500 करोड रुपए हुआ है़! यह कुल बजट का महज 4 प्रतिशत है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जहां देश का युवा बेरोजगारी से बेहाल है, वहां सरकार पैसा अपनी जेब में दबाकर बैठी है। आखिर क्यों यह पैसा खर्च नहीं हो पाया? क्या सरकार के पास कोई विजन नहीं था, या सिर्फ हेडलाइन बनाने के लिए यह योजना लाई गई थी?
यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। सरकार की यह पुरानी आदत बन गई है। पिछले साल यानी 2025 में भी यही कहानी दोहराई गई थी। पहले बजट 2,667 करोड़ दिया गया, फिर उसे घटाकर 1,078 करोड़ कर दिया गया। और आखिर में खर्च कितना हुआ? सिर्फ 680 करोड़ रुपए। संसदीय समिति के सामने मंत्रालय ने खुद कबूल किया कि इंटर्नशिप योजना में कोई काम नहीं हुआ, इसलिए पैसा वापस करना पड़ा। सवाल यह है कि जब आप काम ही नहीं करना चाहते, तो बजट का नाटक क्यों करते हैं?
सरकार का दावा है कि युवा इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे। 15 दिसंबर 2025 को वित्त मंत्री ने संसद में बताया कि कंपनियों ने 82,000 ऑफर दिए, लेकिन सिर्फ 28,000 युवाओं ने स्वीकार किए। यानी 100 में से 70 युवाओं ने इस योजना को लात मार दी। लेकिन सवाल है कि युवाओं ने ऐसा क्यों किया। जवाब बहुत सीधा है। आज की कमरतोड़ महंगाई में सरकार एक ग्रेजुएट युवा को इंटर्नशिप के नाम पर क्या दे रही है? महीने के सिर्फ 5000 रुपये! आज के दौर में 5000 रुपये में क्या होता है? एक छात्र का किराए का कमरा और दो वक्त की रोटी भी इस पैसे में नहीं आती। राहुल गांधी ने अपने घोषणापत्र में पहली नौकरी पक्की योजना के तहत 8500 रुपये प्रति महीने का अधिकार देने की बात की थी।
दावा किया जाता है कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना इसी की कुछ मिलती जुलती कॉपी थी लेकिन इसमें धनराशि को बहुत कम दिया गया, इस वजह से युवओं ने इस योजना की तरफ ध्यान नहीं दिया आपको बता दें कि जब योजना लॉन्च हुई थी तो कांग्रेस का आरोप है कि यह योजना पूरी तरह से राहुल गांधी के घोषणापत्र की नकल है। राहुल गांधी ने चुनाव से पहले राइट टू अप्रेंटिसशिप की बात की थी, जिसमें युवाओं को गारंटीड ट्रेनिंग और सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना था। विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार ने नाम बदलकर पीएम इंटर्नशिप तो कर दिया, लेकिन उसकी आत्मा ही निकाल दी। आपने इसमें अधिकार का शब्द हटा दिया। नतीजा? कंपनियां मनमर्जी कर रही हैं, सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही और युवा दर-दर भटक रहा है।
ये मामला सिर्फ प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना तक नहीं है पहले भी इस तरह की बातें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में सामने आ चुकी हैं। सीएजी की ताजा रिपोर्ट ने इस योजना में भयंकर घोटाले का इशारा किया है। कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने जो खुलासे किए हैं, वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। 10,000 करोड़ रुपये ऐसे लोगों और ट्रेनिंग पार्टनर्स को बांट दिए गए जिनका न कोई सही फोन नंबर है, न कोई ईमेल आईडी है। कागजों पर ट्रेनिंग दिखाई गई, कागजों पर प्लेसमेंट दिखाया गया, लेकिन हकीकत में ग्राउंड पर कुछ नहीं था। केरल की एक कंपनी के ऑडिट में पता चला कि वहां एक भी व्यक्ति का प्लेसमेंट नहीं हुआ था, फिर भी सरकार ने करोड़ों का भुगतान कर दिया। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ये जो पैसा सरकार पानी की तरह बहा रही है और विपक्ष के आरोपों के अनुसार जिसे स्किल इंडिया के नाम पर भ्रष्ट अधिकारियों और फर्जी कंपनियों ने डकार लिया है, हमारे टैक्स का पैसा है। जिसे हम टैक्स के रुप में सरकार को दे रहे हैं। 2015 से 2022 तक इस योजना का नाम बदला गया, पैकेज बदला गया, लेकिन युवाओं का नसीब नहीं बदला। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि योजना का पूरा मकसद ही भटक गया है। जिस पैसे से युवाओं को हुनर मिलना था, उस पैसे से सरकार के करीबियों की तिजोरियां भरी गईं।
एक तरफ इंटर्नशिप योजना का 11,000 करोड़ का फंड धूल फांक रहा है, और दूसरी तरफ कौशल विकास के नाम पर हजारों करोड़ का चूना लगाया जा रहा है। सवाल है कि क्या यही है मोदी जी का नया भारतश्? जहां युवाओं को रोजगार के नाम पर सिर्फ विज्ञापन मिलते हैं? बिहार चुनाव में हमने देखा कि कैसे विपक्ष ने वोट चोरी का आरोप लगााया और अब हम देख रहे हैं कि युवाओं के हक की चोरी का आरोप बीजेपी और मोदी सरकार पर लगा रहा है। 1 करोड़ इंटर्नशिप का वादा करने वाली सरकार अगर साल भर में कुछ हजार युवाओं को भी ट्रेनिंग नहीं दे पा रही, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। युवाओं को 5000 रुपये का लालच देकर आप उनका भविष्य नहीं संवार सकते। उन्हें सम्मान, अधिकार और सही मजदूरी चाहिए। मोदी सरकार को इन आंकड़ों पर जवाब देना होगा। आखिर क्यों युवाओं का पैसा खर्च नहीं हुआ? आखिर क्यों कौशल विकास के नाम पर लूट मची रही?



