मीरजापुर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ फूटा जनाक्रोश: जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन, पुराने पोस्टपेड मीटर बहाल करने की मांग

मीरजापुर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, जिला मुख्यालय पर करणी सेना ने विरोध जताते हुए पुराने पोस्टपेड मीटर बहाल करने की मांग की। उपभोक्ताओं ने बिजली बिल और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: मीरजापुर में बिजली व्यवस्था को लेकर असंतोष अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराजगी ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया, जब सैकड़ों की संख्या में लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध सिर्फ मीटर बदलने की मांग नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

करणी सेना के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन

सोमवार, 4 मई 2026 को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के बैनर तले जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया गया। जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने स्मार्ट मीटर हटाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया, जिसमें पुराने पोस्टपेड मीटर को दोबारा लगाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।

“स्मार्ट मीटर बन चुका है उपभोक्ताओं के लिए समस्या”

धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ गई हैं। उनका कहना था कि:

  • मीटर में लगी चिप के जरिए बिजली विभाग दूर से नियंत्रण कर रहा है
  • उपभोक्ताओं के भुगतान के बावजूद एडवांस राशि ब्लॉक की जा रही है
  • पैसे न देने पर अचानक बिजली काट दी जाती है

उन्होंने इसे “उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण” बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की।

पोस्टपेड व्यवस्था में बदलाव से नहीं सुलझेगी समस्या

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भले ही सरकार ने प्रीपेड व्यवस्था को खत्म कर पोस्टपेड प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया हो, लेकिन स्मार्ट मीटर यथावत रहने से मूल समस्या खत्म नहीं होगी। उनका तर्क है कि:

  • चिप आधारित नियंत्रण जारी रहेगा
  • बिलिंग और सप्लाई में मनमानी की आशंका बनी रहेगी
  • उपभोक्ताओं की शिकायतों का स्थायी समाधान नहीं होगा

इसलिए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पोस्टपेड में स्विच करना पर्याप्त नहीं, बल्कि पुराने पारंपरिक मीटर ही बहाल किए जाएं।

“सड़क से सदन तक आंदोलन” की चेतावनी

करणी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर नहीं लगाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि:

  • आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जन आंदोलन होगा
  • जरूरत पड़ी तो “सड़क से सदन तक” विरोध किया जाएगा
  • इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली विभाग की होगी

उपभोक्ता हित बनाम तकनीकी बदलाव: बढ़ती बहस

स्मार्ट मीटर को लेकर यह विवाद सिर्फ मीरजापुर तक सीमित नहीं है। कई जिलों में उपभोक्ताओं ने बिलिंग, कटौती और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी सुधार तभी सफल होते हैं जब वे उपभोक्ताओं के विश्वास और सुविधा के साथ संतुलन बनाएं। अन्यथा, ऐसे विरोध लगातार बढ़ते रहते हैं।

मीरजापुर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ यह प्रदर्शन संकेत देता है कि बिजली व्यवस्था में बदलाव को लेकर जमीनी स्तर पर असंतोष गहरा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाते हैं, क्योंकि यह मामला सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट -संतोष देव गिरी

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