पुतिन बनाम ट्रंप: अटलांटिक में रूसी टैंकर जब्त, 500% टैरिफ वाले नए प्रतिबंध बिल से हड़कंप
ट्रप ने रुस के मित्र देशों खासकर जो रुस से तेल खरीदते हैं उनपर 500 प्रतिशत नई टैरिफ लगाने के बिल पर दस्तख्त कर दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या अमेरिका रुस से थर थर कांपने लगा है? क्या पुतिन की डिप्लोमेसी ट्रंप की दादागिरी पर भारी पड़़ रही है। क्या ट्रंप अपनी अमेरिका फर्स्ट वाली सनक में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को आग लगाने जा रहे हैं?
यह सवाल इसलिए क्योंकि रुस-अमेरिका के बीच न सिर्फ विवाद की खाई गहरी होती जा रही है बल्कि वेनेजुएला को लेकर रुस ने अमेरिका को खुली चुनौती भी दे डाली है और अपनी पनडुब्बियों को वेनेजुएला के पास तैनात कर दिया तो वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने रुस को इकोनॉमिक मोर्चे पर घेरने की तैयारी शुरु कर दी है और सबसे खास बात यह है कि बिलबिलाए ट्रंप ने सिर्फ रुस के खिलाफ ही नहीं बल्कि ब्रिक्स के दूसरे देश चीन, भारत और ब्राजील पर भी शिंकजा कसने का मन बना लिया है।
ट्रप ने रुस के मित्र देशों खासकर जो रुस से तेल खरीदते हैं उनपर 500 प्रतिशत नई टैरिफ लगाने के बिल पर दस्तख्त कर दी है। आपने सही सुना। ट्रंप ने एक ऐसे बिल को हरी झंडी दे दी है जो भारत जैसे मित्र देशों को भी भिखारी बनाने की ताकत रखता है। आज की इस वीडियो में हम पर्दाफाश करेंगे ट्रंप की उस पायरेसी का, जिसे वो कानून कह रहे हैं, और बताएंगे कि कैसे रूस की पनडुब्बियों ने ट्रंप के पसीने छुड़ा दिए हैं।
सबसे पहले बात करते हैं उस समुद्री डकैती की, जो कल रात अटलांटिक महासागर में हुई। मेरीनेरा नाम के एक रूसी झंडे वाला तेल टैंकर पर अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से कब्जा जमा लिया है। अमेरिका का आरोप है कि ये वेनेजुएला से तेल चोरी कर रहा था। लेकिन हकीकत ये है कि ट्रंप प्रशासन ने खुलेआम अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा दीं। ब्रिटेन की मदद लेकर अमेरिकी नेवी ने बीच समंदर में इस जहाज को चारों तरफ से घेर लिया। रूस ने इसे बचाने के लिए अपनी एडवांस पनडुब्बियां और युद्धपोत भेजे थे, लेकिन ट्रंप की नेवी ने चालाकी दिखाई और रूस के पहुंचने से पहले ही जहाज पर कब्जा कर लिया।
जब रूस की पनडुब्बियां सामने दिखीं, तो ट्रंप ने अपने कमांडोज को डू और डाई का ऑर्डर दे दिया। डर ये था कि अगर रूस पहले पहुँच गया, तो ट्रंप की थू-थू हो जाएगी। ये ट्रंप की कूटनीति नहीं, बल्कि समंदर में की गई गुंडागर्दी है। रूस अब भड़क चुका है और रुस के विदेश मंत्रालय का बयान आ गया है कि अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। रुस ने साफ किया है कि अगर उनके नागरिक और जहाज को कुछ हुआ तो डरने वाले नहीं है और वो आक्रमण करें और ऐसे में अगर रुस आक्रमण करता है तो यह बात भी तय है कि अमेरिका भी शांत नहीं बैठेगा क्योंकि वैसे भी ट्रंप को सनक सवार है कि खुद को और अमेरिका का सुपर साबित करने की, ऐसे में तय है कि अगर रुस अमेरिका की नौ सेना पर आक्रमण करता है तो जंग के आसार बढ़ सकते हैं।
लेकिन इस सबसे अलग रुस को कमजोर करने के लिए अमेरिका एक अलग ही खिचड़ी पका रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि बुधवार को व्हाइट हाउस में उनकी ट्रम्प से मुलाकात हुई, जिसमें राष्ट्रपति ने बिल को हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है। बिल का नाम सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लड़ने में मदद मिल रही है।
इस बिल के वजह से ब्रिक्स देशों पर दवाब बढ़ेगा क्योंकि ज्यादतर ब्रिक्स देश भारत, चाइना, ब्राजील रुस से ही तेल खरीदते हैं। जहां तक भारत का सवाल है कि तो रुस तेल की वजह से पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ की मार झेल रहा है और अब ये नया बिल भारत के लिए नई सरदर्दी पैदा करने वाला है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो, दिल्ली के लिए नई मुश्किलें लेकर आ सकता है। कहा जा रहा है कि इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों बल्कि नामुमकिन सा हो जाएगा, क्योंकि कोई ग्राहक कोई सामान 500 गुना मंहगा क्यों खरीदना चाहेगा। हालांकि पिछले दिनों भारत ने अपने डिप्लोमेसी मे तब्दीली की है।
भारत ने न सिर्फ रुस से तेल खरीदना बंद किया है बल्कि वो अमेरिका के साथ बातचीत भी कर रहा है। मोदी सरकार चाहती है कि टैरिफ 50 प्रतिश्त से घटकर 15 प्रतिशत पर आ जाए और दावा किया जा रहा है कि बातचीत मौजूदा समय मे फाइनल राउंड की ओर चल रही है लेकिन अब जब नया फैसला आने की उम्मीद जगी थी तो नए बिल ने हंगामा खड़ा कर दिया है और पूरे मामले में कहीं न कहीं ये बात साबित हो रही है कि अमेरिका रुस से डरा हुआ है और न सिर्फ उनके जहाजों पर कब्जा कर रहा है बल्कि रुस पर इकोनॉमिक्ल प्रेशर भी बढा रहा है।
भारत के लिए ये किसी परमाणु बम से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल रूस से सस्ती कीमतों पर खरीदता है। लेकिन ट्रंप को इससे क्या? वो चाहते हैं कि भारत महंगा अमेरिकी तेल खरीदे। ट्रंप कहते हैं कि मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं। लेकिन ये कैसी दोस्ती है? एक तरफ हाथ मिलाते हैं और दूसरी तरफ भारत के व्यापार को तबाह करने की धमकी देते हैं। 500 प्रतिशत टैरिफ का मतलब समझते हैं आप? अगर भारत का 100 रुपये का सामान अमेरिका जाता है, तो उस पर 500 रुपये का टैक्स लगेगा। यानी भारत का सामान वहां कोई खरीदेगा ही नहीं। ये दोस्ती नहीं, सरासर ब्लैकमेलिंग है! लोग कह रहे हैं कि ट्रंप बहुत ताकतवर हैं, लेकिन सच तो ये है कि ट्रंप रूस के नाम से थर-थर कांप रहे हैं। कल जब अटलांटिक में रूसी पनडुब्बियां तैनात हुईं, तो वॉशिंगटन में हड़कंप मच गया था।
ट्रंप जानते हैं कि अगर रूस के साथ सीधा युद्ध हुआ, तो अमेरिका का क्या हाल होगा। इसीलिए वो सीधे लड़ने के बजाय इकोनॉमिक टेररिज्म का सहारा ले रहे हैं। वो टैंकर पकड़ते हैं, बिल पास करते हैं, लेकिन जब पुतिन आंख दिखाते हैं, तो ट्रंप प्रतिबंधों की फाइलें दबाकर बैठ जाते हैं। ये नया बिल सिर्फ दुनिया को डराने का एक नाटक है, क्योंकि ट्रंप को पता है कि अगर भारत और चीन ने हाथ पीछे खींच लिए, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।
ट्रंप की इन हरकतों का नतीजा क्या हो रहा है? पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है। जैसे ही मेरीनेरा को पकड़ा गया, कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। ट्रंप को आम आदमी की फिक्र नहीं है। उन्हें बस अपनी सुपरमैन वाली इमेज बचानी है। क्या एक टैंकर की खातिर पूरी दुनिया को महंगाई की आग में झोंकना सही है? क्या भारत जैसे संप्रभु देश को ये हक नहीं है कि वो अपना तेल कहां से खरीदे? ट्रंप चाहते हैं कि पूरी दुनिया उनके इशारों पर नाचे, जैसे वो कोई ग्लोबल जमींदार हों।
मेरीनेरा की जब्ती और ये 500 प्रतिशत टैरिफ का खतरा, ये सब एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ट्रंप रूस को नीचा दिखाने के चक्कर में भारत, ब्राजील को दुश्मन बना रहे हैं। वैसे भी अटलांटिक में जो आग लगी है, उसकी लपटें अब दिल्ली और बीजिंग तक पहुँच रही हैं। अगर पुतिन ने जवाबी कार्रवाई की और अपनी पनडुब्बियों को फ्री हैंड दे दिया, तो समंदर की लहरें खून से लाल हो सकती हैं। और इसका जिम्मेदार अमेरिका की होगी और इससे न सिर्फ जंग बढेगी बल्कि दुनिया थर्ड वर्ल्डवार की ओर बढ़ सकता है।



