हरी फाइल का रहस्य क्या? ममता की एंट्री और I-PAC पर ED रेड से हंगामा
पश्चिम बंगाल में आई पैक दफ्तर पर अचानक ईडी की रेड से हडकंप मच गया है। एक ओर जहा राजनीति सरगर्मियां उफान पर हैं तो वहीं दूसरी ओर ईडी के छापेमारी के बीच ममता बनर्जी के आ धमकने से भयंकर बवाल खडा होता दिखाई दे रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल में आई पैक दफ्तर पर अचानक ईडी की रेड से हडकंप मच गया है। एक ओर जहा राजनीति सरगर्मियां उफान पर हैं तो वहीं दूसरी ओर ईडी के छापेमारी के बीच ममता बनर्जी के आ धमकने से भयंकर बवाल खडा होता दिखाई दे रहा है।
इस दौरान ममता की एक फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। यह फोटो आई पैक ऑफिस की बताई जा रही है। इसमें ममता हरी फाइल अपने सीने से चिपकाए हैं। दावा किया जा रहा है कि इसी हरी फाइल की वजह से ममता बनर्जी को खुद आई पैक कार्यालय ईडी के रेड के दौरान ही पहुंची थीं। ऐसे मे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस हरी फाइल में ऐसा क्या है कि खुद ममता बनर्जी इस फाइल को लेने आई और आईपैक से टीएमसी का कौन सा कनेक्श्न है, जिसने ममता को आने पर मजबूर किए है।
राजनीति में फाइलों का खेल बहुत पुराना है, लेकिन ममता बनर्जी का खुद किसी फाइल को लेने पहुंचना सामान्य बात नहीं है। सूत्रों की मानें तो यह हरी फाइल महज कागजों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह काउंटर अटैक का हथियार है। अब तक टीएमसी के हवाले से जो खबरें निकल कर सामने आईं है उसमें दावा किय जा रहा है कि इस फाइल में टीएमसी के चुनाव से जुड़े बहुत ही अहम दस्तावेज हैं तो कुछ टीएमसी के लाोगों का दावा यह भी है कि इस पर टीएमसी के चुनाव की पूरी रणनीति और जानकारी थी। आई पैक एक एजेंसी है जो टीएमसी के चुनाव को मैनेज करती है और मौजूद समय मे भी वो टीएमसी के चुनावों को पूरा काम देख रही है और इसके चीफ प्रतीक जैन हैं, जिसने घर और दफ्तर पर ईडी ने छापेमारी की है।
हालांकि अभी रेड चल ही रही थी कि तभी ममता बनर्जी भी यहां जैन के आवास आ धमकीं. ममता बनर्जी के यहां पहुंचते ही पारा हाई हो गया. ममता बनर्जी ने ईडी पर आरोप लगाया कि वे टीएमसी की गोपनीय फाइलें और डेटा जब्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि अगर वह भाजपा की दफ्तर पर रेड मार दें तो? बहरहाल, इस दौरान ममता की गाड़ियों में कुछ फाइलें भी रखवाईं गईं। दरअसल, ममता बनर्जी ने पहले ईडी पर डॉक्यूमेंट चोरी और टीएमसी की रणनीति की चोरी का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर से एक फाइल कलेक्ट करके आईपैक दफ्तर पहुंचीं। उसके बाद आईपैक दफ्तर में मौजूद कुछ फाइलों को उठाकर ममता बनर्जी के काफिले की गाड़ी में रखा गया. सूत्रों का कहना है कि जब अंदर छापा चल रहा था, तभी कुछ फाइलें को ममता के अधिकारी ले गए. खुद ममता के हाथ में एक ग्रीन कलर की फाइल देखी गई। आईपैक दफ्तर से जो फाइले निकलीं, वो ग्रीन कलर की थी। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी की आईटी सेल से जुड़े दस्तावेज थे, जो ममता के अधिकारी लेकर गए हैं. उनमें टीएमसी की कुछ जानकारियां थीं।
हालांकि पूरे मामले पर खुद ममता बनर्जी का बयान भी मीडिया में आया है कि मैं पार्टी के महत्वपूर्ण दस्तावेज व हार्ड डिस्क लेकर जा रही हूं। सीएम ने भाजपा पर निशान साधते हुए कहा कि अमित शाह नैस्टी गृहमंत्री हैं। वह देश की रक्षा करने में नाकाम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर मतदाताओं के नाम मिटाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील डेटा को अवैध रूप से इकट्ठा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आई-पैक ने 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत हासिल करने में अहम भूमिका निभाई थी। जब बीजेपी ने नारा दिया था कि अबकी बात 200 पार तो आईपैक ने बीजेपी की सारी रणनीति फेल कर दी थी। आईपैक ने पिछले विधान सभा चुनाव में दीदर दूत और खेला होबे की रणनीति अपनाई थी, जिससे बीजेपी को करारी हार मिली थी और इस बार भी आई-पैक राज्य में टीएमसी की विभिन्न रणनीतियों को निर्धारित करने, विपक्ष के हमलों का मुकाबला करने और चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ऐसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि क्या सच में ईडी किसी के ईशारे पर काम करने आई थी, क्या सच में ममता बनर्जी के दावे सही है हांलांकि अभी तक ईडी की ओर से कोई प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है लेकिन कई जगहों से ये बात सामने आ रही है कि ईडी की रेड कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी है, जिसमें पहले भी कई टीएमसी नेताओं के नाम आ चुके है। हालांकि जब तक ईडी की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं आ जाता है तब तक ये बातें हवाई दावे ही है लेकिन इतना तो तय है कि ईडी की रेड ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक हलचल पैदा कर दी है। दावा किया जा रहा है कि इन फाइलों में कुछ ऐसे नेताओं के डेटा था जो पहले कभी टीएमसी में होते थे और उन पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप थे, अब उसमें कई नेता बीजेपी में भी शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब भी केंद्र सरकार पर ममता बनर्जी इसी हरी फाइल के दम पर पलटवार की रणनीति बनाती हैं। यह फाइल मोदी सरकार के उन दावों की हवा निकाल सकती हैं जिनमें वो खुद को साफ सुधरा बताते हैं।
इस पूरे हंगामे की जिसने बंगाल की राजनीति में आग लगा दी है। ऐसे मे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या बीजेपी अभी तक 2021 की करारी हार को पचा नहीं पाई है? क्या. आईपैक के पास बंगाल के करोड़ों मतदाताओं का डेटा और टीएमसी की चुनावी रणनीति है। क्या ईडी के बहाने उस रणनीतिक डेटा को हासिल करने की कोशिश की जा रही है? जब भी कोई चुनाव नजदीक आता है या विपक्ष एकजुट होता है, अचानक ईडी सक्रिय क्यो हो जाती है। यह संयोग है या फिर सोचा समझा प्रयोग है। ईडी पहले से ही देश में अपनी प्रतिष्ठिा पर कई बार खुद सवाल खडा करा चुका है। अभी पिछले दिनों ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए कोर्ट गई थी लेकिन कोर्ट ने इस मामले को सिरे से खारिज कर दिया था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी ईडी को कई मामलों में लताड़ लगा चुकी है लेकिन ईडी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है क्योंकि ईडी हो या सीबीआई, दोनों को केंद्र सरकार के अधीन काम करती है और हर सरकारों इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठता रहा है और खासकर ईडी की कार्रवाई पर तो कुछ ज्यादा ही सवाल है। आपको याद होगा कि जब दिल्ली में चुनाव था तो केजरीवाल और मनीषा सिसोदिया के खिलाफ कितनी एक्टिव हुई थी, सीबीआई और ईडी। यही हाल छत्तीगढ में हुआ था। पिछले दिनों महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में भी ईडी और सीबीआई को आपने देखा होगा कि कैसे उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के खिलाफ ईडी ने कार्रवाई की थी। आज जो ममता बनर्जी की रेड पड़ी है , उसमें ममता बनर्जी का दावा साफ साफ है कि ये सिर्फ चुनाव को प्रभावित करने और उनको डेटा चोरी करने के लिए है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने ईडी को अपना फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन बना लिया है।
आंकड़े क्या कहते हैं कि पिछले 10 सालों में ईडी ने जितने छापे मारे, उनमें से 95 प्रतिशत विपक्षी नेताओं पर थे। क्या सत्ता पक्ष में एक भी भ्रष्ट नेता नहीं है? विपक्ष हमेशा से दावा करता आया है कि जैसे ही कोई नेता बीजेपी में शामिल होता है, उसके खिलाफ चल रहे ईडी के केस ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। कहा जाता है कि इसकी लिस्ट बहुत लंबी है। वैसे भी बंगाल का इतिहास गवाह है, ममता को जितना दबाया गया, वो उतनी ही ताकत से उभरी हैं। और माना जा रहा है कि आई पैक पर रेड करके केंद्र सरकार ने संदेश दिया है कि वो टीएमसी के दिमाग पर हमला करना चाहती है। ऐसे में ईडी की रेड का मामला भ्रष्टचार बनाम बंगाल नहीं बल्कि ममता बनाम मोदी होता दिख रहा है। अगर ममता बनर्जी की उस हरी फाइल में वाकई में कोई बड़ा पिटारा है तो आने वाले समय में हड़कंप मचनाा तय हैै।



