मोदी की सभा में भीड़ दिखाने पर उठे सवाल, क्या ‘लोकप्रिय नेता’ से जनता ने बनाई दूरी?

गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर सियासत गरमा गई है... कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए शिक्षकों को बुलाने के...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को अपने गृह राज्य गुजरात पहुंचे.. जहां उनका एक दिवसीय दौरा विकास परियोजनाओं के उद्घाटन.. और जनसभा पर केंद्रित था.. लेकिन इस दौरे से पहले तकनीकी शिक्षा आयुक्त की ओर से जारी एक सर्कुलर ने विवाद खड़ा कर दिया है.. सर्कुलर में विभिन्न तकनीकी संस्थानों से शिक्षकों.. और छात्रों को पीएम मोदी की सनंद वाली बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का आदेश दिया गया था.. प्रत्येक संस्थान को 100 से 250 छात्रों के साथ शिक्षण स्टाफ भेजने को कहा गया.. कांग्रेस ने इसे फोर्स्ड क्राउड बिल्डिंग बताया.. और आरोप लगाया कि विश्व के लोकप्रिय नेता की सभा में भीड़ दिखाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है.. विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि क्या असली जनसमर्थन इतना कम हो गया है कि शिक्षकों को बुलाना पड़ रहा है..

जानकारी के मुताबिक तकनीकी शिक्षा आयुक्त की ओर से जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि.. संस्थानों को पीएम मोदी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छात्र-शिक्षक भेजने हैं.. कई संस्थानों में मीटिंग्स हुईं और शिक्षकों को बताया गया कि उपस्थिति अनिवार्य है.. कांग्रेस ने इसे लेकर तीखा हमला बोला.. शैलेश परमार और अन्य नेताओं ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है.. अगर पीएम इतने लोकप्रिय हैं.. तो स्वाभाविक भीड़ क्यों नहीं जुट रही.. क्यों सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को मजबूर किया जा रहा है..

आपको बता दें कि यह विवाद गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले आया है.. जब 15 नगर निगमों और 383 अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं.. ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल माने जा रहे हैं.. भाजपा इन चुनावों में मजबूत प्रदर्शन चाहती है.. पीएम मोदी का दौरा पार्टी को चुनावी जोश देने के लिए था.. लेकिन शिक्षकों को बुलाने का आदेश विपक्ष को हथियार दे गया.. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा अब जनता पर भरोसा नहीं कर रही.. इसलिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है..

सनंद में कार्यक्रम स्थल पर भीड़ जुटाने की तैयारी में यह सर्कुलर जारी किया गया.. सनंद गुजरात का एक औद्योगिक क्षेत्र है.. जहां कई बड़ी कंपनियां हैं.. लेकिन कार्यक्रम में शिक्षकों और छात्रों को लाने का फैसला विवादास्पद हो गया.. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में भारी पद रिक्तियां हैं.. फिर भी शिक्षकों को राजनीतिक कार्यक्रम में भेजा जा रहा है.. इससे पढ़ाई प्रभावित होगी और छात्रों का समय बर्बाद होगा..

भाजपा की ओर से इस विवाद पर अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है.. लेकिन स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में स्वाभाविक भीड़ जुट रही है.. शिक्षकों और छात्रों को निमंत्रण दिया गया है.. कोई जबरदस्ती नहीं है.. उनका कहना है कि पीएम मोदी गुजरात के विकास पुरुष हैं.. और लोग उन्हें सुनने के लिए स्वयं आ रहे हैं.. विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया.. कई पोस्ट में कहा गया कि लोकप्रिय नेता की सभा में भीड़ दिखाने के लिए सरकारी आदेश क्यों.. अगर असली समर्थन है तो शिक्षकों को बुलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है.. कांग्रेस ने पूछा कि क्या भाजपा की लोकप्रियता घट रही है.. इसलिए मजबूरी में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल हो रहा है..

जानकारी के अनुसार यह पहली बार नहीं है.. जब पीएम मोदी के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने को लेकर सवाल उठे हैं.. पहले भी कई राज्यों में सरकारी कर्मचारियों, छात्रों या शिक्षकों को कार्यक्रमों में बुलाने के आरोप लगे हैं.. लेकिन गुजरात जैसे गृह राज्य में यह विवाद ज्यादा ध्यान खींच रहा है.. गुजरात भाजपा का गढ़ माना जाता है.. जहां 1995 से भाजपा सत्ता में है.. पीएम मोदी खुद यहां से सांसद रहे हैं.. कार्यक्रम की तैयारियों में स्थानीय प्रशासन सक्रिय है.. सनंद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है.. और सड़कों को सजाया गया है.. लेकिन शिक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति के आदेश के सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे मजबूरी की भीड़ बताया.. अमित चावड़ा ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है.. शिक्षक पढ़ाने के लिए हैं.. राजनीतिक रैली में भीड़ जुटाने के लिए नहीं..

 

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