IDBI बैंक के निजीकरण पर राहुल का मोदी पर हमला, कहा- कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, अब बिकते हैं

IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है... राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा निशाना साधा है.. और उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले बैंक को खरीदने के लिए बोली लगवाई.. और उसके बाद उसकी कीमत तय की.. राहुल गांधी का कहना है कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के औद्योगिक विकास के लिए बैंक बनाए जाते थे.. जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में सरकारी बैंकों को बेचा जा रहा है.. और उन्होंने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है.. और कहा कि सार्वजनिक बैंक राष्ट्र निर्माण के औजार हैं.. न कि बेचने वाली संपत्ति..

राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर अपनी बात रखी.. और उन्होंने लिखा कि कांग्रेस के समय में आईडीबीआई बना, देश का उद्योग खड़ा करने के लिए.. मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ.. कांग्रेस के टाइम पे बैंक बनते थे.. मोदी के टाइम में बिकते हैं.. मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं.. यह पोस्ट उनके द्वारा कर्मचारियों को संबोधित खुले पत्र के साथ साझा की गई.. जिसमें उन्होंने बैंक के इतिहास और वर्तमान स्थिति का विस्तार से जिक्र किया..

राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक विस्तृत पत्र लिखा है.. पत्र में उन्होंने बताया कि पिछले साल मार्च में बैंक के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल संसद भवन में उनसे मिला था.. कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि जिस बैंक को उन्होंने अपनी मेहनत से मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार क्यों बेच रही है.. राहुल गांधी ने इस सवाल को गंभीरता से लिया.. और लोकसभा में मुद्दा उठाया.. और उन्होंने सरकार से पूछा कि एक मुनाफे वाले सरकारी बैंक को बेचने की जरूरत क्यों है.. और कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे की जाएगी..

राहुल गांधी के अनुसार सरकार इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई.. अब बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया गया है.. कैबिनेट समिति ने अक्टूबर में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी.. जिसमें सरकार 30.48  प्रतिशत और एलआईसी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी.. कुल सौदा लगभग 52878 करोड़ रुपये का है.. राहुल गांधी ने इस फैसले को सार्वजनिक संस्थानों को बेचने की नीति का उदाहरण बताया..

राहुल गांधी ने पत्र में आईडीबीआई बैंक के प्रदर्शन का विस्तार से जिक्र किया.. और उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत एक विकास बैंक के रूप में हुई थी.. जो देश के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था.. बाद में इसे वाणिज्यिक बैंक में बदलने का सफर आसान नहीं रहा.. लेकिन कर्मचारियों ने चुनौतियों का डटकर सामना किया.. करीब सात साल पहले बैंक घाटे में चल रहा था.. जबकि पिछले साल इसने नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया.. यह बदलाव कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण का नतीजा है..

 

Related Articles

Back to top button