भरी अदालत में गरजे राहुल, कहा- मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई   

राहुल गांधी ने अदालत में पेशी के दौरान अपना पक्ष रखते हुए आरोपों का जवाब दिया... मामले में भाजपा से जुड़े मानहानि विवाद पर भी चर्चा हुई...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भरी अदालत में राहुल गांधी ने जमकर हुंकार भरी.. और बीजेपी सरकार को बेनकाब कर दिया.. बता दें कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक पुराने मानहानि मामले में सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए.. जानकारी के अनुसार यह मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान.. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई उनकी टिप्पणी से जुड़ा है.. राहुल ने कोर्ट के सामने साफ-साफ कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.. और यह सब उनकी छवि खराब करने की एक सोची-समझी साजिश है.. उन्होंने आरोप लगाया कि यह केस राजनीतिक द्वेष से दायर किया गया है.. कोर्ट ने राहुल का बयान दर्ज किया.. और अगली सुनवाई की तारीख 9 मार्च 2026 तय की.. वहीं राहुल की पेशी के दौरान कोर्ट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था.. और कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे..

आपको बता दें कि यह मामला मूल रूप से 2018 का है.. जब राहुल गांधी कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान बैंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.. और उन्होंने अमित शाह पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि.. भाजपा नैतिकता की बात करती है.. लेकिन उसके अध्यक्ष पर हत्या का आरोप है.. राहुल का इशारा अमित शाह पर लगे पुराने आरोपों की तरफ था.. जो 2002 गुजरात दंगों से जुड़े थे.. हालांकि, अमित शाह को कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी थी.. जिसको लेकर स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने इस बयान को मानहानि बताते हुए सुल्तानपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई.. मिश्रा का दावा था कि राहुल के शब्दों से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा.. कोर्ट ने इस शिकायत पर संज्ञान लिया और मामला चल पड़ा.. राहुल को पहले भी कई बार समन जारी हुए.. लेकिन विभिन्न कारणों से वे पेश नहीं हो पाए.. जनवरी 2026 में कोर्ट ने उन्हें अंतिम मौका दिया था कि.. वे व्यक्तिगत रूप से आकर बयान दर्ज कराएं.. वरना गैर-जमानती वारंट जारी हो सकता है..

इसी क्रम में 20 फरवरी की सुबह राहुल गांधी कोर्ट नंबर 19 में जज योगेश यादव की बेंच के सामने पेश हुए.. राहुल के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय.. और कई अन्य कार्यकर्ता थे.. कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे.. क्योंकि कांग्रेस समर्थकों की भीड़ जमा हो गई थी.. राहुल ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया.. जिसमें उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया.. और उन्होंने कहा कि मेरा इरादा किसी का अपमान करने का नहीं था.. मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.. राहुल ने जोर देकर कहा कि यह केस राजनीतिक साजिश का हिस्सा है.. जिसका मकसद उनकी और कांग्रेस पार्टी की छवि को धूमिल करना है.. और उन्होंने शिकायत में इस्तेमाल की गई सीडी पर भी सवाल उठाया.. और कहा कि वह सत्यापित नहीं है.. तथा उसके साथ छेड़छाड़ की गई है.. राहुल का बयान करीब 35 मिनट चला.. उसके बाद वे कोर्ट से निकल गए..

शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडेय ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा.. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अमित शाह को अभियुक्त कहकर उनका अपमान किया था.. पांडेय ने तर्क दिया कि राहुल का बयान सार्वजनिक था.. और इससे अमित शाह की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची.. उन्होंने सीडी को सबूत के रूप में पेश किया.. जिसमें राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग है.. हालांकि राहुल के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने इसका विरोध किया.. शुक्ला ने कहा कि सीडी की सत्यता संदिग्ध है.. और यह केस केवल राजनीतिक द्वेष से दायर किया गया है.. कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की.. जहां राहुल को अपने बचाव में सबूत पेश करने होंगे.. फिलहाल, राहुल इस मामले में जमानत पर हैं.. जो उन्हें 2023 में मिली थी..

इस पेशी के बाद राहुल गांधी ने सुल्तानपुर में एक मोची की दुकान पर जाकर परिवार से मुलाकात की.. यह मोची रामचेत थे.. जिन्हें राहुल ने कुछ महीने पहले एक सिलाई मशीन भेंट की थी.. रामचेत का निधन हो चुका है.. इसलिए राहुल उनके परिवार से मिले.. और उन्होंने परिवार की हालत पूछी और मदद का आश्वासन दिया.. राहुल ने कहा कि वे आम लोगों की समस्याओं को समझते हैं.. और ऐसे लोगों की मदद करना अपना कर्तव्य मानते हैं.. वहीं इस मुलाकात ने मामले को और ज्यादा ध्यान दिलाया.. क्योंकि इसने राजनीतिक पेशी के साथ सामाजिक संदेश भी जोड़ दिया..

कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को भाजपा की साजिश बताया.. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि हम लंबे समय से ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं.. जो सत्य के साथ खड़े होते हैं.. और विकास की बात करते हैं.. उन पर केस दायर किए जाते हैं.. उन्होंने इसे सम्मान का बैज बताया.. और कहा कि ऐसे हमले उन्हें और मजबूत बनाते हैं.. कांग्रेस यूथ विंग ने पोस्ट किया कि भाजपा विपक्ष को दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग कर रही है.. राहुल गांधी ने खुद कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया.. लेकिन उनके करीबियों ने कहा कि वे धमकियों से नहीं डरते.. कांग्रेस ने इस मामले को संसद में भी उठाने की योजना बनाई है.. जहां वे राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे..

आपको बता दें कि शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कहा कि यह न्याय की लड़ाई है.. और उन्होंने दावा किया कि राहुल के शब्दों से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा.. जो एक सम्मानित नेता हैं.. भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया है.. और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है.. हालांकि विपक्ष का आरोप है कि ऐसे केस चुनिंदा तरीके से विपक्षी नेताओं पर दायर किए जाते हैं.. वहीं यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी मानहानि के मामले में कोर्ट गए हैं.. 2023 में मोदी सरनेम मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था.. लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी.. उस मामले में भी राहुल ने राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था..

बता दें कि इस मामले का बैकग्राउंड समझने के लिए 2018 के कर्नाटक चुनाव को याद करना जरूरी है.. उस समय कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी लड़ाई चल रही थी.. राहुल गांधी ने बैंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भाजपा कहती है कि वह ईमानदार राजनीति करती है.. लेकिन उसके अध्यक्ष पर हत्या का आरोप है.. अमित शाह पर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में आरोप लगे थे.. लेकिन 2014 में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था.. राहुल का यह बयान वायरल हो गया.. और भाजपा ने इसे मानहानि बताया.. विजय मिश्रा सुल्तानपुर के रहने वाले हैं.. उन्होंने शिकायत की कि यह बयान उनके क्षेत्र में भी फैला.. और अमित शाह की छवि खराब हुई.. कोर्ट ने 2018 में ही केस दर्ज किया और तब से सुनवाई चल रही है.. राहुल को कई बार समन भेजे गए.. लेकिन वे भारत जोड़ो यात्रा या अन्य प्रतिबद्धताओं के कारण पेश नहीं हो सके..

मानहानि के कानून के तहत भारत में आईपीसी की धारा 499 और 500 के अनुसार.. किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले बयान पर मुकदमा चल सकता है.. इस मामले में राहुल पर धारा 500 लागू है.. विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक बयानों को अक्सर मानहानि का रूप दे दिया जाता है.. जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है.. राहुल के वकील ने तर्क दिया कि राजनीतिक बहस में ऐसे बयान सामान्य हैं.. और उनका इरादा अपमान का नहीं था.. वहीं शिकायतकर्ता का पक्ष है कि सार्वजनिक व्यक्ति होने के कारण अमित शाह की छवि ज्यादा संवेदनशील है.. कोर्ट अब सबूतों की जांच करेगी.. जिसमें सीडी की फॉरेंसिक जांच भी शामिल हो सकती है..

वहीं राहुल गांधी की कानूनी लड़ाइयों की बात करें तो यह अकेला मामला नहीं है.. वे कई अन्य मामलों में भी उलझे हैं.. जिसमें मोदी सरनेम केस, जहां उन्हें दो साल की सजा हुई थी.. लेकिन अपील पर रोक लग गई.. एक और मामला असम में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान दर्ज हुआ.. कांग्रेस का कहना है कि ये सभी केस भाजपा की रणनीति का हिस्सा हैं.. जिससे विपक्ष को कमजोर किया जा सके.. भाजपा इसे कानून का पालन बताती है.. बता दें कि ऐसे मामलों से राजनीतिक छवि पर असर पड़ता है.. लेकिन राहुल जैसे नेता इससे और मजबूत होकर उभरते हैं..

 

Related Articles

Back to top button