‘माफी नहीं मांगेंगे’, राहुल गांधी के तेवर से बौखलाई BJP-RSS, काले झंडे दिखाए
कांग्रेस नेता राहुल गांधी 2014 के मानहानि के एक मामले में महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित अदालत में पहुंचे... इस दौरान मुंबई में भाजपा कार्यकर्ताओं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः कांग्रेस के बड़े नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी बहादुरी दिखाई.. और वे महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट पहुंचे.. जहां उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पूरी की.. बता दें कि मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक पुराने मानहानि केस का है.. राहुल ने यहां नए जमानतदार पेश किए.. और कोर्ट की सारी प्रक्रिया पूरी की.. जिसके बाद उनके वकील ने साफ शब्दों में कहा कि माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं है.. यह सुनकर भारतीय जनता पार्टी के लोग बौखला गए.. ठाणे में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल के खिलाफ काले झंडे दिखाए.. और विरोध किया.. वहीं यह घटना राजनीतिक दुनिया में नई हलचल मचा रही है.. राहुल गांधी अब पहले से ज्यादा मजबूत होकर संघ और भाजपा पर हमला बोल रहे हैं..
आपको बता दें कि यह मामला 2014 से शुरू होता है.. उस साल लोकसभा चुनाव हो रहे थे.. राहुल गांधी कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे.. 6 मार्च 2014 को महाराष्ट्र के सोनाले गांव में एक चुनावी रैली थी.. राहुल ने वहां भाषण देते हुए कहा कि आरएसएस ने महात्मा गांधी को गोली मारी.. और अब वे गांधीजी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं.. यह बात आरएसएस के लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई.. आरएसएस के एक कार्यकर्ता राजेश कुंते ने उसी साल भिवंडी कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई.. और कुंते का कहना था कि राहुल का यह बयान झूठा है.. इससे आरएसएस की इज्जत को ठेस पहुंची है.. उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत मानहानि का मुकदमा दायर किया..
इस धारा में किसी की छवि खराब करने वाले बयान पर सजा हो सकती है.. कोर्ट ने शिकायत को मंजूर किया.. और मामला शुरू हो गया.. राहुल को कई बार कोर्ट में बुलाया गया.. और उन्होंने जमानत ली और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल उनके जमानतदार बने.. लेकिन पिछले साल दिसंबर में शिवराज पाटिल का निधन हो गया.. इसलिए कोर्ट ने राहुल को नए जमानतदार लाने का आदेश दिया.. जिसके चलते राहुल गांधी मुंबई पहुंचे.. जहां कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया..
लेकिन जैसे ही राहुल की कार ठाणे की तरफ बढ़ी.. भाजपा के कार्यकर्ता सड़क पर आ गए.. और उन्होंने काले झंडे लहराए और विरोध के नारे लगाए.. भाजपा वाले कह रहे थे कि राहुल आरएसएस की छवि खराब कर रहे हैं.. यह विरोध हाल ही में हुए एक प्रदर्शन का जवाब था.. जहां यूथ कांग्रेस ने एआई समिट पर विरोध किया था.. राहुल गांधी ने इन सबको नजरअंदाज किया.. और सीधे भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट पहुंचे.. कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने नए जमानतदार को पेश किया.. जमानतदार महाराष्ट्र कांग्रेस कमेटी के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल थे.. सपकाल, राहुल के साथ कई राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखते हैं.. वे महाराष्ट्र में कांग्रेस को मजबूत करने में लगे हैं.. कोर्ट ने सपकाल के कागजात चेक किए.. बॉन्ड पर साइन करवाए और प्रक्रिया पूरी की.. यह सब आधे घंटे में हो गया.. राहुल को अब आगे की सुनवाई में खुद आने की जरूरत नहीं पड़ेगी.. कोर्ट ने उन्हें स्थायी छूट दे दी है..
कोर्ट से बाहर आकर राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने मीडिया से बात की.. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी के पुराने जमानतदार शिवराज पाटिल का निधन हो गया था.. इसलिए नए जमानतदार की जरूरत पड़ी.. अब हर्षवर्धन सपकाल ने बॉन्ड भरा है.. अय्यर ने कहा कि यह केस सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक जल्द चलेगा.. क्योंकि यह एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट का मामला है.. जहां सुनवाई तेज होती है.. और उन्होंने कोर्ट पर पूरा भरोसा जताया.. और कहा कि सच्चाई जल्द सामने आएगी.. वहीं जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या राहुल इस बार माफी मांगेंगे.. तो अय्यर ने साफ इनकार कर दिया.. और उन्होंने कहा कि माफी का कोई सवाल ही नहीं है.. आज सिर्फ जमानत की प्रक्रिया थी.. हम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं.. यह बयान राहुल गांधी के मजबूत इरादे को दिखाता है.. पहले कुछ मामलों में राहुल ने कोर्ट के कहने पर माफी मांगी थी.. लेकिन इस बार वे डटकर लड़ने को तैयार हैं..
जानकारी के मुताबिक यह केस सबूतों के दौर में पहुंच चुका है.. शिकायतकर्ता राजेश कुंते की जिरह हो चुकी है.. यानी कोर्ट में उनसे सवाल-जवाब हो गए है.. दूसरे गवाह अशोक साइकर की गवाही ली गई है.. साइकर वही जांच अधिकारी हैं.. जिन्होंने शुरुआती शिकायत की जांच की थी.. उनकी जिरह अभी बाकी है.. यह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत हो रही है.. 21 फरवरी की सुनवाई सिर्फ जमानत के लिए थी.. कोई नई गवाही नहीं हुई.. कोर्ट ने अगली तारीख मार्च में तय की है.. वहां जांच अधिकारी की जिरह होगी.. राहुल के वकील कहते हैं कि वे बचाव के गवाहों को सही समय पर पेश करेंगे.. वे कोर्ट के हर निर्देश का पालन कर रहे हैं.. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो केस जल्द खत्म हो सकता है..
बता दें कि भाजपा ने इसे मौका बनाकर राहुल पर तीर चलाए.. ठाणे में भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए.. और कहा कि राहुल आरएसएस को बदनाम कर रहे हैं.. वे इसे इतिहास की तोड़-मरोड़ बताते हैं.. भाजपा के स्थानीय नेता कहते हैं कि राहुल को अपने बयानों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.. वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा और आरएसएस की साजिश बताया.. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल का पूरा समर्थन किया.. वे कहते हैं कि राहुल डरने वाले नहीं हैं.. कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसे मुकदमे विपक्ष को दबाने की कोशिश हैं.. लेकिन हम मजबूत रहेंगे.. आरएसएस की तरफ से कोई बड़ा बयान नहीं आया.. लेकिन उनके कार्यकर्ता राजेश कुंते का साथ दे रहे हैं.. यह पूरा मामला आरएसएस और कांग्रेस के बीच पुरानी वैचारिक लड़ाई को दिखाता है.. एक तरफ आरएसएस खुद को राष्ट्रवादी संगठन बताता है.. दूसरी तरफ कांग्रेस उसे गांधी हत्या से जोड़ती है..
बता दें 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई.. हत्यारा नाथूराम गोडसे था.. गोडसे उस समय हिंदू महासभा से जुड़े थे.. लेकिन आरएसएस पर आरोप लगे कि उनका भी इसमें हाथ था.. आरएसएस हमेशा इन आरोपों से इनकार करता रहा है.. सरकारी जांच में भी आरएसएस को दोषी नहीं ठहराया गया.. लेकिन विपक्षी पार्टियां, खासकर कांग्रेस, इसे उठाती रहती हैं.. राहुल का 2014 का बयान इसी पुरानी बहस का हिस्सा था.. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार कहा है कि संघ गांधीजी का सम्मान करता है.. वे कहते हैं कि संघ राष्ट्र निर्माण में लगा है.. लेकिन कांग्रेस इसे वैचारिक हथियार बनाती है.. वहीं यह केस अब सिर्फ कानूनी नहीं रहा.. बल्कि राजनीतिक हो गया है..



