भारत में मीम डेमोक्रेसी का उदय

- कॉकरोच से बाज तक… सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है वर्चुअल विद्रोह
- सरकार ने अकाउंट बंद किया तो इंटरनेट यूर्जस ने इसे आंदोलन बना दिया
- कॉकरोच जनता पार्टी से जुडऩे वालों का आंकड़ा 2 करोड़ के करीब, मीम वॉर में कूदी नई-नई पार्टियां
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के पर कतरने के लिए जितनी तेजी दिखाई उससे हाई स्पीड में कॉकरोच जनता पार्टी को ज्वाइन करने वालों की संख्या में इजाफा हो गया। कार्रवाई के महज 24 घंटे के भीतर लगभग एक करोड़ नये लोगों ने पार्टी के इंस्टा पेज को फालो कर लिया यही नहीं कॉकरोच जनता पार्टी का एकाउंट बंद होने के बाद सोशल मीडिया ने उसे डिजिटल बगावत में बदल दिया। कॉकरोच जनता पार्टी अब सिर्फ एक मजाक या मीम नहीं रह गयी है बल्कि इंटरनेट की सबसे वायरल सियासी सनक बनती जा रही है। एक्स अकाउंट सीज होने के बाद इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की ऐसी बाढ़ आई कि आंकड़ा अब 2 करोड़ के करीब पहुंच चुका है। उधर, मीम फै ट्री इतनी तेज चली कि कॉकरोच के बाद अब छिपकली पार्टी और बाज पार्टी भी मैदान में उतर चुकी हैं। लखनऊ के जफर अली खान नाम के युवक ने बाकायदा बाज पार्टी बनाकर लोगों से जुडऩे की अपील कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि यह राजनीति है या इंटरनेट का नया जंगलराज?
युवाओं की मिली नई भाषा
दरअसल, जिस चीज को शुरुआत में लोगों ने टाइमपास समझा था वही अब डिजिटल गुस्से व्यंग्य और सिस्टम से नाराज युवाओं की नई भाषा बनती जा रही है। सरकार ने जैसे ही एक्स अकाउंट पर कार्रवाई की इंटरनेट की जनता ने उसे सेंसरशिप बनाम मीम की लड़ाई बना दिया। नतीजा जिसे रोकने की कोशिश हुई वही और तेजी से फैल गया। इंस्टाग्राम रील्स, मीम पेज, टेलीग्राम ग्रुप और यूट्यूब शॉर्ट्स पर कॉकरोच जनता पार्टी अब किसी राजनीतिक संगठन से ज्यादा एक इंटरनेट कल्चर बन चुकी है। कोई इसे सिस्टम पर तंज बता रहा है कोई युवाओं की कुंठा का विस्फोट तो कोई इसे लोकतंत्र का नया डिजिटल तमाशा कह रहा है।
कट्टर ध्रुवीकरण भी हो सकता है
मीम मजाक से शुरू होते हैं लेकिन बाद में नफरत ट्रोलिंग और संगठित डिजिटल हमले का रूप भी ले सकते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी की कहानी नहीं है। यह उस नए भारत की तस्वीर है जहां राजनीति अब रैलियों से ज्यादा रील्स में बन रही है। जहां विचारधारा से ज्यादा वायरलिटी मायने रखती है। और जहां एक मीम कई बार एक भाषण से ज्यादा ताकतवर साबित हो जाता है।
इंटरनेट की इस आंधी से समाज को फायदा या नुकसान
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक इस तरह की डिजिटल मीम राजनीति अक्सर दो चीजों के मिश्रण से पैदा होती है एक जनता का स्वत: उभरता गुस्सा या मनोरंजन और और दूसरा उसे दिशा देने वाली संगठित डिजिटल ताकतें। काकरोच जनता पार्टी जैसा ट्रेंड पूरी तरह ऑर्गेनिक भी हो सकता है और पूरी तरह मैनेज्ड भी नहीं। आमतौर पर ऐसे वायरल एपिसोड तीन चरणों में चलते हैं शुरुआत मजाक, व्यंग्य या गुस्से से होती है। फिर इंटरनेट की भीड़ उसे मीम और ट्रेंड में बदल देती है। और उसके बाद राजनीतिक वैचारिक या डिजिटल समूह उसमें अवसर तलाशने लगते हैं। यानी शुरुआत भले स्वत: हुई हो लेकिन जैसे जैसे करोड़ों लोग जुड़ते हैं अलग-अलग ताकतें उसे अपने हिसाब से मोडऩे की कोशिश करने लगती हैं। भारत में अब नैरेटिव की राजनीति जमीन से ज्यादा स्क्रीन पर लड़ी जा रही है। इसलिए कोई भी वायरल चीज राजनीतिक हथियार बन सकती है। कई बार लोग सिर्फ मजे के लिए जुड़ते हैं लेकिन बाद में वही ट्रेंड राजनीतिक रंग पकड़ लेता है। यही सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा खतरा है। एक्सपर्ट इस पूरे सीन को राजनीतिक व्यंग्य के नये दौर के तौर पर देख रहे हैं उनका कहना है कि यह सत्ता और विपक्ष दोनों पर जनता की नाराजगी को मजाक के जरिए सामने लाता है। युवा लंबा भाषण नहीं सुनते, लेकिन एक मीम लाखों तक पहुंच जाता है। यही नहीं डिजिटल भागीदारी बढ़ती है जो लोग राजनीति से कट चुके थे वह भी मीम और ट्रेंड के जरिए जुडऩे लगते हैं। इसे मीम डेमोक्रेसी भी कहा जा सकता है। इस पूरे मूवमेंट से सत्ता पर मनोवैज्ञानिक दबाव आटोमेटिकली आ चुका है जब कोई ट्रेंड बेकाबू होता है तो सरकारें भी उसकी प्रतिक्रिया देखने लगती हैं। कई बार मीम असली मुद्दों को राष्ट्रीय बहस बना देते हैं। वहीं यदि इस पूरे एपिसोड का नुकसान देखे तो यह गंभीर राजनीति का मजाक बनना है अगर हर मुद्दा सिर्फ मीम बन जाएगा तो नीति, विचारधारा और असली बहस पीछे छूट सकती है। ऐसे ट्रेंड में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। लोग बिना जांचे चीजों को सच मानने लगते हैं। सोशल मीडिया पर जो सबसे ज्यादा वायरल है वही सच मान लिया जाता है। यह लोकतंत्र को भावनात्मक भीड़ की दिशा में धकेल सकता है।
बहुत कुछ लिखा जा रहा है
सोशल मीडिया पर हजारों मीम तैर रहे हैं। कहीं लिखा जा रहा है कि देश में इंसानों से ज्यादा पार्टियां अब कीड़ों की हो गई हैं। तो कहीं यूजर्स मजाक उड़ा रहे हैं अगला चुनाव शेर, बाज, छिपकली और कॉकरोच के बीच होगा। लेकिन इस वायरल सनक के पीछे सिर्फ हंसी मजाक नहीं है। राजनीति को लेकर युवाओं का मोहभंग सिस्टम से चिढ़ और हर मुद्दे को मीम में बदल देने वाली इंटरनेट संस्कृति ने इसे विस्फोटक बना दिया है। यही वजह है कि अकाउंट बंद होने के बाद भी लोग पीछे हटने के बजाय और तेजी से जुड़ते चले गए। दिलचस्प बात यह है कि अब यह सिर्फ एक पेज या नाम तक सीमित नहीं रहा। छिपकली पार्टी, बाज पार्टी और न जाने कितने नए डिजिटल संगठन पैदा हो रहे हैं। लखनऊ के जफर अली खान ने बाज पार्टी लॉन्च करते हुए लोगों से जुडऩे की अपील की तो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते उसके पोस्ट वायरल होने लगे। कुछ लोग इसे लोकतंत्र का मजाक बता रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि यह असली राजनीति के प्रति जनता की निराशा का आईना है। सवाल बड़ा है क्या सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन का मंच नहीं रहा? क्या इंटरनेट की यह फर्जी और व्यंग्यात्मक पार्टियां आने वाले समय में असली राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करेंगी? क्योंकि इतिहास गवाह है कि कई बार मजाक में शुरू हुई चीजें ही सबसे बड़े आंदोलन में बदल जाती हैं।
वायरल ट्रेंड को विपक्ष के लिए एक अवसर : थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी की अचानक और व्यापक लोकप्रियता पर हैरानी जताई और इस वायरल ट्रेंड को विपक्ष के लिए एक अवसर बताया जिसे उन्हें अवश्य भुनाना चाहिए। शशि थरूर ने इंस्टाग्राम पर लिखा, कॉकरोच जनता पार्टी के उदय से मैं बेहद हैरान हूं, जिसने महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ (अब 1.9 करोड़ से अधिक) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक पार्टी के इंस्टाग्राम पर 1.9 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो चुके थे। एक्स अकाउंट को ब्लॉक किए जाने पर थरूर ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाया और कहा कि अकाउंट को ब्लॉक करना विनाशकारी और बेहद नासमझी भरा कदम है। उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को खुद को अभिव्यक्त करने के लिए एक मंच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मैं युवाओं की हताशा को समझता हूँ और जानता हूँ कि वे इससे क्यों जुड़ रहे हैं। यही कारण है कि X पर खाता बंद करना बेहद गलत और मूर्खतापूर्ण है। युवाओं को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का मंच मिलना चाहिए, इसलिए खाते को बंद करने के बजाय उसे चालू रहने दें!




