रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली कोर्ट से बड़ी राहत शिकोहपुर लैंड डील केस में मिली जमानत

बोले- न्याय सिस्टम पर भरोसा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इस फैसले के बाद गांधी परिवार में खुशी छा गई। वाड्रा ने कहा कि यह फैसला न्याय सिस्टम के भरोसे को और मजबूत करेगा।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शिकोहपुर लैंड डील मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें जमानत दे दी है। इस दौरान रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बात करते हूं कहा कि सब ठीक है, धन्यवाद। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी को सरकार मैनेज कर रही है और ईडी सरकार के कहने पर काम करती रहेगी। इसलिए, मैं हमेशा यहां रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा। जो भी फॉर्मैलिटीज होंगी, मैं उन्हें पूरा करूंगा। उन्होंने कहा, सब ठीक है… अगर हम चुनाव जीत रहे हैं, अगर हम अच्छा कर रहे हैं और लोग अभी भी मेरे परिवार को चाहते हैं, तो बाय डिफॉल्ट मुझे इससे निपटना होगा। मुझमें इसका सामना करने की काबिलियत है। मैं निडर हूं और मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।

मैं निडर हूं और मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं : रॉबर्ट वाड्रा

वाड्रा के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वे निडर हैं और कुछ छिपाना नहीं चाहते हैं, बस ईडी को झेलना है। उन्होंने कहा कि झेलने की क्षमता है, वह सबसे बड़ी चीज है। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी को सरकार चला रही है और ईडी सरकार के इशारों पर ही काम करती रहेगी। मुझे देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मैं हमेशा यहीं रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा। मैं निडर हूं और मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।

अगली सुनवाई 10 जुलाई

पुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए, जहां उन्हें कोर्ट से 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी गई। राउज एवेन्यू कोर्ट में वाड्रा के वकील ने अपनी दलील में कहा कि इस मामले में उन्हें पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने उनकी दलील सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

साल 2008 का है पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा मामला साल 2008 का है, जब गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में करीब 3.53 एकड़ जमीन का सौदा हुआ था। ईडी का आरोप है कि इस जमीन खरीद-फरोख्त में मनी लॉन्ड्रिंग और गड़बडिय़ां हुईं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। ईडी का कहना है कि इस सौदे में कई तरह की अनियमितताएं हुईं। एजेंसी के अनुसार, कंपनी के पास उस समय इतनी पूंजी नहीं थी, फिर भी जमीन खरीदी गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि इस डील में असली भुगतान नहीं किया गया और सेल डीड में गलत जानकारी दी गई। यहां तक कि एक ऐसे चेक का जिक्र भी किया गया जो कभी जारी ही नहीं हुआ या कैश नहीं हुआ। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि जमीन की कीमत को जानबूझकर कम दिखाया गया, जिससे स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की जा सके। ईडी ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत अपराध बताया है। अपनी शिकायत में ईडी ने कहा कि इस पूरे मामले में करीब 58 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) सामने आई है।

चुनाव में अधिकारियों पर बयान मामले में आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं

एमपी-एमएलए कोर्ट ने दी दो साल की सजा व लगाया जुर्माना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अधिकारियों को लेकर दिए गए विवादित बयान, ये तनखइया हैं, इनसे जूते साफ कराऊंगा मामले में अदालत ने सपा नेता को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा व पांच हजार का जुर्माना लगाया है।
शनिवार, 16 मई को एमपी-एमएलए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। उत्तर प्रदेश स्थित रामपुर में एमपी एमएलए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। 100 से ज्यादा मुकदमों का सामना कर रहे सपा नेता आजम खान को अब तक 11 मामलों में राहत मिल चुकी है, जबकि 6 मामलों में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है, फिलहाल आज़म खान अपने बेटे अब्दुल्लाह आजम खान के साथ रामपुर जिला जेल में बंद हैं, दोनों पर दो पैन कार्ड मामले में कार्रवाई हुई है और इसी केस में वे जेल में हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रं ट

याचिका दायर, एनटीए को भंग करने की मांग

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश में नीट परीक्षा के पेपर लीक का मामला जब जोर पकड़ रहा था, उसी दौरान शनिवार को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रं ट ने सुप्रीम कोर्ट में एनटीए को भंग करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की।
याचिका में मांग की गई है कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 186० के तहत स्थापित मौजूदा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को भंग कर दिया जाए और संसद के अधिनियम के माध्यम से एक नया वैधानिक ढांचा तैयार किया जाए। याचिका में केंद्र सरकार को संसद में एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा निकाय की स्थापना के लिए कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसे स्पष्ट कानूनी अधिकार, पारदर्शिता के मानदंड और संसद के प्रति जवाबदेही प्राप्त हो। यह याचिका पंजीकृत संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जिसमें एनईटी-यूजी 26 के संचालन में प्रणालीगत और भयावह विफलता का आरोप लगाया गया है और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों की मांग की गई है।

भोजशाला पर फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं: असदुद्दीन ओवैसी

एआईएमआईएम चीफ ने कोर्ट के आदेश की कड़ी आलोचना की
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इंदौर हाई कोर्ट के भोजशाला परिसर से संबंधित हालिया आदेश की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। हैदराबाद में बोलते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि यह फैसला बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद की कानूनी प्रक्रिया को प्रतिबिंबित करता है।
उन्होंने कहा, यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर दिए गए फैसले ने एक धर्म को सर्वोच्चता प्रदान की है, जबकि अन्य धर्मों के पूजा-पाठ के अधिकारों को प्रभावी रूप से कमजोर किया है। इसके अलावा, इस फैसले ने एक नई राह खोल दी है। कल कोई भी विभिन्न पूजा स्थलों की पवित्रता को चुनौती देने के लिए आगे आ सकता है। उन्होंने न्यायपालिका के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद मामले में पूजा स्थल अधिनियम को संविधान के मूल ढांचे से जोड़ा था, वहीं अब ऐसा प्रतीत होता है कि उस सिद्धांत की पूरी तरह से अनदेखी कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल अधिनियम के महत्व को स्वीकार करते हुए इसे संविधान के मूल ढांचे से जोड़ा था, एक ऐसा सिद्धांत जिसकी न्यायालय ने आज पूरी तरह से अनदेखी कर दी है। पूजा स्थल अधिनियम का मजाक उड़ाया जा रहा है। बाबरी मस्जिद मामले से सीधा संबंध स्थापित करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह फैसला बिल्कुल बाबरी मस्जिद मामले जैसा ही निकला है। बाबरी मस्जिद मामले में न्यायालय ने कहा था कि मुसलमानों का उस स्थल पर कब्जा नहीं था लेकिन इस मामले में आज तक उस स्थल पर कब्जा बना हुआ है।
उन्होंने कहा, मैंने पहले ही कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर आया फैसला त्रुटिपूर्ण था, जो पूरी तरह से आस्था के आधार पर दिया गया था. मैंने चेतावनी दी थी कि उस समय दिया गया यह फैसला अन्य कई मुद्दों को प्रभावित करेगा लेकिन उस समय कई लोगों ने मुझसे चुप रहने को कहा था। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा हुई है, लेकिन आगे की कानूनी लड़ाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रास्ता खुला हुआ है।

पेट्रोल-डीजल की महंगाई आफत बनकर आई, दाम बढऩे से भडक़े गिग वर्कर्स

पांच घंटे ठप रहेगी फूड डिलीवरी, पैसा बढ़ाने की मांग तेज
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतें अब लोगों को परेशान करने लगीं हैं। जहंा आम आदमी महंगाई की मार से आह करने लगा है। अब कीमत बढऩे के बाद गिग वर्कर्स देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। डिलीवरी करने वाले कामगार 2० रुपये प्रति किलोमीटर भुगतान की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही आज दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक देशभर में ऐप सेवाओं को बंद करने की अपील की है।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर अब गिग और ऐप आधारित वर्कर्स में असंतोष तेज हो गया है। गिग और प्लेटफॉर्म सेवा श्रमिक संघ (जीआईपीएसडब्ल्यूयू) ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। संघ का कहना है कि 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि ने लाखों गिग वर्कर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यूनियन के मुताबिक करीब चार वर्षों बाद ईंधन की कीमतों में यह पहली बड़ी राष्ट्रीय स्तर की बढ़ोतरी है।जीआईपीएसडब्ल्यूयू के अनुसार देशभर में लगभग 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स इस फैसले से प्रभावित होंगे। इनमें फूड डिलीवरी, कैब सेवा, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।

कीमतें बढऩे से कामगारों पर अतिरिक्त बोझ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के साथ पहले से बढ़ी एलपीजी कीमतों ने भी कामगारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।

न्यूनतम 2० रुपये प्रति किलोमीटर भुगतान करने की मांग

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स इस सेक्टर को छोडऩे के लिए मजबूर हो सकते हैं। सीमा सिंह ने सरकार के साथ-साथ स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों से भी न्यूनतम 2० रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐप आधारित कर्मचारी भीषण गर्मी और खराब मौसम में लगातार दोपहिया वाहन चलाकर काम करते हैं, इसलिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ रहा है। यूनियन ने सभी गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे आज दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक ऐप सेवाएं बंद रखकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।

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