जेठ की तपती धूप में तड़पते मिले गोवंश, मीरजापुर की गौशालाओं की खुली पोल

मीरजापुर के महोगढ़ी और गलरा गौ आश्रय स्थलों के निरीक्षण में कई गोवंश बिना ईयर टैग और तेज धूप में खड़े मिले। संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए अतिरिक्त टिनशेड और बेहतर व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच पशुओं की सुरक्षा और देखभाल को लेकर प्रशासनिक दावों की हकीकत मीरजापुर में सामने आई। शुक्रवार को पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक के निरीक्षण के दौरान कई ऐसी कमियां मिलीं, जिन्होंने गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। जेठ की तपती दोपहर में कई गोवंश खुले आसमान के नीचे खड़े मिले, जबकि अधिकांश पशुओं के कानों में ईयर टैग भी नहीं लगाए गए थे।

मामला मीरजापुर के हलिया क्षेत्र स्थित महोगढ़ी और गलरा गांव के गौ आश्रय स्थलों का है, जहां संयुक्त निदेशक (प्रशासन) पशुपालन निदेशालय उत्तर प्रदेश डॉ. प्रदीप कुमार ने निरीक्षण किया। उनके साथ बीडीओ हलिया विजय शंकर त्रिपाठी भी मौजूद रहे।

बिना ईयर टैग मिले कई गोवंश

निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि दोनों गौ आश्रय स्थलों पर कई गोवंशीय पशु बिना ईयर टैग के पाए गए। इस पर संयुक्त निदेशक ने मौके पर मौजूद पशुचिकित्साधिकारी कमलेश कुमार और नीलम सिंह को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी गोवंशों को जल्द से जल्द ईयर टैग लगाए जाएं ताकि पशुओं की पहचान, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था बेहतर हो सके। अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि गोवंशों की देखभाल में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चिलचिलाती धूप में खड़े मिले पशु

निरीक्षण के दौरान जब संयुक्त निदेशक करीब दोपहर साढ़े बारह बजे गलरा गौ आश्रय स्थल पहुंचे तो अधिकांश पशु तेज धूप में खड़े दिखाई दिए। गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त छाया की व्यवस्था नहीं मिली। स्थिति देखकर संयुक्त निदेशक ने ग्राम सचिव मनोज गौतम और संबंधित अधिकारियों को तुरंत अतिरिक्त टिनशेड लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में पशुओं के लिए छाया और पानी की समुचित व्यवस्था बेहद जरूरी है।

हरे चारे को लेकर भी उठे सवाल

महोगढ़ी गौ आश्रय स्थल पर भूसा और पोषाहार पर्याप्त मात्रा में मिला, लेकिन निरीक्षण के समय हरे चारे की व्यवस्था दिखाई नहीं दी। जब संयुक्त निदेशक ने इस संबंध में सवाल पूछा तो प्रधान पति अरुण मिश्रा ने दावा किया कि सुबह और शाम पशुओं को हरा चारा दिया जाता है। हालांकि संयुक्त निदेशक ने मौके की स्थिति देखकर नाराजगी जताई और कहा कि चरनी और पशुओं की हालत देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता कि नियमित रूप से हरा चारा दिया जा रहा है। निरीक्षण के कुछ देर बाद कर्मचारियों द्वारा ज्वार का हरा चारा लाकर पशुओं को खिलाया गया।

स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षा के निर्देश

निरीक्षण के दौरान संयुक्त निदेशक ने गोवंशों के स्वास्थ्य परीक्षण, साफ-सफाई और धूप से बचाव को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में गौ आश्रय स्थलों पर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है, क्योंकि लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलरा गौ आश्रय स्थल पर गोवंशों के लिए पर्याप्त छाया व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

मीरजापुर में हुए इस निरीक्षण ने एक बार फिर गौ आश्रय स्थलों की जमीनी स्थिति को चर्चा में ला दिया है। सरकार की ओर से पशुओं की देखभाल के लिए बजट और व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन निरीक्षण में सामने आई कमियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और जवाबदेही तय हो, तो गौ आश्रय स्थलों की स्थिति में काफी सुधार लाया जा सकता है।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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