भारतीय शिक्षा प्रणाली पर आरएसएस व भाजपा का कब्जा: राहुल

  • कांग्रेस सांसद बोले- भारत एआई में कुछ नहीं बना रहा
  • कहा- एआई के क्षेत्र में दो ही खिलाड़ी, एक अमेरिका और दूसरा चीन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षा पर वैचारिक हमला हो रहा है और एक खास तरह की विचारधारा थोपी जा रही है। उन्होंने केरल के मारियन कॉलेज कुट्टिक्कानम में छात्रों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि अगर आप कुलपतियों को देखें, तो उनमें से बड़ी संख्या में कुलपति इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि वे आरएसएस से जुड़े हैं। बेशक, इसे रोकना होगा। भारतीय शिक्षा प्रणाली को विशेष रूप से आरएसएस के विभाजनकारी दृष्टिकोण तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। विपक्ष के नेता ने दावा किया कि भारत एआई के आगमन में सफल नहीं रहा है, और ऐसा प्रतीत होता है कि वे प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे थे, जिन्होंने देश की क्षमता और भविष्य में वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली देश बनने के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया था।
राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान कहा, एआई के क्षेत्र में दो ही खिलाड़ी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन। दुर्भाग्य से, भारत रोबोटिक्स, एआई या आधुनिक प्रौद्योगिकी, किसी भी क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी नहीं है। निश्चित रूप से, अमेरिका या चीन की तुलना में तो बिल्कुल भी नहीं। आपने एआई शिखर सम्मेलन में ही देखा कि एक चीनी रोबोट भारतीय रोबोट होने का दिखावा कर रहा था। अगर आप एआई में शक्तिशाली बनना चाहते हैं, तो आपको अपने डेटा पर नियंत्रण रखना होगा… प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में किए गए अमेरिकी समझौते के तहत हमारा सारा डेटा संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंप दिया गया है… हमने पिछले कुछ हफ्तों में एआई में अपनी क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचाया है। सेवा और सॉफ्टवेयर उद्योग में नौकरियां, जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार थीं, एआई के कारण खत्म हो जाएंगी। मुझे चिंता है कि डेटा, विनिर्माण और गतिशीलता के क्षेत्र में एक परिवर्तन हो रहा है, और हम बस इसे देख रहे हैं। राहुल ने हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर भी कटाक्ष किया, जिसकी विपक्ष ने किसानों के खिलाफ जाने का दावा करते हुए कड़ी आलोचना की है।

चाय के बागानों में महिलाओं के बीच पहुंचे नेता प्रतिपक्ष

राहुल अपनी केरल यात्रा के दौरान एक बार फिर अपने चिर-परिचित जन-संपर्क वाले अंदाज में नजर आए। तिरुवनंतपुरम रवाना होने से पहले राहुल ने इडुक्की जिले के पीरुमाडे में स्थित ग्लेमेरी एस्टेट में चाय बागान की महिला श्रमिकों के साथ समय बिताया। जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से रवाना होने के लिए जा रहे थे। रास्ते में जब उन्होंने चाय के बागानों में महिलाओं के एक समूह को काम करते देखा, तो उन्होंने तुरंत अपना काफिला रुकवाने का निर्देश दिया। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल और सांसद डीन कुरियाकोस भी मौजूद थे। राहुल गांधी ने महिला श्रमिकों से बातचीत की और उनके मेहनताने एवं चाय की पत्तियां तोडऩे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। महिला कामगारों ने कांग्रेस नेता को अपने काम के बारे में समझाया और उन्हें दिखाया कि चाय की पत्तियां तोडऩे वाली मशीन का उपयोग कैसे किया जाता है। बातचीत के बाद राहुल ने वहां से रवाना से पहले श्रमिकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। राहुल छात्रों से बातचीत करने के लिए शुक्रवार को कुट्टिक्कानम स्थित मरियन कॉलेज पहुंचे थे। वह शुक्रवार रात पीरुमाडे के एक रिसॉर्ट में रुके थे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए शनिवार सुबह तिरुवनंतपुरम रवाना हुए।

फिल्म, टेलीविजन और मीडिया का हथियार के रूप में हो रहा प्रयोग

कांग्रेस के आधिकारिक एक्स ने राहुल गांधी की ओर से एक पोस्ट में लिखा है, वास्तव में कोई भी केरल स्टोरी नहीं देख रहा है। यह दिखाता है कि इस देश के अधिकांश लोग केरल को समझते हैं और इसकी परंपराओं और संस्कृति की सराहना करते हैं। इस नोट में यह भी दावा किया गया है, फिल्मों, टीवी और मीडिया का दुरुपयोग हथियार के रूप में किया जा रहा है। राहुल गांधी ने टिप्पणी की कि फिल्म को कोई देख ही नहीं रहा। वहीं भाजपा सांसद मनोज तिवारी की पत्नी ने फिल्म का बचाव करते हुए इसे समाज का दर्पण बताया। पोस्ट में लिखा है, इनका इस्तेमाल लोगों को बदनाम करने, समुदायों को अलग-थलग करने और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए किया जा रहा है, ताकि कुछ समूहों को फायदा हो जबकि अन्य को नुकसान पहुंचे। नोट में आगे लिखा है, अगर कोई व्यक्ति किसी खास तरह की फिल्म बनाना चाहता है, मीडिया में कुछ कहना चाहता है या किसी खास विचार का बचाव करना चाहता है, तो उस पर हमला किया जाता है और अक्सर उसे बोलने नहीं दिया जाता। मैं इसका लगातार अनुभव करता हूं। नोट में आगे यह भी जोड़ा गया है, दूसरी ओर, कुछ खास विचारों को जितना चाहे उतना फैलाया और प्रचारित किया जा सकता है, और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

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