बांदा में खनन पर बवाल, विधायक बोले- सरकार के संरक्षण में रेगिस्तान बन रहा है जिला

बांदा जनपद में अवैध खनन, ओवरलोडिंग और प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा जनपद में अवैध खनन, ओवरलोडिंग और प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

समाजवादी पार्टी के बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिले में खनन माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्राकृतिक संसाधनों का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहा है। यह बयान उन्होंने समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दिया।

“नदियों और पहाड़ों का हो रहा विनाश” – विधायक का आरोप

प्रेस वार्ता में विधायक विशंभर सिंह यादव ने कहा कि जिले में हालात चिंताजनक हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नदियों का सीना लगातार छलनी किया जा रहा है,पहाड़ों को विस्फोटकों (डायनामाइट) से उड़ाया जा रहा है,खनन माफिया नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं

प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है,उन्होंने कहा कि इसके गंभीर परिणाम अब पर्यावरण और जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

भीषण गर्मी और जल संकट का बढ़ता खतरा

विधायक ने कहा कि अवैध खनन और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण बांदा जिला लगातार भीषण गर्मी की चपेट में है। उन्होंने दावा किया कि बीते मई माह में बांदा तीन दिनों तक दुनिया के सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल रहा।

उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा जाएगा,तापमान और अधिक बढ़ेगा,पर्यावरणीय असंतुलन गंभीर रूप लेगा,स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित होगा.

नदियों के अस्तित्व पर संकट

विशंभर सिंह यादव ने कहा कि केन, बागेन, रंज और चंद्रावल जैसी नदियां, जो कभी क्षेत्र की जीवनरेखा थीं, आज अवैध खनन के कारण अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, जिससे नदी तंत्र कमजोर हो रहा है और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।

वन विभाग और पौधारोपण पर सवाल

विधायक ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों पौधे लगाने के सरकारी दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि: पौधारोपण केवल कागजों में दिखाया जाता है,जिले में वन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम होता जा रहा है,करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परिणाम नगण्य हैं,उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

चरका खदान और ग्रामीणों की समस्या

प्रेस वार्ता में विधायक ने चरका खदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खदान संचालकों द्वारा: मरका से चरका और चरका से बीरा तक सड़क मार्ग पर मिट्टी डालकर रास्ता बाधित किया गया है

2 से 3 फीट तक रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया है,बरसात में 15 से 20 गांवों का संपर्क टूटने का खतरा है,उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

गंभीर आरोप और चेतावनी

विधायक विशंभर सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खनन माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो:

बांदा में जल संकट और गहरा जाएगा,बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो सकता है,तापमान और अधिक बढ़ सकता है,पर्यावरणीय संकट विकराल रूप ले लेगा.

प्रेस वार्ता में मौजूद नेता और कार्यकर्ता

इस प्रेस वार्ता के दौरान कई समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे: लोकसभा प्रभारी उमेश यादव,ओम नारायण त्रिपाठी विदित,प्रमोद गुप्ता राजाप्रमोद निषाद,एवं अन्य कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी.

बांदा जिले में अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां एक ओर समाजवादी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।

रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा

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