ईरान के समर्थन में खुलकर उतरा रूस, ट्रंप की धमकी पर चेतावनी-दखल दिया तो अंजाम होंगे बुरे

मंहगाई और गिरती इकोनॉकी को लेकर शुरु हुआ प्रदर्शन सत्ता के गलियारे तक पहुंच गया है। पहले रजा पहलवी की अपील पर और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर प्रदर्शन तेज हो गया है। कल अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों के समर्थन में खुलकर अपनी बात कही थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: छोटे देशों पर ताकत की धौंस जमाकर वहां के नेचुरल रिसोर्स पर कब्जा करने वाले डोनाल्ट ट्रंप को जोर का झटका लगा है। वेनेजुएला के तेल और सोने की खानों पर कब्जा करने के बाद ट्रंप सोच रहे थे कि ईरान के तेल और गैस पर कब्जा करके पूरी दुनिया में मनमाने दामों पर तेल बेचेंगे लेकिन अचानक ईरान के मामले को लेकर रुस सामने आ खडा हो गया।

एक ओर जहां ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा है कि ‘कब्जा करो मदद आ रही है’ तो दूसरी ओर रुस ट्रंप के विरोध में कड़े तेवर अपनाए हैं। जैसे की रुस के विरोध का बयान वायरल हुआ है, हड़कंप मच गया है। कैसे और कहां ट्रंप को जोर का झटका रुस की अचानक एंट्री से लगा है और क्यों 24 घंटे बीत जाने के बाद भी ट्रंप की तथाकथित मदद ईरान नहीं पहुंची है।

सच यह है कि ईरान के हालत बहुत खराब हैं, देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। ईरान की इस्लामिक सेना और आम जनता के बीच खुला संघर्ष चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जो खबरें अब तक निकल कर सामने आई हैं उसमें बताया जा रहा है कि ईरान में सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 2,571 हो गई है। यह दावा अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बुधवार को किया। मानवाधिकार संगठन के अनुसार, मरने वालों में 2,403 लोग प्रदर्शनकारी थे, जबकि 147 लोग सरकार से जुड़े बताए गए हैं। इसके अलावा, 12 बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब तक 18,100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

यह आंकड़ा हाल के वर्षों में ईरान में हुए किसी भी आंदोलन की तुलना में कहीं अधिक है। ईरान में पिछले 15 दिनों से ज्यादा से संघर्ष चल रहा है। मंहगाई और गिरती इकोनॉकी को लेकर शुरु हुआ प्रदर्शन सत्ता के गलियारे तक पहुंच गया है। पहले रजा पहलवी की अपील पर और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर प्रदर्शन तेज हो गया है। कल अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों के समर्थन में खुलकर अपनी बात कही थी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके प्रदर्शनकारियों को ईरानी देशभक्त कहा और उन्हें प्रदर्शन जारी रखने तथा सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करने को कहा। उन्होंने लिखा कि प्रदर्शन जारी रखिए, मदद आ रही है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानियों को साफ़ संदेश दिया है। उन्होंने ईरानी लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि हत्यारों और हमलावरों के नाम याद कर लेना, क्योंकि उन्हें इसकी बड़ी क़ीमत चुकानी होगी। ट्रंप ने पोस्ट के अंत में एमआईजीए लिखा।

इसका मतलब है मेक ईरान ग्रेट अगेन यानी ईरान को फिर से महान बनाओ। यह उनका नया नारा है, जो अमेरिका के मेक अमेरिका ग्रेट एगेन से मिलता-जुलता है। एक ओर जहां ईरानियों का खुला समर्थन किया था तो वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने ईरान के नेताओं के साथ संभावित सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्या रुक नहीं जाती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। ट्रंप ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को मारने वालों को बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि इससे डरने के बजाय ईरान की खामेनेई सरकार ने सरेआम फांसी देने का ऐलान कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि सरकार ने 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी को फांसी पर लटकाने का फैसला किया है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इरफान को आज ही फांसी दी जा सकती है। इस बीच, ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ने ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को -ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारे- करार दिया। यह बयान ट्रंप के मदद आ रही है वाले सीबीएस न्यूज को दिए बयान के जवाब में आया है।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने एक्स पर लिखा है कि- हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम घोषित करते हैं। नंबर एक – ट्रंप, नंबर दो – नेतन्याहू। लारीजानी ने वाशिंगटन और तेल अवीव पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया, जिससे हजारों लोगों की जान गई है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया, इसे देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में अमीर सईद इरावानी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल नागरिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं, खासकर युवाओं की मौतों के लिए। यह पत्र संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भी भेजा गया था और यह मंगलवार को ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में लिखा गया था।

लेकिन अब पूरे मामले पर बड़ी खबर सामने आई है। रुस खुलकर ईरान की मदद के लिए उतर पडा है। ट्रंप अभी तक समझ रहे थे कि पिछली बार की तरह इस बार भी ईरान के समर्थन में रुस चीन बिल्कुल नहीं आएगा। लेकिन इस बार ट्रंप का गेम उल्टा पड़ गया है। जैसे ही वॉशिंगटन से धमकी आई, मॉस्को से उसकी काट भी आ गई। रूस ने दो टूक शब्दों में अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगर अमेरिका ने सैन्य दखल की कोशिश की, तो इसके अंजाम न केवल अमेरिका के लिए बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए विनाशकारी होंगे। रूस का ये रुख बताता है कि वो ईरान को गिरने नहीं देगा। पुतिन जानते हैं कि अगर आज ईरान गया, तो कल निशाना रूस भी हो सकता है। इसलिए पुतिन ने ट्रंप के सामने एक ऐसी लाल रेखा खींच दी है, जिसे पार करना किसी सुसाइड मिशन से कम नहीं होगा। ऐसे में साफ है कि दुनिया अब दो धड़ों में बंट चुकी है। एक तरफ वो ताकतें हैं जो लोकतंत्र के नाम पर देशों को बर्बाद करना चाहती हैं, और दूसरी तरफ रूस और ईरान जैसे देश हैं जो अपनी संप्रभुता के लिए आखिरी दम तक लड़ने को तैयार हैं। ट्रंप की मदद वाली धमकी और रूस की चेतावनी ने मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। अगर ट्रंप ने कोई भी गलत कदम उठाया, तो ये सिर्फ ईरान की जंग नहीं होगी, ये तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है। क्योंकि रूस ने साफ कर दिया हैकि अब पीछे हटने का वक्त नहीं है।

वैसे भी वेनेजुएला के बाद ईरान पर हमला सिर्फ एक कब्जा नहीं है बल्कि दुनिया के तेल पर ट्रंप की मनमानी होने जा रही है। क्योंकि अरब कंट्री के ज्यादातर देशों से तेल का कारोबार अमेरिका ही करता है दुनिया के दो बड़े तेल भंडार ईरान और वेनेजुएला थे। ट्रंप का वेनेजुएला पर कब्जा हो चुका है और अब अगर ईरान पर भी अमेरिका का कब्जा या अमेरिकी की कठपुथली सरकार बन गई तो एक बात तय है कि पूरी दुनिया के तेल पर अमेरिका का अकेला राज होगा। तेल पर ट्रंप की मनमानी तो चलेगी है साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सभी देशों की करेंसी घट जाएगी और अमेरिका पूरी दुनिया पर अब से कहीं ज्यादा हॉवी हो जाएगा और ऐसे में सबसे बड़ा खतरा रुस और चीन के लिए होगा।

ऐसे में रुस के रुख से ये बात बहुत हद तक साफ हो गई है कि इस बार मिडिल ईस्ट में ट्रंप की राह आसान नहीं है और यही वजह है कि ट्रंप ने कल दावा किया था कि मदद आ रही है लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक अमेरिका ने ईरान पर अटैक नहीं किया है। इससे कहीं न कहीं ये सवाल जरुर खडा हुआ है कि रुस के बीच में आ जाने से ट्रंप कहीं न कहीं बैकफुट पर जाते दिख रहे हैं लेकिन कई एजेंसियां दावा कर रही हैं कि ट्रंप का हमला हो सकता है।

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