संजय राउत के दावे से मचा सियासी भूचाल, चढ़ावे की चोरी पर सवालों के घेरे में बीजेपी
संजय राउत ने कहा, "राम मंदिर के दानपात्र में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है."

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा में एक तरफ हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग उठती है, समाज में नफरती बीज बोये जा रहे हैं। हिन्दू-मुस्लमान को धर्म के नाम पर लड़वाया जा रहा है। और उसी की आंड में शिकार खेला जा रहा है।
आपने जिस धर्म और भगवान के नाम पर भाजपा ने अपनी चुनावी पारी चमकाई आज उसी भाजपा सरकार की नाक के नीचे से राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी हो है। लेकिन अंधभक्त हैं कि अभी भी बस मोदी-मोदी-मोदी करते नजर आ रहे हैं।
खैर अंधभक्तों की आँखों पर भले ही पट्टी चढ़ी हो लेकिन विपक्ष लगातार चढ़ावे के मुद्दे को उठा रहा है। चढ़ावे की चोरी का मामला गरमाया हुआ है इसकी लपट यूपी तक ही सीमित नहीं है बल्कि दुनियाभर में भाजपा सरकार की भारी थू-थू हो रही है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र में भी इस मामले को लेकर सियासी पारा हाई है।
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे दल के सांसद संजय राउत ने राम मंदिर के मुद्दे को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोल दिया है. संजय राउत ने कहा, “राम मंदिर के दानपात्र में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.” राउत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को इसलिए रोका गया क्योंकि वे इसी मुद्दे को उठाने वाले थे. उन्होंने कहा कि महमूद ग़जनवी ने सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटा था, लेकिन बीजेपी ने राम मंदिर को 70 बार लूटा है.
राउत ने इसे देशद्रोह और रामद्रोह तक करार दिया. संजय राउत ने कहा कि उनकी उद्धव ठाकरे से इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और अब वे राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल सहित सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं के साथ अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने की योजना बनाएंगे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर किसी एक दल या व्यक्ति की जागीर नहीं है, बल्कि भगवान राम पूरे देश के हैं.
राउत ने राम मंदिर आंदोलन में अपनी भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, CBI के आरोपी भी रहे और लखनऊ कोर्ट में कई बार पेश होकर बयान दर्ज करा चुके हैं. उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवसैनिकों ने भी इस आंदोलन में बलिदान दिया है और उन्हें उस पर गर्व है. न सिर्फ संजय राउत बल्कि अन्य विपक्षी नेता भी भाजपा पर आगबबूला हैं।
वहीं इसी बीच आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने भाषणों और इंटरव्यू में राम मंदिर का लगातार जिक्र करते हैं और चुनावों के दौरान उसके नाम पर वोट भी मांगते हैं. उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर बनने के बाद पिछले ढाई साल में अमित शाह एक बार भी अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने या माथा टेकने नहीं गए.
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से हर सनातनी आहत और पीड़ित है. उन्होंने कहा कि उनकी नजर में भाजपा के लोग भगवान राम को सच्चे मन से नहीं मानते, बल्कि केवल सत्ता हासिल करने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करते हैं. केजरीवाल ने कहा कि कानून के तहत इस मामले में जिम्मेदार लोगों को दंड मिलना चाहिए.
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अयोध्या और एसआईटी की जांच को लेकर वह कल एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. साथ ही उन्होंने दावा किया कि आज के समय में आम आदमी पार्टी ही देश की ‘असली सनातनी पार्टी’ है और आरोप लगाया कि भाजपा ने सनातन का इस्तेमाल केवल राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए किया, जबकि उनकी पार्टी ने पंजाब में सनातन के लिए काम किया है.
वहीं सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि आज तक एक बार भी अमित शाह जी श्री राम मंदिर नहीं गए. श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुए ढाई साल हो गए. इन ढाई साल में एक बार भी वे भगवान राम के दर्शन करने नहीं गए.
इन ढाई सालों में उन्होंने 42 से ज़्यादा बार अपने भाषणों और इंटरव्यू में भगवान राम और मंदिर का ज़िक्र किया जिसमे कई बार राम और मंदिर के नाम पर वोट मांगा. लेकिन दर्शन करने नहीं गए. इनके लिए राम केवल सत्ता हासिल करने और पैसे कमाने का ज़रिया है. इनकी राम में कोई आस्था नहीं है.
गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मामला एक गंभीर मुद्दा बन गया है। अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और भगवान राम को चढ़ावा चढ़ाते हैं। इसमें नकदी, सोना-चांदी, आभूषण और दूसरे कीमती सामान शामिल होते हैं। लेकिन अब आरोप है कि इस चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी या गबन हुआ है। मंदिर का प्रबंधन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करता है।
यह ट्रस्ट स्वतंत्र माना जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है। विपक्ष कहता है कि इतनी बड़ी चोरी होने पर सरकार ने पहले कुछ नहीं किया। जब मामला सार्वजनिक हुआ तो एसआईटी बनाई गई। आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। उनसे करीब 80 लाख रुपये बरामद हुए। कुछ लोग कहते हैं कि यह सिर्फ छोटे कर्मचारी हैं, असली बड़े लोग बच गए।
भाजपा सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि ट्रस्ट पर नजर रखने की जिम्मेदारी कौन लेगा? योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एसआईटी बनाई, लेकिन विपक्ष कहता है कि यह जांच निष्पक्ष नहीं होगी। क्योंकि खुद भाजपा की सरकार जांच करा रही है। कुछ लोग कहते हैं कि चंपत राय जैसे बड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठे।
उन्होंने इस्तीफा दिया, लेकिन विपक्ष पूछता है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी पर सीएम और पीएम चुप क्यों हैं? यह मामला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया है। विपक्ष इसे भाजपा के खिलाफ बड़ा हथियार बना रहा है। वे कहते हैं कि राम मंदिर बनाने का श्रेय भाजपा लेती है, लेकिन रखरखाव और पारदर्शिता में नाकाम है। भक्तों का विश्वास टूटा है।
चोरी की अगर बात की जाए तो, मंदिर में दानपात्र हैं। कर्मचारी उन्हें खोलते हैं, गिनती करते हैं और बैंक में जमा करते हैं। आरोप है कि गिनती के दौरान कुछ पैसा निकाल लिया जाता था। कुछ कर्मचारियों के घर से नकदी, सोना बरामद हुआ। एक के घर गाय के गोबर के ढेर के नीचे पैसा छिपाया गया था। जांच में उनके खातों में अचानक पैसे बढ़े मिले। विपक्ष पूछता है कि इतने सालों से ट्रस्ट चल रहा है, तो इतनी बड़ी चोरी कैसे छिपी रही? क्या ऊपर से संरक्षण था?
भाजपा का कहना है कि आरोपियों पर कार्रवाई हो रही है। आठ लोग जेल में हैं। अयोध्या बार एसोसिएशन ने कहा कि कोई वकील इनकी पैरवी नहीं करेगा। समाज भी इनका बहिष्कार कर रहा है। भाजपा कहती है कि यह कुछ बुरे तत्वों की करतूत है, पूरी पार्टी या सरकार को बदनाम नहीं करना चाहिए। लेकिन विपक्ष नहीं मान रहा। वे कहते हैं कि जब राम मंदिर का मुद्दा भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी कार्ड था, तो जवाबदेही भी उसी की होनी चाहिए।
लेकिन इस मामले ने हिंदू समाज में भी नाराजगी पैदा की है। राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भक्त दूर-दूर से चढ़ावा लेकर आते हैं। अगर उनका चढ़ावा लुट जाए तो गुस्सा स्वाभाविक है। विपक्ष इसे “राम को लूटा, देश को लूटा” कहकर प्रचार कर रहा है।
कई छोटे-बड़े नेता अयोध्या पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मीडिया में भी चर्चा तेज है।सरकार ने जांच को और समय दिया है। एसआईटी और रिपोर्ट मांगी जा रही है। बैंक ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं। लेकिन विपक्ष कहता है कि बिना सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के यह सफेद धोखा होगा।
भाजपा सरकार पर घेरा इसलिए भी कड़ा है क्योंकि राम मंदिर का निर्माण और उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने बहुत बड़े स्तर पर मनाया था। अब चोरी का मामला उनके लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया। विपक्ष पूछता है – जहां राम राज है, वहां चोरी कैसे? जहां योगी की सरकार “राम राज्य” की बात करती है,
वहां भक्तों के पैसे की सुरक्षा क्यों नहीं?यह मुद्दा सिर्फ चोरी का नहीं, पारदर्शिता का भी है। मंदिर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये मिलते हैं। 2024-25 में 327 करोड़ का आय बताया गया। इतने बड़े फंड का हिसाब-किताब साफ होना चाहिए। विपक्ष मांग कर रहा है कि पूरी ऑडिट हो, पुराने सालों के खाते खोले जाएं। इस घटना के बाद कई भक्त निराश हैं। वे कहते हैं कि राजनीति राम मंदिर को मत घसीटो।
लेकिन कुछ कहते हैं कि जवाबदेही जरूरी है, चाहे कोई भी पार्टी हो। भाजपा समर्थक कहते हैं कि विपक्ष बस राजनीति कर रहा है, क्योंकि उनके राज में मंदिर नहीं बना। लेकिन विपक्ष जवाब देता है कि मंदिर तो सबका है, चोरी किसी की भी हो, सजा होनी चाहिए।अभी जांच चल रही है। आठ आरोपी जेल में हैं। और नाम सामने आ सकते हैं। अगर बड़े लोग शामिल निकले तो विवाद और बढ़ेगा। 2027 चुनाव में यह मुद्दा कितना असर करेगा, यह देखना बाकी है। लेकिन फिलहाल भाजपा सरकार सवालों के घेरे में है।



