SIT जांच में चंपत राय को क्लीन चिट मिलते ही भड़क उठे संजय सिंह, भाजपाइयों की लगाई लंका

ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी गई है। यानी जांच टीम ने इन दोनों को चोरी में सीधे शामिल नहीं पाया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर सियासी पारा हाई चल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भाजपा राज में कैसे इतनी चोरी हो सकती है।

हिंदुत्व पर सियासी रोटी सेंकने वाली भाजपा आज राम मंदिर की चन्दा के बाद बैकफुट पर नजर आ रही है। अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी का मामला पिछले कुछ महीनों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लाखों भक्त अपनी आस्था के साथ नकदी, सोना-चांदी और अन्य चीजें भगवान राम के नाम पर चढ़ाते हैं। लेकिन कुछ लोगों ने उसी पवित्र चढ़ावे में सेंध लगा दी।

विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी गई है। यानी जांच टीम ने इन दोनों को चोरी में सीधे शामिल नहीं पाया। रिपोर्ट अब ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मामले में जांच शुरू होने के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था.

इस्तीफे के बाद चंपत राय ने अयोध्या में चार महीने की चातुर्मास साधना शुरू करने का फैसला किया था. वे 21 नवंबर तक अयोध्या में ही रहकर राम मंत्र का जाप और रामचरितमानस का पाठ करेंगे. वे रोज करीब छह घंटे मौन रहकर साधना करते हैं. 7 जून से वे रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास में है.

लेकिन अब चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है। जिसके बाद सियासी गलियारों में इसे लेकर भारी विरोध है। इस खबर के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भड़क उठे। उन्होंने जांच पर सवाल उठाए और चढ़ावा चोरों पर तीखा हमला बोला।

पूरा मामला जून 2026 में सामने आया था। ट्रस्ट ने खुद अनियमितताओं की शिकायत की थी। सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई। जांच में सीसीटीवी फुटेज देखे गए। 27 अप्रैल से 5 जून तक यानी करीब 40-42 दिनों में लगभग 70 बार नकदी चोरी की घटनाएं कैमरे में कैद हुईं।

गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां कपड़ों में, जेब में या जूतों में छिपाकर बाहर ले जाते दिखे। कुछ जगहों से सोने-चांदी के गहने भी गायब होने की बात आई। आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। ये सभी गिरफ्तार हो चुके हैं और जेल में हैं। इनके पास से करीब 80 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था।

दोनों से पूछताछ भी हुई। लेकिन एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट में इनके नाम आरोपियों में नहीं हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट और बैंक की व्यवस्था में बड़ी खामियां बताई गई हैं। सुरक्षा नियम नहीं लागू हुए, जेब रहित यूनिफॉर्म नहीं दी गई, फुल चेक नहीं हुआ। बैंक के साथ समझौतों में भी लचर व्यवस्था रही। लेकिन बड़े अधिकारियों पर सीधे चोरी का आरोप नहीं लगा।

इसी रिपोर्ट के आने के बाद संजय सिंह ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह जांच अधूरी और पक्षपातपूर्ण लगती है। चढ़ावा चोरों को बचाने का खेल चल रहा है। संजय सिंह ने पहले भी कई बार इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। उन्होंने एसआईटी को जमीन खरीद के दस्तावेज सौंपे थे। उनका आरोप था कि कुछ लोग सस्ती जमीन खरीदकर ट्रस्ट को महंगे दामों पर बेच रहे थे।

एक जमीन 2 करोड़ में खरीदी गई और कुछ ही मिनटों बाद 18 करोड़ में बेच दी गई। दूसरी जमीन 9 करोड़ की थी लेकिन 55 करोड़ में खरीदी गई। तीसरी 3 करोड़ की थी जो 24 करोड़ में ले ली गई। इन सौदों में चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम गवाह या खरीदार के रूप में आए। संजय सिंह ने पूछा कि इतनी बड़ी हेराफेरी में सिर्फ छोटे कर्मचारी कैसे दोषी ठहरा दिए गए? बड़े लोग कैसे बच गए?

संजय सिंह का कहना है कि भगवान राम के नाम पर इकट्ठा हुआ पैसा आम आदमी की मेहनत और आस्था का है। गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपनी कमाई का कुछ हिस्सा चढ़ावा देता है। लेकिन कुछ लोग उसी पैसे को अपनी जेब में ठूंस रहे थे। यह सिर्फ चोरी नहीं, आस्था के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में खामियां बताई गईं लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई।

सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे रही कि 70 बार चोरी हो गई और किसी को पता ही नहीं चला? गिनती वाले कर्मचारी किसकी सिफारिश पर रखे गए? टिन्नू यादव तो चंपत राय के करीबी बताए जाते हैं। फिर भी बड़े अधिकारियों को साफ चिट दे दी गई। संजय सिंह ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह रिपोर्ट सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़ने वाली लगती है। असली बड़े लोग बच रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही दूसरी एसआईटी पूरी ईमानदारी से जांच करे। जमीन सौदों की भी पूरी जांच हो।

बैंक की भूमिका भी साफ हो। ट्रस्ट में पारदर्शिता लाई जाए। उन्होंने इस मामले को लेकर एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि- चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, निर्माण कार्य में चोरी, जमीन ख़रीद में चोरी, हर चोरी के मुख्य आरोपी चंपत राय और अनिल मिश्रा SIT की जांच में बरी कैसे हो सकते हैं? मैंने जो जमीन घोटाले के कागज़ात SIT को सौंपें हैं उसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर हैं आख़िर वो बच कैसे सकते हैं?

यह मामला सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं है। पूरे देश के राम भक्तों की भावनाओं से जुड़ा है। मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये चंदा आया। श्रद्धालु दूर-दूर से आए। लेकिन अंदरूनी घोटाले ने आस्था को ठेस पहुंचाई।

इसे लेकर विपक्ष और जनता का कहना है कि चढ़ावा चोरों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, कानून सबके लिए बराबर है। अगर छोटी भूमिका वाले लोग जेल में हैं तो जिन्होंने व्यवस्था की कमजोरी बिठाई या नजरअंदाज की, उन पर भी सवाल उठने चाहिए।

एसआईटी रिपोर्ट में कहा गया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की कोई आपराधिक भूमिका नहीं मिली। लेकिन संजय सिंह मानते हैं कि नैतिक जिम्मेदारी तो बनती है। ट्रस्ट के मुखिया होने के नाते उन्हें पूरी निगरानी रखनी चाहिए थी। बार-बार ऑडिट में खामियां बताई गईं लेकिन सुधार नहीं हुए। नतीजा यह हुआ कि चोरी होती रही। अब रिपोर्ट आ गई है तो ट्रस्ट को तुरंत सुधार करने चाहिए। नई व्यवस्था लगे, पेशेवर लोग रखे जाएं, रोजाना हिसाब-किताब हो।

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