उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर को SC से झटका, दिल्ली हाई कोर्ट के सजा निलंबन के फैसले को पलटा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इससे पहले, इस मामले में सीबीआई (CBI) की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर इस मामले पर नए सिरे से फैसला करे। साथ ही, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट अपना नया निर्णय लेते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछला आदेश रद्द किए जाने के फैसले से बिल्कुल भी प्रभावित न हो।
क्या है मामला?
जून 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक 17 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के झांसे में उसे अपने घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने विधायक के प्रभाव के कारण शुरू में मुकदमा दर्ज नहीं किया।
मार्च-अप्रैल 2018 तक लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर किशोरी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया, जिसके बाद 9 अप्रैल 2018 को सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ।
इस दौरान पीड़िता के पिता को जेल भेज दिया गया, जहां अप्रैल 2018 में उनकी मौत हो गई। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और जुलाई 2018 में कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया।
भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। जुलाई 2019 में पीड़िता, उसके वकील और परिवार को ले जा रही कार में एक ट्रक ने टक्कर मार दी, जिसमें पीड़िता की दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। परिवार ने इसे सुनियोजित साजिश बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरा मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। पिता की मौत के मामले में भी उन्हें अतिरिक्त 10 साल की सजा हुई।



