पुलिस थानों में CCTV की कमी पर SC सख्त, गृह सचिव को किया तलब

सुप्रीम कोर्ट ने देश के पुलिस थानों में CCTV कैमरों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है ताकि देशभर में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिल सके.

4pm न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने देश के पुलिस थानों में CCTV कैमरों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है ताकि देशभर में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिल सके. जस्टिस विक्रम नाथ ने केरल मॉडल को अपनाने पर जोर दिया, जहां पुलिस निगरानी व्यवस्था सर्वोत्तम मानी गई है.

राजस्थान समेत देश के अन्य राज्यों के पुलिस थानों में CCTV कैमरों की कमी से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले पर
सोमवार (6 अप्रैल) सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को तलब करते हुए उन्हें
व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि भारत के गृह सचिव इस
न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहें ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निगरानी की जा रही योजना के कार्यान्वयन में
उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके.

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अगर आप कहते हैं कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो
दूसरे राज्य उसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?. वहीं जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि वे बैठक करके केरल
मॉडल के अनुसार विकास क्यों नहीं कर सकते?.

केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने ने बताया कि कई राज्यों ने इस दिशा में अच्छी प्रगति की है, लेकिन कुछ राज्य अभी भी पीछे हैं. वकील ने कहा कि इसमें शायद कुछ और राजनीतिक कारण भी शामिल हैं. दवे ने बताया कि केरल, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने मजबूत CCTV सिस्टम लागू किए हैं. खासकर केरल में पुलिस अधिकारी मोबाइल के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर सकते हैं. जब दवे ने कहा कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो जस्टिस नाथ ने कहा, “यदि आप कहते हैं कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो अन्य राज्य इसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?”.

झारखंड सीसीटीवी कैमरे लगाने में पीछे
नियमों का पालन न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने झारखंड को एक ऐसे राज्य के रूप में चिह्नित किया जहां सीसीटीवी कैमरे लगाने में बहुत कम प्रगति हुई है. कोर्ट ने दिल्ली और कुछ केंद्रीय एजेंसियों में भी कमियों का उल्लेख किया. बेंच ने पाया कि कई राज्यों में कैमरे लगाने का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड सिस्टम अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है.

पड़ोसी देशों से मंगाए गए सीसीटीवी पर कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिपोर्टों पर भी चिंता जताई जिनमें कहा गया था कि पड़ोसी देशों से मंगाए गए कुछ सीसीटीवी कैमरों को डेटा सुरक्षा जोखिमों के कारण हटाना पड़ सकता है. बेंच ने टिप्पणी की, ‘अब सरकार ने कुछ विशेष कैमरों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं’. कोर्ट ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में राज्य फंडिंग की कमी को कैसे संभालेंगे. केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश पारित नहीं किया गया है.

सुनवाई के दौरान, बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह योजना संयुक्त रूप से वित्तपोषित है, जिसमें राज्य 40%
और केंद्र सरकार 60% का योगदान दे रही है.बेंच ने कहा कि समन्वय की कमी को बहाना नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने कहा,’यदि केरल में सर्वोत्तम प्रणाली है, तो अन्य राज्य इसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?. कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी राज्य केरल मॉडल अपनाएं और केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक समान सिस्टम विकसित करें, ताकि पूरे देश में एकरूपता लाई जा सके और अधिकारियों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने का आग्रह किया.

अगली सुनवाई में गृह सचिव को पेश होने का आदेश
अपने आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की आगे की सुनवाई अगले दिन के लिए सूचीबद्ध की जाए और केंद्रीय गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के लिए कहा ताकि देश भर के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में कोर्ट की सहायता की जा सके.

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