महाराष्ट्र UCC पैनल को झटका: समिति की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, जस्टिस चव्हाण ने छोड़ी कमेटी
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने UCC पर आम लोगों से राय लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद का हवाला दिया है. इसके साथ ही उन्होंने समिति की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में UCC के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं. राज्य में UCC को लागू करने के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने के लिए मिति का गठन किया गया था.
इस समिति में जस्टिस आरसी चव्हाण के अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसजी मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल शामिल हैं.
बैठक के कुछ घंटों बाद भेजा इस्तीफा
जस्टिस चव्हाण ने 19 सितंबर को समिति की ऑनलाइन बैठक के कुछ घंटों बाद अपना इस्तीफा भेजा था. राज्य सरकार ने सोमवार (21 सितंबर) को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. यह इस्तीफा समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद आया है.
जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे के पीछे आम लोगों से राय लेने के लिए तैयार की जा रही प्रक्रिया और समिति की एक बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी का हवाला का हवाला दिया है. उन्होंने इसको लेकर आपत्ति जताई है. उनका कहना था कि जो शख्स समिति का सदस्य नहीं है, वो बैठक में कैसे आ सकता है.
जस्टिस चव्हाण ने क्या कहा
महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी की दूसरी बैठक ऑनलाइन हुई थी. बैठक में प्रमुख मुद्दों में से एक था UCC को लेकर महाराष्ट्र की जनता से सुझाव और राय लेने के लिए तैयार किए जाने वाले प्रश्नावली को अंतिम रूप देना.
जस्टिस चव्हाण के समिति को भेजे गए ईमेल के मुताबिक बैठक में कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि प्रश्नों के जवाब केवल ‘हां’ या ‘नहीं’ के रूप में लिए जाएं. साथ ही प्रश्नावली को विशेषज्ञों की मदद से जांचने का सुझाव भी दिया गया.
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पहले ही अपनी ओर से तैयार प्रश्नावली सदस्यों के साथ साझा कर चुकी थीं और वेबसाइट तैयार होने के बाद उसे अपलोड किया जाना था.
रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस चव्हाण ने कहा कि उन्होंने यह समझकर अपने विचार रखने की कोशिश की थी कि समिति का मकसद महाराष्ट्र के लोगों की राय जानना और विभिन्न मुद्दों पर आम सहमति तैयार करना है. हालांकि, बैठक की प्रक्रिया से उन्हें लगा कि जनता को सिर्फ तय सवालों पर हां या नहीं में जवाब देने का अवसर दिया जाएगा, ताकि आंकड़ों का विश्लेषण आसान हो सके.
गैर-सदस्य की मौजूदगी का भी जिक्र
इसके साथ ही जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे में समिति की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी का भी जिक्र किया. उनके मुताबित उस शख्स ने राज्य के अधिकारियों द्वारा तैयार वेबसाइट में और बदलाव की जरूरत बताई थी. इसके बाद समिति की अध्यक्ष ने अधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर जरूरी संशोधन करने का निर्देश दिया.
जस्टिस चव्हाण ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि बैठक में मौजूद वह शख्स समिति की प्रक्रिया में किस भूमिका में था. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि इस स्थिति से उन्हें लगा कि संभवतः राज्य के अधिकारियों को अपनी क्षमता को लेकर संदेह हो सकता है.
इसके बाद उन्होंने समिति से अपनी सीट खाली करने का फैसला किया, ताकि सरकार नए सदस्य की नियुक्ति कर सके. उन्होंने कहा कि समिति में काम करना उनके लिए सीखने का अनुभव रहा और UCC का विषय उनके लिए महत्वपूर्ण है.



