गुजरात में AAP को झटका | बड़े नेता का इस्तीफा | मोदी-शाह के ‘ऑपरेशन लोटस’ पर सियासी वार

गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है... जहां एक प्रमुख नेता के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है.. पंजाब में हाल ही में हुई बड़ी बगावत के बाद अब गुजरात में भी पार्टी की कमजोरी दिख रही है.. स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों से ठीक एक दिन पहले.. यानी 27 अप्रैल को पार्टी के गुजरात प्रदेश महासचिव.. और प्रमुख किसान नेता सागर रबारी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया.. सागर रबारी ने अपना इस्तीफा फेसबुक पोस्ट के जरिए घोषित किया.. और उन्होंने लिखा कि आज मैं आम आदमी पार्टी के साथ अपना सफर खत्म कर रहा हूं.. पार्टी की सदस्यता, पद और जिम्मेदारियों से खुद को मुक्त कर रहा हूं.. सभी साथियों का सहयोग के लिए दिल से शुक्रिया.. व्यक्तिगत संबंध और दोस्ती हमेशा बरकरार रहेगी..

वहीं यह इस्तीफा ऐसे वक्त पर आया है.. जब गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना आज यानी 28 अप्रैल को हो रही है.. रविवार 26 अप्रैल को मतदान हुआ था.. इसमें 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों.. और 260 तालुका पंचायतों के लिए कुल करीब 9,992 सीटों पर वोटिंग हुई.. 4.18 करोड़ से ज्यादा मतदाता थे.. सागर रबारी गुजरात किसान एकता मंच के संस्थापक ट्रस्टी भी हैं.. और उन्होंने 19 अगस्त 2021 को अहमदाबाद में AAP की सदस्यता ली थी.. उस समय पार्टी के वरिष्ठ नेता इसुदान गढ़वी और किशोर देसाई मौजूद थे.. रबारी ने किसानों के मुद्दों पर काफी काम किया.. वे खेती-किसानी, भूमि अधिग्रहण और किसानों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे..

इस्तीफे के बाद सागर रबारी ने साफ कहा कि वे भाजपा में नहीं जा रहे हैं.. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मैं वैचारिक रूप से शुरू से ही भाजपा के खिलाफ रहा हूं.. मेरे ऊपर कोई कानूनी मामला नहीं है.. और न ही कोई व्यावसायिक हित है.. जिसके चलते मुझे किसी पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सके.. उन्होंने बताया कि वे पार्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे.. इसलिए मतदान के बाद इस्तीफा दिया.. अब उनका पूरा फोकस गुजरात के किसानों पर रहेगा.. उन्होंने पांच मुख्य मांगें रखी हैं.. जिसमें राज्य में कृषि नीति बनाना.. बजट में कृषि को 50 प्रतिशत हिस्सा देना.. कृषि बुनियादी ढांचे में सरकार.. और सहकारी संस्थाओं का निवेश.. किसानों के कर्ज का एक बार माफी.. और किसानों के बच्चों को कृषि आधारित उद्योगों में ट्रेनिंग देना शामिल है..

आपको बता दें कि यह इस्तीफा AAP के लिए सिर्फ गुजरात का नहीं.. बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक और झटका है.. कुछ दिन पहले ही AAP के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी.. और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की.. इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल समेत अन्य नेता शामिल थे.. AAP नेताओं ने इसे भाजपा का ऑपरेशन लोटस बताया.. ऑपरेशन लोटस शब्द का इस्तेमाल विपक्षी दल अक्सर भाजपा पर आरोप लगाने के लिए करते हैं.. इसका मतलब होता है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके.. दबाव बनाकर या अन्य तरीकों से विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़ने की कोशिश करती है.. पंजाब में AAP की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करने के लिए भी यही आरोप लगाया गया..

गुजरात में सागर रबारी का इस्तीफा इसी सिलसिले का हिस्सा माना जा रहा है.. हाल ही में एक और किसान नेता राजू कर्पड़ा ने भी AAP छोड़कर भाजपा जॉइन की थी.. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि.. क्या गुजरात में भी बागियों की लंबी कतार लगने वाली है.. AAP गुजरात की कमान इसुदान गढ़वी के हाथों में है.. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के पूर्व मंत्री गोपाल राय को गुजरात का प्रभारी बनाया हुआ है.. उनके साथ दिल्ली के पूर्व विधायक गुलाब सिंह मटियाला भी सक्रिय हैं.. लेकिन पार्टी के अंदरूनी कलह, संगठनात्मक कमजोरी.. और लगातार नेताओं के जाने से AAP की स्थिति कमजोर होती दिख रही है..

गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं.. ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक तरह का सेमी-फाइनल हैं.. भाजपा पिछले कई दशकों से गुजरात में मजबूत है.. 2021 के स्थानीय चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की थी.. उस समय AAP ने सूरत नगर निगम में 27 सीटें जीतकर सरप्राइज दिया था.. और करीब 14 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था..

इस बार AAP ने करीब 5,000 सीटों पर चुनाव लड़ा.. पार्टी ने स्थानीय मुद्दों जैसे साफ-सफाई, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस किया.. लेकिन मतदान के दौरान ही पार्टी को झटके लगने शुरू हो गए.. मतदान 26 अप्रैल को हुआ.. शाम 6 बजे तक औसतन 57 प्रतिशत के आसपास मतदान दर्ज किया गया.. नगर निगमों में कम मतदान रहा.. जबकि ग्रामीण पंचायतों में ज्यादा.. गर्मी के कारण तीन लोगों की हार्ट अटैक से मौत भी हो गई.. जो चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाली घटना रही.. अब 28 अप्रैल को मतगणना होनी है.. सागर रबारी का इस्तीफा ठीक मतगणना से एक दिन पहले आया है.. जिससे AAP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में निराशा फैल सकती है..

सागर रबारी गुजरात में किसान आंदोलनों से जुड़े रहे नेता हैं.. और उन्होंने अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन और जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है.. वे ग्रासरूट स्तर पर मजबूत पकड़ रखते थे.. किसान एकता मंच के जरिए उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार से लड़ाई लड़ी.. AAP में शामिल होने के बाद वे पार्टी के किसान विंग में सक्रिय रहे.. और उन्होंने भाजपा पर किसानों को डराने.. और वोटरों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए थे.. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कहा था कि.. भाजपा AAP के बढ़ते समर्थन से डर गई है.. और सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के अकाउंट्स को प्रतिबंधित करने जैसी कोशिशें कर रही है..

लेकिन अब इस्तीफे में उन्होंने कोई तीखा आरोप नहीं लगाया.. उन्होंने कहा कि वे पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे.. कुछ सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से हो सकता है.. लेकिन सही वजह अभी साफ नहीं है क्योंकि रबारी ने विस्तार से कुछ नहीं बताया.. AAP गुजरात में 2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार पांच सीटें जीतकर आई थी.. लेकिन उसके बाद पार्टी की स्थिति मजबूत नहीं हो सकी.. कांग्रेस पहले से ही कमजोर है.. और AAP तीसरी ताकत बनने की कोशिश कर रही है..

लेकिन लगातार नेताओं के जाना, संगठन में कलह.. और भाजपा की मजबूत पकड़ AAP के लिए मुश्किल पैदा कर रही है.. पंजाब में सात राज्यसभा सांसदों के जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी AAP बैकफुट पर है.. AAP नेताओं का आरोप है कि भाजपा ऑपरेशन लोटस चला रही है.. इसमें केंद्रीय एजेंसियों का दबाव, व्यक्तिगत लाभ या अन्य तरीकों से नेताओं को तोड़ना शामिल है.. भाजपा इन आरोपों को हमेशा खारिज करती आई है.. गुजरात में भी कुछ नेता पहले ही AAP छोड़ चुके हैं.. अगर और बागी निकले तो पार्टी की स्थिति और कमजोर हो सकती है..

 

Related Articles

Back to top button