गुजरात निकाय चुनाव में बड़ा उलटफेर! BJP के गढ़ में AIMIM की एंट्री से बदला सियासी समीकरण

गुजरात के निकाय चुनाव में इस बार चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं... भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़ में AIMIM ने एंट्री कर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार एक नया राजनीतिक मोड़ देखने को मिला है.. जहां सत्तारूढ़ भाजपा ने ज्यादातर जगहों पर अपना दबदबा बनाए रखा.. वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने खासकर कच्छ इलाके में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.. यह चुनाव इसलिए भी खास माने जा रहे हैं.. क्योंकि AIMIM ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में पहली बार प्रभावी तरीके से एंट्री की है.. पार्टी ने करीब 400 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे.. और ओवैसी खुद चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे.. उन्होंने अहमदाबाद और भुज में रैलियां कीं.. जहां उन्होंने भाजपा की नीतियों.. और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर तीखा हमला बोला.. और लोगों से विकल्प चुनने की अपील की..

कच्छ जिले की भुज नगरपालिका में AIMIM को सबसे बड़ी सफलता मिली.. वार्ड नंबर 1 में पार्टी के तीन उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की.. सरफराज को 3705 वोट, मुख्तार को 3581 वोट.. और रोशन को 3370 वोट मिले.. इस वार्ड की चौथी सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की.. इस जीत से AIMIM ने कच्छ की राजनीति में अपनी जगह पक्की कर ली है..

भुज कच्छ जिले का मुख्य शहर है.. और यहां मुस्लिम आबादी की अच्छी संख्या है.. AIMIM की यह जीत स्थानीय मुद्दों जैसे बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के रोजगार पर आधारित थी.. पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं.. और वादा किया कि चुने जाने पर वे इन मुद्दों को प्राथमिकता देंगे.. यह पहला मौका है.. जब AIMIM ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में सीटें जीती हैं.. इससे पहले 2021 के स्थानीय चुनाव में पार्टी ने अहमदाबाद में कुछ सीटें जीती थी.. लेकिन कच्छ में यह पहली प्रभावी एंट्री है.. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले समय में कच्छ की राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है..

भुज के अलावा भरूच नगरपालिका में भी AIMIM ने अच्छा प्रदर्शन किया.. एक वार्ड में पार्टी ने सभी चार सीटें जीत लीं.. यह भी AIMIM के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.. क्योंकि भरूच भी मुस्लिम बहुल इलाकों में से एक है.. ओवैसी की पार्टी ने यहां भी स्थानीय विकास, सफाई व्यवस्था.. और अल्पसंख्यक समुदाय की समस्याओं को मुद्दा बनाया.. दूसरी ओर, गुजरात के बड़े शहरों में भाजपा ने अपना पुराना रुतबा बरकरार रखा.. सूरत नगर निगम के वार्ड नंबर 19 में भाजपा ने जीत हासिल की.. यहां असलम साइकिल वाले के बेटे को हार का सामना करना पड़ा.. असलम साइकिल वाले स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित नाम हैं.. और उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है.. लेकिन इस बार भाजपा के उम्मीदवार ने उन्हें मात दी..

अहमदाबाद के सैजपुर बोघा क्षेत्र में भी भाजपा पैनल ने जीत दर्ज की.. इस क्षेत्र में भाजपा का शहरी वोट बैंक मजबूत रहा.. अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे प्रमुख नगर निगमों में भाजपा ने ज्यादातर वार्डों पर कब्जा जमाए रखा.. पार्टी ने विकास कार्यों, सड़कों, पानी.. और सफाई व्यवस्था को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था.. भाजपा ने कुल 15 नगर निगमों में से कई पर मजबूत बढ़त बनाई.. गांधीधाम और भुज जैसे कच्छ के प्रमुख इलाकों में भी भाजपा ने नगरपालिका पर कब्जा किया.. हालांकि भुज के एक वार्ड में AIMIM ने सेंध लगाई..

जहां भाजपा ज्यादातर जगहों पर आगे रही.. वहीं कांग्रेस ने कुछ जगहों पर उलटफेर किया.. सूरत के झांखवा तालुका पंचायत सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार किशोर चौधरी ने भाजपा की भावना वासवा को 171 वोटों से हराया.. यह सीट भाजपा विधायक गणपतसिंह वासवा के प्रभाव वाले क्षेत्र में आती है.. कांग्रेस की यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है.. क्योंकि यह भाजपा के मजबूत गढ़ में हुई.. किशोर चौधरी ने स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं जैसे सिंचाई, सड़क और स्वास्थ्य केंद्रों पर फोकस किया.. इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है.. हालांकि कुल मिलाकर कांग्रेस का प्रदर्शन सीमित रहा..

गुजरात के इन निकाय चुनावों में 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाएं, 34 जिला पंचायतें.. और 260 तालुका पंचायतें शामिल थी.. कुल करीब 9,992 सीटों पर चुनाव लड़ा गया.. 4.18 करोड़ से ज्यादा मतदाता थे.. मतदान 26 अप्रैल को हुआ और 28 अप्रैल को मतगणना हुई.. मतदान प्रतिशत औसतन 57 प्रतिशत के आसपास रहा.. नगर निगमों में कम मतदान हुआ.. जबकि ग्रामीण पंचायतों में ज्यादा मतदान देखा गया.. गर्मी के कारण तीन लोगों की हार्ट अटैक से मौत भी हो गई.. जिससे चुनावी माहौल थोड़ा प्रभावित हुआ..

वहीं ये चुनाव 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले एक सेमीफाइनल की तरह देखे जा रहे थे.. भाजपा पिछले कई सालों से राज्य में मजबूत है.. 2021 के स्थानीय चुनाव में भी भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की थी.. इस बार भी पार्टी ने सैकड़ों सीटें बिना मुकाबले जीत ली थी.. AIMIM की एंट्री ने हालांकि राजनीतिक समीकरणों में नया रंग भर दिया है.. ओवैसी की पार्टी मुख्य रूप से मुस्लिम वोटों पर फोकस करती है.. और अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाती है.. गुजरात में मुस्लिम आबादी करीब 9–10 प्रतिशत है.. और कच्छ, भरूच, अहमदाबाद जैसे इलाकों में उनकी संख्या ज्यादा है..

ओवैसी ने गुजरात में सक्रिय प्रचार किया.. और उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां अल्पसंख्यकों के खिलाफ हैं.. और लोगों को एक मजबूत विकल्प की जरूरत है.. AIMIM ने इस बार गुजरात में लगभग 400 वार्डों में उम्मीदवार खड़े किए.. भुज और भरूच में मिली सफलता पार्टी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है.. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि.. अगर AIMIM अपने संगठन को मजबूत करती रही.. और स्थानीय मुद्दों पर काम करती रही.. तो आने वाले विधानसभा चुनावों में भी वह कुछ सीटों पर प्रभाव डाल सकती है.. हालांकि भाजपा का शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क अभी भी चुनौती बना हुआ है..

आम आदमी पार्टी ने इस बार भी 5,000 सीटों पर चुनाव लड़ा.. पिछले 2021 के चुनाव में सूरत में 27 सीटें जीतकर पार्टी ने सबको चौंका दिया था.. लेकिन इस बार कुछ सीटें जरूर मिलीं.. मगर बड़े स्तर पर सफलता नहीं मिली.. साथ ही पार्टी को गुजरात प्रदेश महासचिव सागर रबारी.. जैसे नेताओं के इस्तीफे का झटका भी लगा.. कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में कुछ उलटफेर कर पाई.. लेकिन कुल सीटों में उसका हिस्सा सीमित रहा.. कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में किसान और आदिवासी मुद्दों पर जोर दिया..

 

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