शराबबंदी के बाद बिहार में नशे का ट्रेंड, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
बिहार में साल 2015 से 2026 के बीच सूखे नशे के इस्तेमाल में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है .शराब तस्करी के भी मामले दर्ज किए जा रहे हैं. ऐसे में बिहार में शराब के साथ ड्रग्स भी सरकार और समाज के लिए आफत बन चुका है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार में साल 2015 से 2026 के बीच सूखे नशे के इस्तेमाल में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है .शराब तस्करी के भी मामले दर्ज किए जा रहे हैं. ऐसे में बिहार में शराब के साथ ड्रग्स भी सरकार और समाज के लिए आफत बन चुका है.
बिहार में शराबबंदी है, लेकिन 10 साल बाद भी शराब की तस्करी और शराब पीने की घटनाएं जारी हैं. जहरीली शराब से भी लगातार मौतों का मामला सामने आता रहा है. इन सबके बीच बिहार में सूखे नशे यानी ड्रग्स का चलन तेजी से बढ़ा है. शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मेंगांजा, स्मैक, डोडा, चरस, कोडीनयुक्त कफ सिरप और दूसरे ड्रग्स की बरामदगी हो रही है.शराब और ड्रग्स, दोनों ही सरकार व समाज के लिए आफत बन चुके हैं.
बिहार पुलिस के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2026 में मई तक ड्रग्स में 21,024.37 KG गांजा, 54.048 KG चरस, 51.9 KG हेरोइन, ब्राउन शुगर और स्मैक, 59.351 KG अफीम, 3,45,309 इंजेक्शन, 9,06,907 टैबलेट और कैप्सूल, कोडीन कफ सिरप की 2,82,960 बॉटल की जब्ती की गई है. इस दौरान 89 कथित नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई.देशभर में ड्रग्स की बरामदगी और इस्तेमाल को लेकर 27 मार्च 2018 को पूछे गए एक सवाल पर गृह मंत्रालय ने बताया था.
बिहार में बढ़ रहे सूखे नशे के मामले को लेकर ये फैक्ट भी जानें
शराब के मुकाबले ड्रग्स यानी सूखे नशे का इस्तेमाल सस्ता
सूखे नशे की ट्रांसपोर्टिंग भी शराब के मुकाबले आसान
स्कूल और कॉलेजों तक ड्रग्स की पहुंच आसान हुई
बिहार के सीमावर्ती जिले ड्रग्स ट्रांजिट कॉरिडोर में तब्दील होते जा रहे हैं
बिहार में शराबबंदी से पहले शराब बंदी के बाद कितना था सूखे नशे का इस्तेमाल
साल 2015: 14.37 किलो गांजा, 1.12 किलो हेरोइन और 1.97 किलो अफीम जब्त हुआ था, हशीश की कोई बरामदगी नहीं हुई. साल 2016: शराबबंदी वाले साल 10800 KG गांजा, 115.81 KG हशीश, 0.04 KG हीरोइन, 14.98 अफीम की जब्ती साल 2017: 28887.62 KG गांजा, हशीस 243.51, 7.56 हीरोईन, 328.85 अफीम मिला था.
साल 2025 आते-आते बिहार में कितना बढ़ा सूखे नशे का इस्तेमाल?
साल 2025 में बिहार में लगभग 28,000 किलो गांजा, 60 kg हिरोइन 2,400 किलो अफीम और पॉपी स्ट्रॉ, 3.25 लाख कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें और 3.48 लाख नशीले टैबलेट की बरामदगी हुई है. इस दौरान सूखे नशे की कथित तस्करी और इस्तेमाल को लेकर 2,161 मामले दर्ज किए और 3,520 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसकी जानकारी तब के डिप्टी सीएम और वर्तमान के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सवाल पर दी थी.
सूखे नशे के जाल में क्यों फंसता जा रहा है बिहार?
साल 2015 से लेकर 2026 तक बिहार में सूखे नशे और ड्रग्स के इस्तेमाल में कई गुना इजाफा हुआ है. दरअसल, एक वर्ग ने शराब के विकल्प के रूप में स्मैक, गांजा, ब्राउन शुगर और नशीली दवाओं का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
बिहार की नेपाल के साथ तकरीबन 700 किलोमीटर की खुली सीमा. इसका इस्तेमाल बिहार में सूखे नशे की एंट्री कराने के लिए ड्रग्स तस्कर करते हैं. किशनगंज, अररिया, मधुबनी, सीतामढ़ी और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिले ड्रग्स ट्रांजिट कॉरिडोर में तब्दील होते जा रहे हैं. बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों से भी बिहार में लगातार ड्रग्स की तस्करी हो रही है. बिहार से सटे इन राज्यों के बॉर्डर इलाके से बड़ी मात्रा में ड्रग्स की तस्करी करते हुए तस्कर पकड़े जा रहे हैं.
बेरोजगारी, पलायन और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों के चलते भी युवा नशे की ओर आ रहे हैं. नशामुक्ति केंद्रों में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या 18-35 वर्ष के युवाओं की है. स्कूल और कॉलेज स्तर तक नशे की पहुंच भी तेजी से बढ़ी है. इसकी लगातार शिकायतें भी आ रही है. शराबबंदी के बाद भी बिहार में लगातार शराब की बरामदगी हो रही है. इसका साफ अर्थ है कि बिहार में अब भी शराब उपलब्ध है, लेकिन इसके लिए ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है. वहीं, स्मैक की छोटी पुड़िया, नशीली गोलियां, कफ सिरप सस्ते रेट पर उपलब्ध हो जाते हैं.
सूखे नशे की ट्रांसपोर्टिंग आसान है. इसकी बड़ी खेप को किसी शहर या उसके आसपास डंप किया जा सकता है. फिर वहां से अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय सप्लायर तक पहुंचाया जाता है. वहीं, शराब की तस्करी में कई तरह की अलग चुनौतियां हैं.
नशे के इंजेक्शन से संक्रमित एड्स की मरीजों की संख्या भी बढ़ी
बिहार में इजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने के मामले में भी बढ़ोतरी हुई है. इस साल मई तक 3,45,309 इंजेक्शन की जब्ती हो चुकी है. इंजेक्शन के इस्तेमाल से एड्स के मरीजों की भी संख्या बढ़ रही है. एड्स कंट्रोल सोसाइटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में एचआईवी के कुल 1.06 लाख मरीज हैं. इनमें11,836 लोग ऐसे हैं, जो नशे की सुई के कारण संक्रमित हुए हैं. दरअसल, एक ही सिरिंज से कई लोग नशा करते हुए पाए जाते हैं. इस दौरान अगर एक भी शख्स एचआईवी संक्रमित हो तो कई अन्य लोगों के भी इसकी चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है.



