सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स के निशाने पर शुभांकर

आलोचकों की तीखे बयानों से पटे डिजिटल प्लेटफार्म, गलगोटिया विवाद में भी खूब हुई थी फजीहत

कोहली व आम्रपाली दुबे के मामले में भी आ चुके हैं लोगों के निशाने पर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। शुभांकर का विवादों के साथ पुराना रिश्ता रहा है। बता दें पत्रकार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभांकर मिश्रा कई बार अपने बयानों, पॉडकास्ट के सवालों और वीडियो के कारण सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल हो चुके हैं। इससे पहले गलगोटिया विवाद में इनकी फजीहत खूब हुई थी। अब इस नए विवाद में सोशल मीडिया पर उनके आलोचनाओं की बाढ़ आ गई है। लोग उनकी कार्यशैली पर उनको जूकर ट्रोल कर रहे हैं।
ट्रोल करने वालों आम से लेकर खास लोग शामिल हंै। जिस पॉडकास्टर के मंच पर सेक्स से अध्यात्म तक फिल्म से राजनीति तक और विवाद से वायरलिटी तक सब कुछ मिलता हो उसके मंच पर जाकर सनी देओल की फिल्म का प्रमोशन होना खुद उस नई डिजिटल पत्रकारिता की कहानी बन गया है जहां माइक पत्रकार का होता है कैमरा क्रिएटर का और मेहमान स्टार होता है लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि फैसला एल्गोरिद्म करता है। तो फिर सवाल सिर्फ सनी देओल से नहीं है सवाल शुभांकर मिश्रा से है कि क्या यह पॉडकास्ट है या प्रमोशन की प्रीमियम दुकान?

आम्रपाली दुबे के पॉडकास्ट और तीखे सवाल भी ट्रोलर्स ने घेरा

कई बार सेलेब्स या मेहमानों के साथ अपने इंटरव्यू और पॉडकास्ट के दौरान उनके निजी जीवन या तीखे सवालों (जैसे आम्रपाली दुबे के साथ इंटरव्यू का मामला) के कारण भी यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया है।

यह पत्रकारिता है या प्रभाव बेचने का कारोबार

क्या यह पत्रकारिता है या प्रभाव बेचने का कारोबार? क्या बड़े सितारे बातचीत करने आते हंै या अपनी फिल्म की डिजिटल मार्केटिंग कराने? क्योंकि इससे पहले फरवरी में हुए देश के बड़े विवादों में से एक गलगोटिया विवाद में भी शुभांकर मिश्रा पर सवालों की लड़ी लगी थी। उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा था और जेन जी उन्हें खूब खरी खोटी सुना रहा था।

जगन्नाथ मंदिर विवाद पर खिंचाई

उन्होंने पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और राधा रानी से जुड़ा एक वीडियो बनाया था, जिसमें एक तथाकथित शाप का जिक्र किया था। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हुईं और उन्हें भारी विरोध व आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी और वीडियो हटाना पड़ा।

कोहली और आरसीबी से जुड़ेवीडियो पर लोगों के निशाने पर आए

क्रिकेट और खिलाडिय़ों पर की गई टिप्पणियों या वीडियो को लेकर भी विराट कोहली के फैंस ने उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया था, जिसके बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स में भी भारी गिरावट आई थी।

लोग बोले -व्यूज की भूख है या व्यक्तिगत रंजिश

शुभंकर मिश्रा की पत्रकारीय शैली हर बार सवालों के घेरे में रहती है। चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ को लेकर एआईजनरेटेड खूनी तस्वीरों के इस्तेमाल से लेकर फूलन देवी और समय रैना जैसे मामलों में उनके रुख ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। उनपर सवाल उठाते हुए ट्रोल करने वालों ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हेंव्यूज की भूख है या व्यक्तिगत रंजिश?

यूपी पुलिस के एनकाउंटर्स पर हाईकोर्ट की फटकार

कहा- प्रमोशन के लिए गोली मारना खतरनाक, हाफ एनकाउंटर पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हाफ एनकाउंटर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने श्रावस्ती में हुए कथित हाफ एनकाउंटर पर सुनवाई करते हुए कहा पूछा कि पुलिस की हर गोली हर बार घुटनों या उसके नीचे ही कैसे लग जाती है। जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं।
लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने अलाउद्दीन उर्फ छोटकऊ की ओर से दाखिल की गई आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की है. कोर्ट ने पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में भी कई विसंगतियां पाए जाने की बात कही। कोर्ट ने थानाध्यक्ष की ओर से 15 मीटर से दोनों पैरों में गोली मारने के दावे पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि अक्सर हम देख रहे हैं कि पुलिस की हर गोली घुटने या उसके नीचे ही कैसे लगती है? जबकि पुलिसवालों को एक छर्रा तक नहीं लगता और आरोपी के पैर में ही गोली लगती है। पुलिस द्वारा सामान्यत: ये बताया जाता है कि अपराधी पकड़ा गया तो उसने अंधाधुंध फायरिंग की लेकिन, पुलिसकर्मियों की वर्दी को एक छर्रा भी नहीं छू पाता है। सभी बिना चोट के बच जाते हैं और पुलिस एक गोली चलाती है वो भी अभियुक्त के घुटने या उसके नीचे लगती है। कोर्ट ने इस पुलिस विभाग की इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई और कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के लिए पैर में गोली मारने की प्रवृत्ति खतरनाक है। सजा देने का अधिकार पुलिसवालों का नहीं बल्कि न्यायपालिका के पास है।

श्रावस्ती एनकाउंटर मामले पर सुनवाई

बता दें कि ये मामला 9 मई 25 का है जब थाना इकौना में सात साल की बच्ची के अपहरण मामले में शफ़ीक और दो अन्य आरोपियों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में लोगों ने शफ़ीक को मौके से ही पकडक़र पुलिस के हवाले कर दिया। 12 मई को पुलिस ने अलाउद्दीन नाम के आरोपी को अभियुक्त बताते हुए उसे मुठभेड़ में पकड़े जाना दिखाया, जिसमें उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी।

दल-बदल पाप रोकें मीलार्ड : सिब्बल

उद्धव के वकील ने की अपील, जस्टिस बागची ने कहा- क्या हम शिंदे को अयोग्य ठहरा दें?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शिवसेना की इस दलील से असहमति जताई कि एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने वाले विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि वह स्पीकर की भूमिका नहीं निभा सकता और विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकता।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच उद्धव ठाकरे गुट के सदस्य सुनील प्रभु की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले की सुनवाई गुरुवार दोपहर को 2 बजे जारी रहेगी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें शिवसेना (यूबीटी) ने स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया था। साथ ही, चुनाव आयोग के उस फैसले को भी चुनौती दी गई थी जिसमें शिवसेना (शिंदे) को असली पार्टी मानते हुए उन्हें धनुष-बाण का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। अगर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर का उन्हें अयोग्य न ठहराने का आदेश रद्द कर दिया जाता है, तो क्या एकनाथ शिंदे (और दूसरे अलग हुए गुट के विधायकों) को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून के अनुसार अयोग्य घोषित किया जा सकता है? जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट से पूछा। जज ने क्चञ्ज गुट की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ पेश हुए सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत से पूछा कि क्या कोर्ट आज ऐसा कोई फैसला दे सकती है जिससे शिंदे अयोग्य हो जाएं, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया था और शिंदे नए चुनावों के बाद फिर से चुने जा चुके हैं।

पत्नी व बहन को मारने के बाद खुद को गोली से उड़ाया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । राजधानी केगोमती नगर में हुसडिय़ा केपास पति ने अपनी पत्नी व बहन को भी गोली मारने के बाद खुद को भी गोली मार ली है। तीनोंकी मौत हो चुकी है।
जानकारी केअनुसार एसबीआई जानकीपुरम में काम करने वाले 38 वर्षीय मानस बाजपेयी ने गोमतीनगर के हुसडिय़ा चौराहा स्थित अपने घर पर पहले पत्नी दिव्या को उसके बाद बहन तूलिका उर्फसीबा-28 वर्षीय को मारी गोली मारी फिर खुद को गोली मार ली। इस घटना में तीनों की मौत हो गई। घटनास्थल से असलहा बरामद हुआ है। मौके पर डीसीपी और जॉइंट सीपी लॉ एंड आर्डर मौजूद हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जयंती पर याद किए गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी

पीएम मोदी व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि
खरगे और सोनिया गांधी ने वीर भूमि पर दी पुष्पांजलि

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित वीर भूमि पहुंचकर उन्हें नमन किया। वंही पीएम मोदी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उन्हे याद किया।
खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री को 21वीं सदी के आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए युवाओं और तकनीकी प्रगति में उनके योगदान को याद किया। पार्टी नेताओं ने 18 वर्ष की उम्र में मतदान का अधिकार देने जैसे ऐतिहासिक फैसलों का उल्लेख भी किया। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य पार्टी नेताओं ने बृहस्पतिवार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोनिया गांधी, खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। खरगे ने राजीव गांधी के।योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लाखों लोगों में उम्मीद दी और भारत को 21वीं सदी की संभावनाओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजीव गांधी एक दूरदर्शी नेता थे : मल्लिकार्जुन खरगे

खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि राजीव गांधी एक दूरदर्शी नेता थे और उनकी विरासत उन बड़े बदलावों में जीवित है, जिनका उन्होंने समर्थन किया तथा भारत के युवाओं, तकनीकी प्रगति और नए विचारों में उनके अटूट विश्वास में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी को सबसे सार्थक श्रद्धांजलि भारत की सद्भाव और मेल-मिलाप की भावना को मजबूत करना तथा बौद्धिक स्वतंत्रता, नवाचार और युवाओं की आकांक्षाओं को बढ़ावा देना होगी।

युवाओं के बीच जारी हलचल के दौर में उनके उन फैसलों को याद करना जरूरी : जयराम

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि देश में युवाओं के बीच जारी हलचल के दौर में उनके उन फैसलों को याद करना जरूरी है, जिनसे युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा गया। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि राजीव गांधी ने 18 वर्ष की उम्र में मतदान का अधिकार देकर युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया। संविधान के 61वें संशोधन के जरिए मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई थी। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल हुईं और नवोदय विद्यालयों की राष्ट्रव्यापी व्यवस्था सामने आई।
उन्होंने राजीव गांधी के योगदानों में 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने का भी उल्लेख किया।

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